इलाज के लिए फेसबुक पर मदद मांगने वाले “पान सिंह तोमर” के एक्टर सीताराम पांचाल अब नहीं रहे !

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From Left Sandeep Kumar Yadav and on Right side Late Sitaram Panchal

 

बॉलीवुड एक्टर संदीप कुमार यादव की फेसबुक मुहीम भी रोक ना सकी एक्टर सीताराम पांचाल (सीटू भाई) को इस कलाकार भरी दुनिया से जाने से, देखें उनका फ़िल्मी सफर !

मुंबई : मायानगरी यूँ तो हजारों लोगों को रोजाना काम दे रही है पर है तो ये मायानगरी ही जहाँ दिन और रात बराबर होते हैं,लोग तो ये भी कहते है कि मुंबई कभी सोती नहीं है। वहीँ इसी मायानगरी में कई कलाकार के ऊपर तो लक्ष्मी जी पूरी तरह मेहरबान है वे जो कुछ भी बना दें तो लक्ष्मी आएँगी ही आएँगी,जबकि हजारों की संख्या में ऐसे भी लोग हैं जिनको रोल ढूढ़ने के लिए डायरेक्टर के यहाँ चक्कर लगाने पड़ते हैं। एक एपिसोड में रोले मिला तो पता नहीं अगले में कब मिलेगा।

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ऐसी ही कश्मकश भरी जिंदगी को जीकर अभिनय के क्षेत्र में अपना एक अलग नाम बनाने वाले सीटू भाई “सीताराम पांचाल” आखिरकार उस एक्टर ने मौत के आगे सरेंडर कर ही दिया, जिसने अपनी मुफलिसी से तंग आकर फेसबुक तक पर मदद मांग ली थी, वहां से उन्हें कुछ मदद भी हासिल हुई पर उनको जाने से कोई रोक नहीं पाया , लेकिन अब उनका रोल इस दुनिया में कट हो गया है। गौरतलब है कि सीताराम पांचाल को तीन साल से कैंसर था, अपनी मौत के वक़्त उनकी उम्र 54 साल थी, गुरुवार की सुबह अचानक उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई।

वो ‘पान सिंह तोमर’, ‘बैंडिट क्वीन’, ‘सारे जहां से महंगा’, ‘पीपली लाइव’, ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ जैसी कई हिंदी फिल्मों में काम कर चुके हैं,और एक मंझे हुए अभिनेता थे।

कुछ दिन पहले फेसबुक पर जब उनके सह कलाकार रहे संदीप कुमार यादव ने उनकी कुछ तस्वीरों को जब पोस्ट किया था, तो उन्हें देख कर हर कलाकार का कलेजा हिल गया था।

सीताराम पांचाल जी ‘सीतू भाई’ का अंतिम संस्कार कल दिनांक 11 अगस्त को करीब सुबह 7 बजे, मीरा रोड स्टेशन के पास स्थित पूनम सागर जॉगर्स पार्क, श्मशान घाट पर किया जाएगा ।

उन्होंने मित्रों “भाभी जी घर पर है” सीरियल के एक्टर और ‘पीपली लाइव’ फिल्म में सीटू भाई के साथ काम करने वाले संदीप कुमार यादव वा अन्य ने जब उनके फेसबुक और वॉट्सएप पर दोस्तों और प्रशंसकों को लिखा मार्मिक मैसेज पढ़ा ,जिसमे लिखा था-

“भाइयों, मेरी हेल्प करो, मेरी कैंसर से हालत खराब होती जा रही है, मैं आपका कलाकार भाई, सीताराम पांचाल.”

संदीप कुमार ने दैनिक आज से बात करते हुए बताया कि सीताराम पांचाल को पिछले तीन सालों से किडनी और लंग्स कैंसर था, इन तीन सालों में उनके कई साथियों ने, सह-कलाकारों ने उनकी मदद की। इनमें इरफान खान, पांचाल के एनएसडी बैचमेट संजय मिश्रा, रोहिताश गौड़, टीवी प्रोड्यूसर (एक घऱ बनाऊंगा) राकेश पासवान जैसे नाम शामिल हैं। फेसबुक पर की गई उनकी अपील के बाद भी काफी हाथ उनकी मदद के लिए आगे आए थे. लेकिन उन जैसे कलाकार पर हाथ फैलाने की नौबत आए ये चीज़ अपने आप में शर्मनाक है।

Image may contain: 3 people, people smiling, indoorसीताराम पांचाल कैथल जिले के डूंडर हेड़ी गांव में 1963 में पैदा हुए, उन्होंने हरियाणवी फिल्म ‘लाडो’ के अलावा छन्नो में भी काम किया। एक्टिंग छुटपन में स्कूल में ही शूरू कर दी थी, ग्रेजुएशन के बाद दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में उनका सलेक्शन हो गया। उसके बाद से वो हिंदी फिल्मों में अलग अलग चरित्र भूमिकाओं में दिखते रहे थे।

                                                       फिल्म ‘पान सिंह तोमर’ में इरफान ख़ान के साथ

हमारी बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री का ये चलन हमेशा से रहा है कि चंद लीड एक्टर्स को छोड़ कर बाकियों की कोई पूछ नहीं होती, उन्हें उनके किरदार भर सराहा जाता है और बाद में सिरे से भुला दिया जाता है। जबकि कोई भी फिल्म हर छोटे-बड़े एक्टर की मेहनत का नतीजा होती है, सीताराम पांचाल जैसे अभिनेता किसी फिल्म को समग्रता प्रदान करते हैं, लेकिन अक्सर इनकी जिंदगानियां मुफलिसी के साए में ही गुज़रती है।

अभिनय का पेशा कोई नौकरी तो है नहीं, जिसमें पेंशन की व्यवस्था हो और बॉलीवुड सारा पैसा तो मेन स्टार को ही दे देता है, छोटे एक्टर्स के हिस्से में तो बस दिहाड़ी मजदूरी भर आती है। उसमें वो बीमारियों और बुढ़ापे का इंतज़ाम करे भी तो कैसे ? मजबूरन सीताराम पांचाल जैसे लोगों को पब्लिक अपील करनी पड़ती है, ये सूरतेहाल दुखद है। मुंबई की झुग्गियों में ऐसे एक्टर्स की भीड़ मिल जाएगी जिन्होंने यादगार रोल किए।

 

                                                 अक्षय कुमार के साथ फिल्म ‘जॉली एलएलबी 2’ में

अरबों के सालाना व्यापार वाले इस बॉलवुड में भी काश इन कलाकारों के वेलफेयर के लिए भी कोई संस्था बने, कोई ये सुनिश्चित करे कि लोगों को अपने अभिनय से खुशियों के पल देने वाले इन कलाकारों की जिंदगियों से ख़ुशी गायब न हो जाए। अगर सीताराम पांचाल जी की मौत ऐसी किसी पहल की राह खोलती है, तो ये उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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