“युवराज” के लिए 9 करोड़ का ऑफर, फिर भी नहीं बिकेगा !

"युवराज" के लिए 9 करोड़ का ऑफर, फिर भी नहीं बिकेगा !

उसके लिए लोग 9 करोड़ रुपये तक देने को तैयार हैं लेकिन उसके मालिक ने इस ऑफर को भी ठुकरा दिया है. जी नहीं, इतना भारीभरकम ऑफर किसी जबर्दस्त कार के लिए नहीं बल्कि एक युवराज के लिए है. मुर्रा प्रजाति का एक भैंसा युवराज, जिसे दुनिया का सबसे महंगा भैंसा माना जाता है. हरियाणा के किसान कर्मवीर सिंह के इस भैंसे की शोहरत पुरे देश में फैल चुकी है और ये देश के जिस भी हिस्से में होने वाले पशु मेले में जाता है छा जाता है.

दिल्ली में हाल ही में पीएम मोदी ने कृषि उन्नति पशु मेले का उद्घाटन किया और यहां अपने मालिक कर्मवीर के साथ पहुंचा युवराज एक बार फिर से सबके आकर्षण का केंद्र बन गया. आइए जानें आखिर क्यों इतना खास है युवराज और क्यों लगी उसके लिए 9 करोड़ रुपये की भारीभरकम बोली.

इसलिए सबसे महंगा है युवराजः

युवराज के सीमंस की जबर्दस्त मांग हैं और देश भर के लोग अपनी दुधारू भैंसो के लिए युवराज की सीमन की चाह में कर्मवीर के पास आते हैं. दरअसल लोग चाहते हैं कि इस बेहतरीन भैंसे के सीमन से उनकी भैंसें भी बेहतरीन नस्ल के बच्चों को जन्म दें. युवराज की जबर्दस्त सेहत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसकी लंबाई 6.5 फीट और वजन करीब 1600 किलो है.

युवराज एक बार के स्खलन से करीब 4-6 मिली सीमन उत्सर्जित करता है. उसके सीमन की भारी मांग को देखते हुए इसे वैज्ञानिक तरीके से 500-600 डोज में डाइल्यूट किया जाता है. इस डोज को प्लास्टिक स्ट्रा में रखकर लिक्विड नाइट्रोजन कंटेनर में स्टोर किया जाता है. युवराज के सीमन की इतनी भारी मांग है कि इसकी हर डोज को कर्मवीर 300 रुपये में बेचते हैं.

युवराज से होती है भारी कमाईः

कर्मवीर को युवराज से हर साल लगभग 45 लाख रुपये की कमाई होती है. इसके सीमंस की हर डोज को 300 रुपये में बेचकर उन्हें भारी कमाई होती है. हालांकि युवराज को चुस्त और तंदरुस्त रखने के लिए कर्मवीर उसके विशेष ख्याल रखते हैं और उसकी हर दिन की खुराक आपको हैरान कर देगी. युवराज को हर दिन 100 सेब, 20 लीटर दूध और 15 किलो अनाज और ड्राई फ्रूट्स खिलाए जाते हैं. साथ ही ठंड के मौसम में उसे थोड़ी शराब भी दी जाती है.

इतना ही नहीं दिन में दो बार सरसो के तेल से युवराज की मालिश भी की जाती है. साथ ही महीने में चार बार उसके शरीर के सारे बालों को हटाया जाता है. युवराज की देखभाल करने में 10 लोग लगते हैं. इस भैंसे का नाम युवराज रखने के पीछे एक कहानी है. कर्मवीर बताते हैं कि जब इसका जन्म हुआ था तो ‘उसके सितारे क्रिकेटर के बीच बुलंद थे.’, इसलिए इसका नाम युवराज रखा गया. इतना ही नहीं उन्होंने युवराज के पिता (भैंसे) का नाम योगराज रखा और उसकी मां का नाम है गंगा. योगराज और गंगा अभी भी कर्मवीर के पास हैं. गंगा अभी भी हर दिन 26 लीटर दूध देती है.

जबर्दस्त दूध देने वाली मुर्रा प्रजाति मुख्यता उत्तरी और मध्य भारत में पाई जाती है. इसे दक्षिण एशिया की सबसे ज्यादा दूध देने वाली प्रजाति के तौर पर जाना जाता है. युवराज इसी मुर्रा प्रजाति से आता है. बेहतरीन भैंसों की कमी के कारण ही डेयरी फर्म के मालिक अपनी दुधारू भैंसों के लिए युवराज जैसे बेहतरीन भैसों के सीमन की तलाश करते हैं.

तो आखिर क्यों कर्मवीर 9 करोड़ रुपये में भी युवराज को बेचने को तैयार नहीं हैं तो इसका जवाब खुद कर्मवीर देतें हैं और कहते हैं, ‘युवराज मेरे लिए बेटे जैसा है.’