अखिलेश के इस दांव से भाजपा में मचा हड़कंप, लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हलचल तेज !

0
118

 

कानपुर, निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों की लिस्ट अभी जारी नहीं हुई है। कई दिनों की मेहनत के बाद भी भाजपा के प्रत्याशी फाइनल नहीं हो सके हैं। प्रत्याशीयों के नाम लगभग फाइनल कर चुकी भाजपा को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक दांव ने फिर से अपने प्रत्याशियों के नाम पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

लोकसभा चुनाव से पहले निकाय चुनाव जीत कर मनोवैज्ञानिक बढत लेने के लिए सभी राजनीतिक दल एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। इसी क्रम में समाजवादी पार्टी और बसपा ने कई दिनों की चर्चा के बाद मेयर के नाम पर मुहर लगा दी। जिसके कारण सत्ताधारी भाजपा के अंदर हलचल मच गई है। तीन दिन तक चली मैराथन बैठक के बाद कानपुर मेयर पद के लिए तीन नामों पर विचार के बाद लिस्ट लखनऊ पहुंचा दी गई, लेकिन अखिलेश के दांव के चलते अब मेयर की कुर्सी का फैसला दिल्ली से होगा।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कानपुर से मेयर पद के लिए पूर्व विधायक अरुणा तोमर के नाम पर मुहर लगा दी। जिसके बाद भाजपा के नेता भी एक्शन में आ गए और रात में ही प्रदेश कार्यालय लखनऊ में क्षत्रिय नेताओं को तलब कर लिया गया। पार्टी अब फिर से जातिगत आंकड़ों के जरिए मेयर का टिकट जिताऊ प्रत्याशी को देने के लिए मंथन कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने नामों की सूची दिल्ली मंगवाई है। जहां वो शहर से सांसद मुरली मनोहर जोशी के साथ ही संघ के नेताओं के साथ चर्चा करने के बाद आज एक नाम पर अपनी सहमति दे देंगे। इसी के बाद कई भाजपाई अपने करीबियों के साथ दिल्ली की ओर कूच कर गए हैं, जिसमें दो नामी स्कूल के प्रबंधक भी हैं।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने निकाय चुनाव अकेले-अकेले लड़ने का एेलान कर चुके हैं। पिछले दो चुनावों में कानपुर से मेयर की कुर्सी पर भाजपा जीतती आई है और 2017 में ब्रेक लगाने के लिए अखिलेश यादव ने क्षत्रीय समाज से अरूणा तोमर को टिकट देकर भाजपा के समीरकण बिगाड़ दिए है।

कानपुर में ब्राम्हण के बाद क्षत्रिय मतदाताओं की संख्या है, जो पिछले चुनाव में भाजपा के पक्ष में खड़े दिखे। अरूणा तोमर के चुनाव में उतरने से भाजपा को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है और इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। कांग्रेस ने मेयर पद पर ब्राम्हण चेहरे पर दांव लगाए जाने पर लगभग-लगभग सहमति बन गई है।

पिछले दो चुनाव में कानपुर के मुस्लिम मतदाता बसपा के सलीम अहमद के पक्ष में खड़े दिखे, लेकिन 2017 में किसी भी दल ने मुस्लिम को टिकट नहीं दिया। इसी के चलते जिधर मुस्लिम वोटर जाएगा, वही मेयर की कुर्सी पर विराजमान होगा।

इसबार भाजपा को हराने के लिए मुस्लिम मतदाता सपा और कांग्रेस के जिताऊ कैंडीडेट के साथ खड़ा नजर आएगा। इस बात से भाजपा के नेता भलीभांति वाकिफ हैं और इसलिए कानपुर की कुर्सी को लेकर जबरदस्त माथा-पच्ची चल रही है। सूत्रों की माने तो भाजपा और संघ ने नामी स्कूल के प्रबंधक की पत्नी का नाम फाइलन कर दिया था, लेकिन अरूणा तोमर के आने के बाद भाजपा नए सिरे से फिर विचार शुरू कर दिया है।

एक पदाधिकारी की मानें तो कानपुर की मेयर सीट सबसे अधिक विवादित हो चुकी है। यहां से कई दर्जन आवेदन आए। लेकिन चर्चाओं में एक नया शैक्षणिक कारोबारी का परिवार रहा। इस परिवार के लिए भाजपा के एक धड़े ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक एड़ी-चोटी का जोर लगाया। अंदरखाने की मानें तो कानपुर सांसद डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी और उनकी टीम इस घराने को हर कीमत पर भजपा ज्वाइन कराने की कवायद कर रहा था।

भाजपा के एक बड़े नेता ने कानपुर के इस चर्चित और बड़े राजनीतिक घराने को दिल्ली पहुंचाने का आमंत्रण भी दे दिया। आमंत्रण के कुछ घंटे बाद ही ‘शिक्षा क्वीन’ दिल्ली के लिए रवाना हो गई। इस समय वह दिल्ली में ही हैं। इस परिवार के पास राजनीति रसूख के साथ पैसा और मत भी हैं, लेकिन तोमर के आने के बाद भाजपा में नए सिरे से नाम को लेकर मंथन शुरू हो गया है। ये शिक्षा क्वीन पहले भी चुनाव लड़ चुकी हैं। इनके परिवार का कानपुर में तगड़ा प्रभाव है।

सपा ने घोषित किये लखनऊ, आगरा और फिरोजाबाद के मेयर प्रत्याशी, देखें किसे मिला टिकट !

Loading...