मोदी-योगी सरकार के प्रमुख निशाने पर है- पूर्व CM अखिलेश की ईमानदार और विकासवादी छवि,देखें रिपोर्ट !

0
826
Loading...

 

लखनऊ : केंद्र की मोदी सरकार और यूपी की योगी सरकार के लिए पूर्व CM अखिलेश यादव 2019 के लोकसभा चुनावों में खतरे की घंटी साबित हो सकते हैं क्योंकि यूपी के ताजा हालातों ने जनता को अखिलेश के प्रति सोचने पर मजबूर कर दिया है। गौरतलब है यूपी में योगी सरकार के 3 महीने के अंदर ही अपराध पिछले पांच साल के उच्चतम शिखर पर पहुँच गया है,यूपी में बड़े पैमाने पर हत्या,बलात्कार,लूट और डकैती के रोजाना अपराधों में भारी इजाफा हुआ है तथा योगी सरकार अपराध रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई है,वहीँ योगीराज में पुलिस पर उपदर्वी और बदमाश सरेआम जानलेवा हमले कर रहे हैं । कानपुर में पुलिस पिटाई की हालिया घटना ने यूपी की कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है।

CM योगी यूपी में काम करने की जगह अखिलेश सरकार के हर बड़े प्रोजेक्ट की जांच करवाने में व्यस्त हैं तथा अखिलेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार रहे गोमती रिवर फ्रंट में घपलों की सीबीआई जांच की सिफारिश के चौबीस घंटे बाद ही पहला शिकंजा प्रोजेक्ट से जुड़े आठ इंजीनियरों पर कसा है। सोमवार रात गोमतीनगर थाना में इन सभी के खिलाफ वित्तीय अनियमितता का केस दर्ज कर लिया गया। गोमतीनगर इंस्पेक्टर सुजीत दुबे ने बताया कि एफआईआर में सिंचाई विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता गुलेश चंद्रा, एसएन शर्मा व काजिम अली, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता शिवमंगल यादव, अखिल रमन व कमलेश्वर सिंह, तत्कालीन अधिशासी अभियंता-अधीक्षण अभियंता रूप सिंह यादव और वर्तमान अधिशासी अभियंता सुरेंद्र यादव के नाम शामिल हैं।

गौरतलब है कि योगी सरकार ने आगरा-लखनऊए एक्सप्रेसवे की जांच करवाने की घोषणा भी कर रखी है तथा इसके साथ ही CM साहब कब्रिस्तान निर्माण की जांच करवाने का आदेश भी जारी कर चुके हैं।

इसमें से पहले सात रिटायर हो चुके हैं। आरोप है कि इन सबने रिवर फ्रंट परियोजना के लिए आवंटित रकम का बड़ा हिस्सा मिलीभगत से डकार लिया। परियोजना का ठेका डिफॉल्टर कंपनी गैमन इंडिया को देने के लिए अफसरों और इंजीनियरों ने टेंडर की शर्तों को मनमाने तरीके से बदल डाला। सिंचाई विभाग, शारदा सहायक के अधिशासी अभियंता की तरफ से दी गई तहरीर में न्यायिक जांच समिति की 74 पन्ने की रिपोर्ट को आधार बनाया गया है।

Loading...