समाजवादी सरकार दोबारा लौटेगी तो और बेहतर काम होगा – मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार की शाम लखनऊ के ताज होटल में हावर्ड विश्वविद्यालय के साउथ एशिया इंस्टीटयूट द्वारा किए शोध पर आधारित पुस्तक कुंभ मेला-एक क्षणिक महानगर का प्रतिचित्रण के विमोचन समारोह में कहा कि प्रदेश में समाजवादी सरकार दोबारा लौटेगी तो और बेहतर काम होगा।

उन्होंने कहा है कि आगरा में ताजमहल के अलावा कई अन्य आकर्षण भी हैं और आगरा में सैलानियों के ठहराव को और प्रोत्साहित करने के लिए वहां जनसुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। इसमें शोधकर्ताओं की भी मदद ली जाएगी।

उन्होंने एक अन्य पुस्तक प्लानिंग फार कन्जर्वेशन लुकिंग एट आगरा का भी विमोचन किया। दोनों पुस्तकों के लेखक जाने माने वास्तुविद और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विजिटिंग प्राफेसर राहुल मेहरोत्रा हैं।

समारोह में हार्वर्ड विवि की एक्जक्यूटिव डायरेक्टर मीना हीव्येट ने कहा कि यह शोध कई अन्य क्षेत्र के शोधकर्ताओं को लाभ पहुंचाएगा।

कुंभ मेले के आयोजन में योगदान देने वाले तत्कालीन अधिकारियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। तत्कालीन मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने बताया, मुख्यमंत्री अखिलेश के कुशल नेतृत्व में सभी विभागों के बेहतर समन्वय से कुंभ मेला शानदार ढंग से निपटा।

मुख्य सचिव दीपक सिंघल ने कहा कि बड़ी संख्या में प्रदेश के छात्र पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शिक्षक कुछ महीनों के लिए आकर प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाएं, इस विषय पर उनकी हार्वर्ड के शिक्षकों और अधिकारियों से बातचीत हुई है।

पुस्तक के लेखक प्रो.राहुल मेहरोत्रा ने कहा कि कुंभ पर पुस्तकें तो कई लिखी गईं लेकिन ऐसे वृहद आयोजन के लिए अस्थायी तौर पर बसाये जाने वाले शहर की मैपिंग पहले कभी नहीं की गई जिसमें दो करोड़ लोग आते हों।

कुंभ नगरी के ग्रिड आधारित ढांचे की उन्होंने विशेष रूप से सराहना की और कहा कि एक नियोजक के तौर पर उन्होंने इससे बहुत कुछ सीखा। उन्होंने बताया कि कुंभ की तैयारियों और नियोजन का इस्तेमाल हज के आयोजन के लिए करने की सोची जा रही है।

