प्रभु के रेल मंत्रालय में RTI से खुला बड़ा घोटाला – 972 रु में सौ ग्राम दही,1253 रु में 1 ली० तेेल खरीदा अफसरों ने !

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दिल्ली : देश में आज हर तरफ सिर्फ घोटाले ही छाये हुये हैं,अभी हाल ही में देश के कई बडें पैट्रोल पम्पों मे तेल की बडी चोरी पकडी गयी थी । वहीं केंद्र की स्वाघोषित ईमानदार मोदी सरकार के तथाकथित ईमानदार रेलमंत्री सुरेश प्रभु के मंत्रालय में बड़ा घोटाला उजागर हुआ है, जिससे केन्द्र सरकार की ईमानदारी,देशभक्ति और राष्ट्रवाद की खुलेआम धज्जियाँ उड गयी हैं ।

एक एक्टिविस्ट को सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के अनुसार भारतीय रेल के सेंट्रल रेलवे कैटरिंग डिपार्टमेंट में दही 972 रुपये प्रति 100 ग्राम और तेल 1253 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा गया। आरटीआई कार्यकर्ता अजय बोस द्वारा आरटीआई के तहत दूसरी अपील के बाद हासिल की गई सूचना के अनुसार सेंट्रल रेलवे कैटरिंग डिपार्टमेंट ने इन चीजों को उन पर लिखे अधिकतम विक्रय मूल्य (एमआरपी) से कई गुना ज्यादा दर पर खरीदा। रेलवे के अधिकारियों ने द हिंदू अखबार से कहा कि ये “टाइपिंग एरर” हो सकता है। एक अन्य अधिकारी से अखबार से कहा कि वो मामले की जांच कराएंगे।

अजय बोस ने द हिंदू को बताया कि उन्होंने जुलाई 2016 में आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी लेकिन सेंट्रल रेलवे ने उन्हें जो जवाब दिया उसमें कुछ छिपाने की कोशिश की जा रही थी। उसके बाद बोस ने पहली अपील दायर की। अपीलैट अथॉरिटी ने रेलवे को 15 दिन के अंदर वांछित सूचना देने का आदेश दिया फिर भी बोस को कई महीनों तक सूचना नहीं दी गयी। रेलवे की मंशा पर संदेह बढ़ने के कारण बोस ने दोबारा अपील की। तब उन्हें पूरी जानकारी मिली। बोस को मिली सूचना के अनुसार सेंट्रल रेलवे ने अमूल दही 972 रुपये प्रति 100 ग्राम की दर से खरीदा था जबकि उसकी कीमत 25 रुपये है। बोस के अनुसार उन्होंने जब सुना कि रेलवे का कैटरिंग विभाग घाटे में है तब उन्होंने आरटीआई के तहत ये सूचनाएं मांगी थीं।

रेलवे द्वारा बोस की आरटीआई के जवाब में दी गयी जानकारी के अनुसार मार्च 2016 में 58 लीटर रिफाइंड तेल 72,034 रुपये (1241 रुपये प्रति लीटर) में खरीदा गया था। रेलवे ने टाटा नमक के 150 पैकेट 2670 रुपये (49 रुपये प्रति पैकेट) में खरीदे जबकि नमक के एक पैकेट की एमआरपी 15 रुपये थी। पानी की बोतल और कोल्ड ड्रिंक 59 रुपये प्रति बोतल की दर से खरीदे गए। बोस के अनुसार उन्होंने इस जानकारी के लिए एक साल तक इंतजार किया।

बोस के अनुसार रेलवे ने चिकन, तुर दाल, मूंग दाल, बेसन और टिश्यू पेपर को भी बाजार भाव से काफी अधिक दर पर खरीदा है। 570 किलो तूर दाल 89,610 रुपये (157 रुपये प्रति किलो), 650 किलो चिकन 1,51,586 (233 रुपये प्रति किलो), 148.5 किलो मूंग दाल 89610 रुपये (157 रुपये प्रति किलो) और 178 पानी-कोल्ड ड्रिंक्स के बॉक्स (एक बॉक्स में 10 बोतलें) 106031 रुपये (59 रुपये प्रति बोतल) की दर से खरीदे गए।

बोस को मिली जानकारी के अनुसार जो चीजें सही दर पर खरीदी गईं वो हैं समोसा, प्याज और आलू। रेलवे के कैटरिंग विभाग द्वारा खरीदी गयी चीजों को सीएसटीएम के गोदाम में रखी जाती हैं और आईआरसीटीसी के जन आहार कैंटिन, रेलवे बेस किचन और डेक्कन क्वीन, कुर्ला-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस इत्यादि ट्रेनों में वितरित की जाती हैं।

बोस को आरटीआई के तहत मिली जानकारी के अनुसार रेलवे द्वारा खरीदी गयी सामग्री और वितरित की गयी सामग्री में विसंगती है। मसलन 7680 रुपये में 250 किलोग्राम आटा खरीदा गया लेकिन 450 किलो आटा (90 किलो बेस किचन को और 360 किलो आईआरसीटीसी-जन आहार कैंटिन को) बांटा गया। इसी तरह 20 किलो मैदा खरीदा गया लेकिन वितरित 35 किलो किया गया। खरीदा गया 255 किलो बासमती चावल लेकिन वितरित हुआ 745 किलो।

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