सहारनपुर में दलितों पर हुये खूनी अत्याचार और हिंसा की वजह, क्या “ठाकुर-ठाकुर : सरकार और अपराधी” हैं !

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सहारनपुर : सहारनपुर में हुयी हिंसा में ठाकुर समुदाय के लोगों दूारा दलित महिलाओं को बुरी तरह पीटना,उनके जननाँघ में वार करना,महिला का अपनी तलवारों से हाथ काट देना और दर्जनों घरों को आग लगा देना क्या यही रामराज्य की दस्तक है ?

आज दलित समाज के लोग इसी रोष और गुस्से के चलते सड़कों पर सरकार के खिलाफ आकर खड़े हो गये हैं क्योंकि सरकार ने ठाकुर समुदाय के लोगों पर सरकार और पुलिस ने उचित कार्यवाही नहीं की ।

शब्बीरपुर और शिमलाना गांव में रहने वाले राजपूत और दलित समुदाय के लोगों के बीच लड़ाई हुई। शब्बीरपुर दलित और शिमलाना ठाकुर बहुल इलाका है। रिपोर्ट के मुताबिक, दलित और ठाकुर समाज के बीच ताजा लड़ाई महाराणा प्रताप की याद में रखे गए एक कार्यक्रम के दौरान हुई। पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, दोनों समुदायों के बीच पहले भी ऐसी लड़ाईयां होती रही हैं। इससे पहले दोनों समुदाय के बीच अंबेडकर की मूर्ति रखने पर भी विवाद हुआ था।

हालाँकि स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले भी दोनों समुदायों के बीच छोटी-छोटी लड़ाईयां होती रही हैं, पर इस तरह से उग्र होकर खूनी संघर्ष पहली बार हुआ है और कहीं ना कहीं इसका कारण राज्य में योगी सरकार का होना है क्योंकि घर जलाते और पीटते वक्त दंगाई कह रहे थे कि अब हम ठाकुरों की सरकार है और हरिजन एक्ट तुम दलितों पर ही लगवायेंगे ।

पुलिस के मुताबिक, शिमलाना में महाराणा प्रताप की याद में कार्यक्रम रखा गया था। शब्बीरपुर में रहने वाले ठाकुर उसमें हिस्सा लेने के लिए जा रहे थे। आरोप है कि वो लोग तेज आवाज में गाने बजाते हुए जा रहे थे । इसपर शब्बीरपुर के मुखिया शिव कुमार ने उन लोगों को आवाज धीमी करने को कहा जिसपर दोनों की लड़ाई हो गई।

इसपर ठाकुर समुदाय के लोगों ने कथित रूप से गांव से लोगों को बुला दिया। पहले 300 और फिर 2000 के करीब ठाकुर समाज के लोग शब्बीरपुर पहुंच गए। जिसके बाद झगड़ा बढ़ा और 25 घरों को फूंक दिया गया। ठाकुरों पर पुलिस के वाहनों और आग बुझाने वाली गाड़ी का रास्ता रोकने का भी आरोप है।

जिस शख्स की मौत हुई उसका नाम सुमित राजपूत है। वह पास के रसूलपुर गांव का रहने वाला था और शिमलाना में कार्यक्रम में हिस्सा लेने गया हुआ था। पुलिस के मुताबिक, सुमित के कहीं भी कोई चोट का निशान नहीं था और उसकी मौत की वजह दम घुटना बताया गया है।

दलितों के खिलाफ कुल चार एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसमें हत्या, हत्या की कोशिश आदि आरोप शामिल हैं। हालांकि, फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस मामले में दलित लोगों की तरफ से कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई गई है।

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