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  1. विषय: उत्तर प्रदेश में फार्मेसी एक्ट 1948,ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940/1945 एवं फार्मेसी रेग्युलेशन एक्ट 2015 के अनुपालन के सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही हेतु आवेदन ।
    महोदय,
    निवेदन है की उत्तर प्रदेश में फार्मेसी एक्ट 1948,ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940/1945 एवं फार्मेसी रेग्युलेशन एक्ट 2015 का अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु संबन्धित विभागों द्वारा कोई प्रयाश नहीं किया जा रहा है।फार्मेसी एक्ट के पैरा न॰42 के अनुसार गैर फार्मेसी शिक्षा प्रपट व्यक्ति या गैर फार्मासिस्ट दवा की बिक्री/वितरण/भंडारण/निर्माण नहीं कर सकता परंतु यह विडम्बना है की प्रदेश में दवा की बिक्री/वितरण/भंडारण/निर्माण फार्मासिस्ट को छोड़कर कोई कर सकता है प्रदेश में संचालित मेडिकल स्टोर्स पर फार्मासिस्ट की उपास्थिति/उपलब्धता नगण्य है और मेडिकल स्टोर्स पर फार्मासिस्ट केवल कागजी रूप मे ही उपस्थिति रहता है एक फार्मासिस्ट का निबंधन एक ही मेडिकल स्टोर पर होना चाहिए स्थिति यह है की एक ही फार्मासिस्ट का निबंधन 20 से 30 मेडिकल स्टोर्स पर अलग अलग जिलों में चल रहा है और खाद्य सुरक्षा और औषधि प्राशासन के जिम्मेदार अधिकारी स्वयं बिना फार्मासिस्ट की अनुमति/सज्ञान के फार्मासिस्ट की डिग्री/डिप्लोमा के कागज मेडीकल स्टोर्स के संचालको को वार्षिक कमीशन/शुल्क ले कर बेच कर मेडिकल स्टोर्स का लाइसेन्स जारी कर रहें है जिससे स्थिति यह है की प्रदेश में रैजिस्टर्ड फार्मासिस्टों के सापेक्ष दोगुनी तक मेडिकल स्टोर्स के लाइसेन्स निर्गत कर दिये गए है ।प्रदेश में नशा हेतु दवाओं का इस्तेमाल चरम पर है नकली दवाओं की बिक्री और निर्माण में काफी तेजी हुई है और दवाओं के गलत इस्तेमाल से बीमारियाँ ठीक होने की बजाय और बढ़ती जा रही है एंटिबयोटिक्स के अधिकतम प्रयोग से जहां एक ओर लोगों की प्रतिरोधक क्षमता मं कमी आ रही है दूसरी ओर आम नागरिक का शोषण किया जा रहा है।महंगी दवाओं के प्रयोग का चलन आम होता जा रहा है स्थिति तो इस कदर बिगड़ चुकी है की रैजिस्टर्ड मेडिकल प्रक्टिश्नर (डाक्टर) बिना फार्मासिस्ट की नियुक्ति किए और बिना मेडिकल स्टोर्स का लाइसेन्स के ही अपने निजी क्लीनिक पर दवाओं की खुली बिक्री/भंडारण किया जा रहा है जहां से सस्ती दवाओं को अधिकतम मूल्यों पर मरीज को सिर्फ इसलिए लिखा जा रहा है की अधिक से अधिक धन उगाही की जा सके और इस के लिए अनावश्यक दवाओं को भी लिखने में होड मची हुई है दो या दो से अधिक एंटिबयोटिक्स का बेवजह प्रयोग किया जा रहा है ।प्राइवेट अस्पताल/नर्सिंग होम भी बिना फार्मासिस्ट की नियुक्ति किए और बिना मेडिकल स्टोर्स का लाइसेन्स के ही उक्त प्रतिस्थानों पर दवाओं की खुली बिक्री/भंडारण किया जा रहा है।
    महोदय उक्त स्थितियों से एक ओर जहां आम नागरिक को दवाओं के प्रयोग की समुचित जानकारी नहीं मिलती वही दूसरी ओर गलत तरीके से दवा प्रयोग करने की मजबूरी में दवाओं के फायदे की जगह नुकसान आम बात है ।
    सरकारी उपक्रमों में भी विभागिए उदासीनता और अधिकारियों के भृष्ट रवैये की वजह से बिना फार्मासिस्ट की नियुक्ति के ही गैर फार्मेसी शिक्षा प्राप्त व्यक्ति या गैर फार्मासिस्ट से दवाओं का वितरण और भंडारण कराया जा रहा है इस क्रम में उपकेन्द्रों ए॰एन॰एम॰ पर और आशा बहू/आंगनवाड़ी केन्द्रो के द्वारा जीवन रक्षक दवाओं के वितरण और भंडारण करवाकर सरकार स्वयं आम नागरिक के जीवन से खिलवाड़ कर रही है । प्रदेश के कई अस्पतालों सी॰एच॰सी॰/पी॰एच॰सी॰ आदि फार्मसिस्ट विहीन है जहां वार्ड बॉय/सफाई कर्मचारी दवाओं का वितरण/भंडारण आम बात है।
    उत्तर प्रदेश का नागरिक को स्वास्थ्य लाभ के लिए वह सदैव ठगा हुआ महसूश करता है और दूसरे वइकल्प न होने से उसे झोला छाप डाक्टर की सेवा लेने को बाध्य होना पद रहा है ।बेहतर हो यदि उपकेन्द्रों पर फार्मासिस्ट की नियुक्त के साथ प्राथमिक स्तर की दवाओं के प्रयोग से प्राथमिक उपचार की सुविधा फार्मासिस्ट को प्रदान की जाय ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्यूंकी डाक्टर्स सी॰एच॰सी॰/पी॰एच॰सी॰ आदि केन्द्रों की तरफ रुख नहीं करते और डाक्टर्स की अनुपस्थिति में फार्मासिस्ट को प्राथमिक दवाओं के प्रयोग की छूट प्रादान की गयी है यदि उपकेन्द्रों पर फार्मासिस्ट की नियुक्ति हो जाय तो आम नागरिक को झोला छाप से इलाज हेतु मजबूर न होना पड़े ।
    महोदय, उपरोक्त अनियमितता इतनी बढ़ चुकी है आम नागरिक के स्वास्थ्य लाभ हेतु कोई प्रयाश पूर्ण होने से पहले ही भृष्टाचार की भेंट चढ़ जाते है ।
    फार्मासिस्ट को अपनी पहचान बचाए रखने में ही दिक्कतें हो रही है और रोजी रोटी के तो लाले लगे हुये हैं ।
    महोदय, एक्टानुसार फार्मासिस्ट की उपस्थित प्रत्येक सरकारी/गैर सरकारी/मेडिकल स्टोर्स और अन्य उपक्रमों में बिक्री/वितरण/भंडारण/निर्माण हेतु उपलब्ध/उपस्थिति के प्रयाश किया जाना अनिवार्य हो जाता है ताकि आम नागरिकों को दवाओं के प्रयोग से संबन्धित सही सलाह प्रयोग का सही तरीका और उचित मात्रा की सलाह के साथ दवाओं के दुष्परिणाम को कम से कम किया जा सके ।
    महोदय, फार्मासिस्ट फ़ाउंडेशन आम नागरिक को दवाओं से होने वाले दुष्प्रभावों को कम से कम एवं फार्मेसी में फार्मासिस्ट की सुनिश्चितता पर कार्य करने के साथ ही समाज में व्याप्त भृष्टाचार को उखाड़ फेकने के लिए प्रयासरत है। यदि फार्मासिस्टों को उक्त एक्टनुसार प्राप्त अधिकार का हनन/दोहन/शोषण समाप्त हेतु यदि उपयुक्त प्रयाश नहीं किया गया तो फार्मासिस्ट आंदोलअन/आमरण अनसन/संबन्धित विभाग का घेराव और विधिक कार्यवाही हेतु सक्षम न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर वाद प्रस्तुत करने हेतु स्वतंत्र होगा ।

