उपचुनाव में हार से योगी के मंत्रियों का दिमागी संतुलन बिगड़ा, मंत्री बोले वोटर छुट्टी पर गए थे इसलिए हारे !

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव के परिणामों में भारतीय जनता पार्टी को मिली करारी हार से सभी नेताओं को झटका तो बड़ा लगा था, पर शायद इसका असर मुख्यमंत्री योगी के मंत्रियों के दिमाग पर भी हुआ है। हालाँकि फिर भी भाजपा और उसके लोग उपचुनावों में हार को अंदर से स्वीकार करने को तैयार कतई नहीं हैं, यह अलग बात है कि पार्टी का प्रदेश नेतृत्व हार को दबे शब्दों में स्वीकार करते हुए समीक्षा करने की भी बात कर रहा हैं। जबकि भाजपा सरकार के मंत्रीगण उपचुनाव की हार को एक दूसरे नजरिए से देख उस पर पर्दा डाल रहे हैं, यही नहीं योगी सरकार का कोई मंत्री उपचुनाव की हार को ‘लौ बुझने से पहले तेज जलती है’ के नजरिए से देख रहा है तो वहीँ योगी के एक सीनियर मंत्री कह रहे हैं कि ‘भाजपा के समर्थक गर्मी की छुट्यिों में बच्चों संग घूमने जिले से बाहर हिल स्टेशन पर चले गए थे इसलिए हार गए’ के नजरिए से देख रहा है। वहीँ भाजपा के बड़े नेता और गृहमंत्री राजनाथ सिंह जी कह रहे हैं कि “बड़ी छलांग के लिए दो कदम पीछे होना पड़ता है”। अभी हाल ही में यूपी के उपमुख्यमंत्री ने भी एक विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि सीता जी विश्व की पहली टेस्ट टूयब बेबी थीं और नारद जी विश्व के पहले पत्रकार थे।

गौरतलब है कि उप्र की कैराना लोकसभा सीट पर गठबंधन का उम्मीदवार तो नूरपुर विधानसभा सीट पर सपा का उम्मीदवार विजयी हुआ है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पाण्डेय का कैराना और नूरपुर के चुनाव परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया में कहना है कि “विकास की राजनीति पर थोड़े समय के लिए फतवों व जातिवादी, सिद्धान्तविहीन राजनीति भारी पड़ी है।” डॉ. पाण्डेय ने कहा, “यद्यपि वहां के स्थानीय समीकरण चुनौतीपूर्ण थे परंतु फिर भी हमने कैराना लोकसभा में दो विधानसभाओं में कथित गठबंधन को हराया, लेकिन तीन विधानसभाओं में कहां कमियां रह गईं, साथ ही नूरपुर में भाजपा को कथित गठबंधन के बावजूद विधानसभा चुनाव के मुकाबले 11 हजार वोट अधिक प्राप्त हुए, लेकिन फिर भी कुछ वोटों के अंतर से चुनावी नतीजे हमारे अनुकूल नहीं रहे, हम इसकी गहन समीक्षा करेंगे, तदनुसार आगे की रणनीति एवं कार्ययोजना बनाएंगे.”

इसी तरह योगी सरकार के राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने इस संबंध में ट्वीट कर कहा है कि ‘कैराना में जीत जातिवाद एवं संप्रदायवाद की जीत है जो तात्कालिक है। मोदी जी ने नारा दिया जातिवाद मुक्त, संप्रदाय मुक्त भारत का और जनता काम कर रही है। लेकिन लौ बुझने से पहले तेज जलती है, उप चुनाव का परिणाम भी यही है।

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