अखिलेश के तथ्य में सत्य : कारगिल शहीद मुकेश राठौर के बाद से सीमा पर नहीं शहीद हुये गुजरात के जवान !

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झाँसी/लखनऊ : पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि बीजेपी शहीदों और देशभक्ति पर राजनीति करती है,भाजपा ने जनता को गुमराह कर चुनाव जीता है। अखिलेश यादव ने सवाल उठाते हुए कहा कि अब 56 इंच का सीना बताने वाले कहां गए ? सीमा पर जो भी जवान शहीद हो रहे हैं वे यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत के हैं, उनमें से कोई भी गुजरात का क्यों नहीं है ?

गौरतलब है कि कारगिल युद्ध में शहीद हुये जवान मुकेश राठौर गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले थे और सूत्रों के अनुसार गुजरात के मूल निवासी के रूप में शहीद होने वाले वह आखिरी वीर शहीद थे।

अखिलेश यादव : अन्य प्रदेशों की तरह, सीमा पर क्यों शहीद नहीं होते गुजरात के जवान !

सदस्यता अभियान को लेकर झांसी पहुंचे अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके, उन्होंने आरोप लागते हुए कहा कि बीजेपी और केंद्र सरकार का काम सिर्फ देशभक्ति, वंदेमातरम और राष्ट्रवाद पर राजनीति करना रह गया है। योगी सरकार के कामकाज के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार की अभी परीक्षा चल रही है। इसमें कानून व्यवस्था सबसे बड़ा सवाल है। सहारनपुर, जालौन और बुलंदशहर की घटनाएं माहौल बिगड़ने का प्रमाण हैं। अखिलेश ने पूछा शहीदों के सिर काटे जा रहे हैं और सरकार क्या कर रही है, वह निंदा करने की जगह बहस क्यों नहीं करती ।

पुंछ में पाकिस्तान की बर्बरता का शिकार हुए दो शहीदों का जिक्र करते हुए उन्होंने मीडिया से भी पूछा सिर्फ यही क्यों दिखाया जा रहा है कि सिर काटे गए, यह क्यों नहीं दिखाया जा रहा कि और कौन-कौन से अंग काटे गए हैं ।

अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी वाले उन्हें भी हिन्दू नहीं मानते, उन्होंने कहा वे खाने से पहले एक रोटी गाय को खिलाते हैं और हमसे बड़ा भी कोई गौ-पालक तथा गौ-रक्षक है क्या ?

कारगिल युद्ध में शहीद हुये मुकेश राठौड़ एकमात्र गुजराती हैं, वहीं ये भी सत्य है कि गुजरात के युवा फौज में कम जाते हैं !

अखिलेश क्यों बोले कि अब हिन्दु युवा वाहिनी वालों को यूपी छोड़ दिल्ली जाना चाहिये !

बुलंदशहर में तो एक दादा की इन हिन्दु युवा वाहिनी वालों ने सिर्फ इसलिए हत्या कर दी क्योंकि उसके पौत्र ने दूसरे धर्म की लड़की से प्रेम विवाह किया था। दिल्ली के कई मंत्रियों ने भी इसी तरह के विवाह किए, उन पर हमला कब करोगे ? इसलिये कहता हूं कि हिन्दु युवा वाहिनी वालों को अब यूपी छोड़ दिल्ली जाना चाहिये ।
सपा सरकार की परियोजनाओं पर चल रही जांच के सवाल पर एरच बांध का उदाहरण देते हुए कहा कि बेतवा नदी पर कई पुल बने हैं। सरकार को अगर जांच ही करनी है तो एरच बांध के डाउन स्ट्रीम में वैसा ही एक बांध बनवाकर देख लें। इसके बाद रेट तय कर जांच करें। सब साफ हो जाएगा। सरकार को बनवाना कुछ नहीं है, बस बातें हो रही हैं।

मोदी राष्ट्रवाद के नाम पर वोट लेते है लेकिन,जहाँ के वो CM रहे है वहां से कभी किसी के शहीद होते हुए नही सुना,एैसा क्यों ?