    महोदय, 15 अगस्त 2016 से फार्मासिस्ट प्रदेश व्यापी लाइसेन्स हटाओ फार्मेसी बचाओ के माहा आयोजन का शुभारंभ और 25 सितम्बर 2016 से फार्मासिस्ट आंदोलअन/आमरण अनसन/संबन्धित विभाग का घेराव और विधिक कार्यवाही हेतु प्रयाश सुनिश्चित करने को तैयार है ।
    बिन्दुवार संक्षेप में –
    1-अगले 3 माह में उत्तर प्रदेश में संचालित सभी मेडिकल स्टोर्स के संचालक और फार्मासिस्ट रजिस्ट्रेशन के रेनिवल कार्ड के साथ जनपदीय कार्यालय में उपस्थिति होकर भौतिक सत्यापन कराते हुये ऑनलाइन सुविधा से जोड़ा जाय ताकि एक फार्मासिस्ट को निबंधन केवल एक जगह ही इस्तेमाल के साथ यह भी सुनिश्चित किया जा सके की फार्मासिस्ट निर्धारित ड्रेस कोड के साथ संबन्धित मेडिकल स्टोर्स पर भौतिक रूप में उपस्थिति रहे ।
    2- उपकेन्द्रों और आशा बहुओं/फार्मासिस्ट के बिना संचालित प्रत्येक वितरण केन्द्रों जिला चिकत्सालय/ सी॰एच॰सी॰/पी॰एच॰सी॰ आदि से दवाओं के वितरण को तत्काल अवैध मानते हुये रोक लगाई जाय और फार्मासिस्ट की नियुक्ति की जाय ताकि आम नागरिक को दवा प्रयोग की उचित सलाह और प्रयोग के तरीके और मात्रा और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभता से उपलब्ध कराया जा सके ।
    3-समस्त निजी क्लीनिक /प्राइवेट अस्पताल/नर्सिंग होम में संचालित/दवा प्रयोग हेतु फार्मासिस्ट की उपस्थिति/उपलब्धता सुनिश्चित किया जा सके ।

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