अखिलेश, राहुल और जयंत की तिकड़ी बिगाड़ेगी BJP और BSP का प्लान, BJP, BSP नेताओं में बढ़ रही है बेचैनी

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नोएडा, उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में गठबंधन की ओर बढ़ रहे अखिलेश यादव, राहुल गांधी और जयंत चौधरी से भाजपा की चुनावी रणनीति को झटका लगता दिख रहा है। भाजपा की रणनीति पहले वोटों के बिखराव से अपना पाला मजबूत करने की थी। जिसमें अब वो सफल होती नहीं दिख रही है।

यूपी में मुजफ्फरनगर दंगे के बाद जाट-मुस्लिम गठजोड़ में भाजपा ने सेंध लगाई थी और इस गठजोड़ को बिखेर कर लोकसभा चुनाव में वेस्ट यूपी में भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। 2017 आते आते वेस्ट यूपी के हालात कुछ बदले हैं। रालोद बिखरे हुए जाट और मुस्लिम लोगों को एकजुट करने का प्रयास कर रही है। तो वहीं जाट आरक्षण और हरित प्रदेश के मुद्दे से जूझ रही भाजपा की परेशानी में रालोद की कोशिशों से और इजाफा हो सकता है।

पहले चरण के चुनाव की बात करें तो इसके 15 जिलों में सपा के पास 24 सीटें हैं। ऐसे में गठबंधन से ये आंकड़ा बढ़ सकता है। जाट आंदोलन से जूझ रही भाजपा के पास इस क्षेत्र से अभी 13 सीटें हैं। तो वहीं रालोद के पास 9 सीटें हैं और कांग्रेस के पास 5 सीटें हैं।

अगस्त 2013 में मुजफ्फरनगर के दंगे के बाद से जाट और मुस्लिमो में बिखराव आ गया था। कभी राजनीतिक ही नहीं कारोबार और खेती-किसानी में भी साथ-साथ कदम बढ़ाने वाले जाट-मुस्लिम एकदम से अलग हो गए। जिसका सियासी फायदा भाजपा को 2014 के लोकसभा चुनाव में मिला।

2012 के सियासी नतीजों और मुजफ्फरनगर के दंगों से सबक लेते हुए रालोद ने जमीनी स्तर पर जाट-मुस्लिमों को एकजुट करना शुरू कर दिया है, यही उसका कोर वोट है। सूत्रों की मानें तो मेरठ, शामली, बागपत और मुजफ्फरनगर में बैठकें आयोजित की जा रही हैं। एक ही हुक्के के इर्द-गिर्द बैठकर सारी पुरानी बातें भुलाई जा रही हैं। आपसी सहमति से जाट और मुस्लिम उम्मीदवार तय कर रहे हैं।

जानकार बताते हैं कि वेस्ट यूपी की करीब 125 ऐसी सीटें हैं जहां जाट और मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका में हैं। आगरा, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और बरेली ऐसे मंडल हैं जहां जाट और मुस्लिम गठजोड़ कोई भी समीकरण बना और बिगाड़ सकता है। अखिलेश राहुल और जयंत के साथ आने से इन मंडलों में जाट मुस्लिम गठजोड़ मजबूत होगा था मुख्यमंत्री अखिलेश की साफ सुथरी छवि के चलते अन्य जातियों का वोट भी इस गठबंधन की तरफ झुकेगा जिससे बसपा और भाजपा का गणित बिगड़ सकता है।

रालोद के जनरल सचिव जयंत चौधरी का कहना है कि चंद गलत शक्तियों ने दो वर्गोंं के बीच खाई बनाने का काम किया था। अब वो गलतफहमियां दूर हो रही हैं। हम जिले-जिले में जाकर दोनों लोगों को मिलाने का काम कर रहे हैं। चुनाव ही नहीं आगे भी दोनों को मिलाने की ये कोशिश जारी रहेंगी।

क्या कहते हैं आंकड़े- 

पहले चरण में 15 जिलों की 73 विधानसभा सीट पर मतदान होना है। 2012 के आंकड़ों को देखें तो सपा को 24, बसपा को 23, भाजपा को 13, रालोद को नौ और कांग्रेस को पांच सीटें मिली थीं। मथुरा की मांट सीट उपचुनाव के दौरान भाजपा के खाते में जा चुकी है। वहीं मथुरा की गोवर्धन सीट से रालोद विधायक भाजपा में शामिल हो चुका है। इसी तरह से अलीगढ़ की बरौली विधानसभा से रालोद विधायक भी भाजपा में शामिल हो चुका है।