U.S,U.K,ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने भारतीयों के लिए नौकरी के दरवाजे बंद किये,PM मोदी पूरी तरह फेल !

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दिल्ली, विदेश में नौकरी की चाहत रखने वाले भारतीय युवा इन दिनों चौतरफा मुश्किलों में फंसे हैं। मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया ने अपना 457-वीजा प्रोग्राम रद्द कर दिया जिसका उपयोग मुख्य रूप से भारतीय ही करते हैं। वहीं अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे आदेश पर साइन किए हैं, जो एच-1बी वीजा प्रक्रिया को सख्त बना देगा। इसके स्थान पर अब नई वीजा प्रणााली बना दी गई है।

‘एच-1बी वीजा पर भारत-अमेरिकी रिश्तों में आ सकती है खटास’ !

ट्रंप का यह कार्यकारी आदेश कम वेतन वाले विदेशी कामगारों के लिए अमेरिकी कंपनियों में नौकरियों को कम कर देगा। इसका लाभ उठाने वाले विदेशियों में भारतीय शीर्ष पर हैं। ट्रंप की ‘बाय अमेरिकन एंड हायर अमेरिकन’ नीति के तहत एच-1बी वीजा कार्यक्रम अब सस्ते वेतन पर काम करने वाले विदेशियों को लंबे समय तक लाभ नहीं दे पाएगा।

ट्रम्प ने कहा, “हमारे इमिग्रेशन सिस्टम में गड़बड़ी की वजह से अमेरिकियों की नौकरियां विदेशियों के हिस्से जा रही हैं। कंपनियां, कम वेतन देकर विदेशियों को जॉब पर रख लेती हैं जिससे अमेरिकियों की नौकरियां मारी जा रही हैं। ये सब अब खत्म होगा।”

वास्‍तव में यह डोनाल्‍ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्‍ट’ नीति के तहत किया गया है। गौरतलब है कि ट्रंप ने चुनावी नारे ‘बाय अमेरिकन एंड हायर अमेरिकन’ दिया था, उसी दिशा में ये उनका कदम माना जा रहा है। दरअसल ट्रंप ने राष्‍ट्रपति चुनाव से पहले ही घोषणा की थी कि यदि वह सत्‍ता में आएंगे तो उच्‍च विदेशी पेशेवरों को देश में आने के लिए दिए जाने वाले अस्‍थायी वीजा कार्यक्रम को सख्‍त बनाएंगे।

गौरतलब है कि 2015-16 के चुनावी प्रचारों के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात पर बार-बार जोर दिया था कि विदेशी लोग स्थानीय लोगों की नौकरियां छीन रहे हैं। अब दूसरे यूरोपीय देश भी इस बात पर विचार कर रहे हैं। चूंकी अब ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बन चुके हैं अमेरिका के सांसद और विनियामक निकाय इस बात को व्यवहार में लाने के लिए जोर दे रहे हैं। सांसदों ने इस पर कई प्रस्ताव भी रखे हैं भारतीय कंपनियों द्वारा एच 1बी वीजा का दुरुपयोग न हो सके। इसके बाद डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने निर्देश दिए कि दूसरे देशों से आने वाले लोग सामान्य प्रोग्रामर न हों बल्कि वो एक्सपर्ट और स्किल्ड होने चाहिए।

भारत में मेट्रो और मंदिर में घूमने और फोटो खिचाने के बाद ऑस्ट्रेलिया पहुंच PM ने दिया भारत को झटका, खतरे में भारतीयों की जॉब तथा अब भारतीयों का ऑस्ट्रेलिया में नौकरी पाना हुआ बहुत मुश्किल —-

भारत दौरे से लौटने के बाद आस्ट्रलिया के पीएम मैलकॉम टर्नबुल ने भारतीयों के लिए एक झटका देनेवाला फैसला लिया है। ऑस्ट्रेलिया ने 95,000 से अधिक अस्थायी विदेशी कर्मचारियों द्वारा उपयोग किए जा रहे वीजा कार्यक्रम को समाप्त कर दिया है। इस फैसले के बाद वहां रहे इंडियन को बड़ा झटका लगेगा, क्योंकि यह वीजा रखने वालों में ज्यादातर भारत के हैं। इस कार्यक्रम को 457 वीजा के नाम से जाना जाता है।

इस वीजा के तहत विदेश कर्मचारियों को चार साल तक नौकरी करने की अनुमति थी। प्रधानमंत्री मैलकॉम टर्नबुल ने कहा, ‘हम आव्रजन देश हैं लेकिन…ऑस्ट्रेलियाई कामगारों को अपने देश में रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। इसीलिए हम 457 वीजा समाप्त कर रहे हैं। इस वीजा के जरिये अस्थायी तौर पर विदेशी कर्मचारी हमारे देश में आते हैं।’

एबीसी की रिपोर्ट के अनुसार 30 सितंबर तक ऑस्ट्रेलिया में 95,757 कर्मचारी इस वीजा के तहत काम रहे है। हालांकि, टर्नबुल ने कहा कि इस कार्यक्रम की जगह दूसरा वीजा कार्यक्रम लाया जाएगा। टर्नबुल ने कहा कि नया कार्यक्रम यह सुनिश्चित करेगा कि विदेशी कर्मचारी उन क्षेत्रों में काम करने के लिए ऑस्ट्रेलिया आएं जहां कुशल लोगों की काफी कमी है न कि केवल इसीलिए आएं कि नियोक्ता को ऑस्ट्रेलियाई कामगारों के बजाए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करना आसान है।

सिंगापुर और ब्रिटेन में भी भारतीय कर्मचारियों के लिए नौकरी के रास्ते बंद —-

दुनियाभर के हर देश के लिए अप्रवास चर्चा का विषय बना हुआ है। 2017 भारतीय आईटी कर्मचारियों के लिए बुरा साल बनकर सामने आया है। भारतीय आईटी कर्मचारी जो दुनिया के बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों का हिस्सा हैं, कई देशों में प्रतिकूल वीजा व्यवस्था की परेशानियों से जूझ रहे हैं।

अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और सिंगापुर में भी कंप्यूटर साइंस और आईटी डिग्रीधारक भारतीय प्रोग्रामर प्रतिकूल वीजा व्यवस्था की परेशानी से जूझ रहे हैं। अमेरिका द्वारा एच1बी वीजा को लेकर लगाए जा रहे कयासों के बीच सिंगापुर में काम करने के लिए आईटी प्रोफेशनल्स को मिलने वाले वीजा पर रोक लगा दी।

अमेरिका के तर्ज पर ब्रिटेन में भी स्थानीय नागरिकों को नौकरी पर रखने के लिए कहा गया है। सिंगापुर भी हाल में ऐसे देशों की लिस्ट में शुमार होता जा रहा है जो विदेशी पेशेवरों को नौकरी देने के खिलाफ हैं।

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