मोदी और योगी सरकार में अंधेरे में यूपी, 76 फीसदी गांवों से बिजली गायब

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लखनऊ, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गोरखपुर में अपने भाषण के दौरान जिला मुख्यालयों पर 24 घंटे गांवों में 18 घंटे और तहसील मुख्यालयों में 20 घंटे बिजली देने की घोषणा की ये कोई नया वादा नहीं है इससे पिछली सरकार में भी इसी तर्ज पर बिजली दी जा रही थी। मगर घोषणाओं के इतर जमीनी स्तर की बात करें तो योगी सरकार की घोषणा एक जुमला नजर आ रही है।

केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार उ प्र के ग्रामीण क्षेत्रों में 2.54 करोड़ घरों में से मात्र 60 लाख 54 हजार घरों में बिजली कनेक्शन है तथा शहरी इलाकों के 75 लाख घरों में से 61 लाख घरों में बिजली कनेक्शन है। इस प्रकार उ प्र के ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 76 प्रतिशत घर और शहरी क्षेत्र के लगभग 19 प्रतिशत घर आज भी बिजली से वंचित हैं। इस प्रकार उ प्र के लगभग 2 करोड़ घरों तक आज भी बिजली नहीं पहुँची है।

उत्तर प्रदेश में मौजूदा समय में कुल मांग लगभग 13,500 मेगावाट की है इनमे से उत्तर प्रदेश के अपने बिजलीघर जिनकी कुल क्षमता लगभग 5500 मेगावाट लगभग 3800 मेगावाट बिजली पैदा कर पा रहे हैं केन्द्रीय पूल से 5000 मेगावाट बिजली मिलती है तो शेष बिजली प्राइवेट सेक्टर से महंगे दामों पर लेनी पड़ती है इनका नतीजा यह है कि ऊर्जा विभाग पर हर साल करोड़ों का बोझ चढ़ जाता है निजी घरानों पर अति निर्भरता के चलते पावर कारपोरेशन 60 हजार करोड़ रूपये के घाटे व कर्ज में डूब गया है अतः ऊर्जा नीति में बुनियादी बदलाव समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

निजी घरानों से काफी मंहगी बिजली खरीद के करारों के चलते प्रदेश के सरकारी बिजली घरों को बन्द किया जा रहा है जिससे घाटा और बढ़ रहा है। सरकारी क्षेत्र के बिजली घरों को बन्द करने से जहां एक ओर उत्पादन लागत बढ़ रही है वहीं उनका नियमित संचालन न होने से उत्पादन इकाईयों के समय से पहले खराब हो जाने का खतरा भी है।

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