438 में से 338 नगर पंचायत के अध्यक्ष पद पर BJP का खाता नहीं खुला, 243 में तो जमानत ही जब्त हो गयी !

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लखनऊ, उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव के परिणामों को गुजरात में प्रचारित कर रही भाजपा के लिए ये चुनाव कोई ख़ास नहीं रहा। पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव की तुलना में निकाय चुनाव में भाजपा का कई जिलों में तो सूपड़ा साफ हो गया। यहां तक कि यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के वार्ड तक में भाजपा हार गयी तो वहीँ डिप्टी सीएम केशव मौर्या के जिले की सभी अध्यक्ष पद की सीट हार गयी।

लेकिन निकाय चुनाव में सिर्फ नगर निगमों में जहां ईवीएम का कमाल हुआ उसे छोड़कर भाजपा नगर पंचायतों और नगर पालिकाओं की बात नहीं कर रही है क्योंकि यहां पर बैलेट पेपर से हुए चुनाव में उसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। भाजपा से ज्यादा तो निर्दलीयों ने जीत दर्ज की है।

प्रदेश के निकाय चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए एक बुरे सपने की तरह ही हैं। 438 नगर पंचायतों में जहां भाजपा का 338 नगर पंचायतों में भाजपा का खाता भी नहीं खुल पाया तो वहीं 243 नगर पंचायतों में तो भाजपा जमानत भी नहीं बचा पाई है। ऐसे में मीडिया द्वारा इसे भाजपा की लहर बताना जनता को बेफकूफ बनाने के अलावा कुछ भी नहीं है।

राज्य निर्वाचन आयोग के अपर आयुक्त वेद प्रकाश वर्मा ने सोमवार को निकाय चुनाव में जमानत जब्त के आंकड़ों का खुलासा करते हुए सूची में भाजपा को टॉप पर रखा है। 652 निकायों में महापौर और अध्यक्ष पद के लिए 7442 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। इनमें से 6101 (81.98 प्रतिशत) प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई है। इसी प्रकार पार्षद और सदस्यों के 11995 पदों पर 71671 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। 47342 (66.05 फीसदी) प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई है।

निकायों में महापौर और अध्यक्ष पदों पर भाजपा के 624 में से 184 प्रत्याशी विजयी हुए हैं। जबकि 243 (38.94 प्रतिशत) प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई है। निकायों में सदस्यों के पदों पर 7414 प्रत्याशियों में से 2182 प्रत्याशी विजय हुए हैं और 3413 प्रत्याशी (46.03 प्रतिशत) जमानत भी नहीं बचा सके।

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