अखिलेश यादव स्वयं सेना में भर्ती होना चाहते थे,पर किन्हीं करणों से वो नही जा पाये और आगे चलकर राजनीति मे आ गये । हालाँकि अखिलेश यादव के ताऊ और तेज प्रताप के बाबा स्व.रतन सिंह यादव और अखिलेश के ससुर कर्नल एस सी रावत सेना को अपनी सेवायें देने के बाद रिटायर हुए। अखिलेश यादव स्वयं धौलपुर मिलट्री स्कूल से शिक्षा प्राप्त किये हैं। इसलिए उन्हें सेना का महत्व बहुत अच्छे से पता है।

वहीं अखिलेश के इस बयान से सारे नेताओं की हवाईयाँ उड़ गईं, जब उन्होंने कहा कि मैं चाहता ही नही बल्कि मेरी तीव्र इच्छा है कि मेरा बेटा अर्जुन सेना में जाकर देश की सेवा करे,आगे बोलते हुये कहा कि जो हसरत पिता की अधूरी रह गयी वो करने का मौका अगर मेरे बेटे को मिलेगा तो मुझे बहुत खुशी होगी । हालाँकि मैं अपने बेटे के ऊपर किसी तरह का दबाव ड़ालना पसंद नहीं करूँगा,उसे जो भी करना होगा उसमे मैं अर्जुन का पूरा साथ दूँगा ।

वहीं मोदी जी स्वयं देश को बता चुके हैं कि गुजराती के खून में व्यापार होता है शहादत नहीं । अमित शाह भी बयानं कर चुके हैं कि व्यापारियों को सैनिको से अधिक जोखिम उठाना पड़ता है। वैसे आपको बिहार के भाजपा नेता भीम सिंह का भी वो बयान याद होना चाहिए। जिसमे उन्होंने कहा था सेना में तो लोग मरने के लिए ही जाते हैं।

सेना में गुजराती जवानों और शहादत पर अखिलेश के दावे का सच !

चूँकि,अखिलेश यादव की छवि एक सौम्य एवं मृदुभाषी नेता की है। इसलिए उनके इस कठोर सवाल से कि,गुजरात से कोई शहीद हुआ हो तो बताओ ? को सुनकर बहुत से भाजपा के नेताओं और मोदी भक्तों को अच्छा नही लगा होगा ,पर सच भी यही है कि पूरे देश के अन्य राज्यों के मुकाबले गुजरात से ना के बराबर जवान ही सेना में भर्ती होते है । जबकि गुजरात से भर्ती होने वाले जवानों में सबसे ज्यादा 49% जवान उत्तरी गुजरात से आते हैं जो कि ज्यादातर आदिवासी इलाका है और सबसे कम दक्षिणी गुजरात से आते हैं ।
सेना के अनुसार पहले तो गुजरातियों की संख्या सेना में बहुत कम रही है और इतिहास में सबसे ज्यादा भर्ती सन् 2015 में 700 जवानों के रूप में हुयी थी ।

गौरतलब है कि अगर हम कारगिल युद्ध के बाद के सरकारी आंकड़े में नजर ड़ालें तो कारगिल युद्ध के बाद से लेकर आज तक कोई भी गुजराती जवान देश के लिये शहीद नही हुआ है,या ये भी कहा जा सकता है कि जहां जान का खतरा ज्यादा होता है वहां सेना के गुजराती जवानों की ड्यूटी ही नहीं लगायी जाती,अब इसके पीछे क्या कारण हैं ये तो भारत सरकार और सेना ही बता सकती है । गौरतलब है कि कारगिल युद्ध में शहीद हुये जवान मुकेश राठौर गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले थे और सूत्रों के अनुसार गुजरात के मूल निवासी के रूप में शहीद होने वाले वह आखिरी वीर शहीद थे।

 

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