बसपा की भलाई सिर्फ भाजपा की “कलाई” , नहीं तो तय है “जेल” में शशिकला से मिलाई !

0
61

लखनऊ, भारत की राजनीति में उत्तर प्रदेश राज्य का एक बड़ा कद है और जिस भी पार्टी को यह राज्य अपना समर्थन करता है वो पार्टी ज्यादातर देश की सत्ता पर काबिज रही है। 2014 के लोक सभा चुनावों में भाजपा की प्रचंड जीत भी इसी बात को दर्शाती है,अभी हाल ही में संपन्न हुए उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला जिससे सपा और बसपा में अब एक नव चेतना का जागृत होना अति आवश्यक हो गया है क्योंकि अब बिहार की तर्ज पर गठबंधन करना ही इन दोनों स्थानीय दलों की आगे के राजनीतिक भविष्य की संभावनाओं को तय करेगा।

उत्तर प्रदेश में दो बड़े स्थानीय दल सपा और बसपा अपने आज तक के सबसे ख़राब राजनितिक प्रदर्शन से गुजरे हैं जिसके कारण भी वह स्वयं ही हैं क्योंकि इन दलों का जन्म वा निर्माण समाज के पिछड़े और शोषितों के कल्याण के लिए हुआ था। समय की चाल और ब्राह्मणों के दिमागों की उपज से ये दल अपनी विचारधाराओं से हटकर नयी दिशा को पाने में लग गए,जहाँ किसानों, पिछड़ों, दलितों, मुस्लिमों और शोषितों के विकास के मुद्दों की जगह “सर्व जन हिताए सर्व जन सुखाये “ के नारे लगे और काशीराम का सपना लखनऊ के उसी अंबेडकर मैदान के पत्थरों के हाथियों के नीचे में दफ़न हो गया जहाँ सतीश चंद्र मिश्र जैसे नेता “नहीं” वकील हावी हो गए थे, जिन्होंने योजनाबाद तरीके से काशीराम के पुराने विश्वासपात्र पिछड़े नेता बाबु सिंह कुशवाहा को जेल भिजवा कर पार्टी से बहार करवा दिया और ब्राह्मणवाद का परचम फहराते हुए शंकुन्तला मिश्र जैसी बड़ी यूनिवर्सिटी लखनऊ में बनवा दी।

तो वहीँ समाजवादी पार्टी ने भी दर्जन भर ब्राह्मणों पर विश्वास जताया और कैबिनेट मंत्री के तौर पर अभिषेक मिश्र,माता प्रसाद पांडेय,मनोज पांडेय,विजय मिश्र गाजीपुर,विजय मिश्र भदोही,नारद राय,शिवा कान्त ओझा,शारदा प्रताप शुक्ला आदि नेताओं को अपने मन की खूब चलाने दी जिसका फलस्वरूप ये हुआ कि पार्टी का मूल यादव वोटर 38 % छिटक कर भाजपा में चला गया तथा अन्य पिछड़ा तबका पूरा साथ छोड़ गया।

अखिलेश-मायावती के एक होने पर क्या मायावती का भी हाल शशिकला जैसा ही होगा ?

 

अब जैसा की हम जानते हैं की सीबीआई एक स्वतंत्र सरकारी जांच एजेंसी है पर पिछले कुछ सालों से हम लगातार ये देख रहे हैं की जिसकी सरकार केंद्र में होती है सीबीआई भी उसी सरकार की सेवा में इर्द-गिर्द घूमती रही है। आज भारत में सरकार भाजपा की है और देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी गुजरात से हैं तो वहीँ सीबीआई के केंद्रीय ऑफिस में 70 % से अधिक अधिकारी भी गुजरात से ही हैं।

अभी हाल ही में तमिलनाडू में एक बहुत ही रोचक घटना घटी जिसमे AIADMK प्रमुख शशिकला अगले दिन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाली थी किन्तु उससे पहले ही केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की दया से सीबीआई ने शशिकला को आय से अधिक सम्पति के एक पुराने मामले में अचानक गिरफ्तार कर जेल भेज दिया,वही नरेंद्र मोदी के इस तीर से कई शिकार हुए जहाँ एक ओर अब तमिलनाडू में पनीरसेल्वम की मदद से भाजपा के कमल खिलने की उम्मीद बढ़ गयी है तो वहीँ शशिकला का चैप्टर भी कुछ दिनों के लिए बंद हो गया है।

अब ऐसी ही कुछ सम्भावना उत्तर प्रदेश में भी बनने लगी है जिसमे नरेंद्र मोदी सरकार का सबसे बड़ा साथ सीबीआई देगी क्योंकि 2019 के चुनाव को देखते हुए और सपा-बसपा के गठबंधन की संभावनाओं को भापतें हुए नरेंद्र मोदी ने अपनी सारी बिसातें बिछा दी हैं और पूरी कोशिश में हैं की किसी भी कीमत पर सपा-बसपा का गठबंधन न होने पाए तथा मायावती को भी यह गुप्त रूप से बता दिया गया है की अगर वह अपना रास्ता गठबंधन की तरफ लेकर जाती हैं तो दूसरा रास्ता सीबीआई के माध्यम से “आय से अधिक संपत्ति के मामले में” शशिकला की तरह जेल की तरफ भी जाएगा।

अब यह देखना रोचक होगा कि जैसे मायावती अपनी चुनावी रैलियों में निर्भीक दिखती है तो क्या इस आशंका से लड़ने को तैयार होंगी या हथियार डालकर शांत हो जाएँगी और अपनी राजनितिक भविष्य का अंत कर लेंगी !

Loading...