सीएम योगी के दफ्तर में हो रहा भ्रष्टाचार आया सामने, प्रिंसिपल सेक्रेटरी पर 25 लाख घूस मांगने का आरोप !

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लखनऊ : यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की सरकार लगातार कठघरे में खड़ी नजर आ रही है, भ्रष्टाचार को लेकर जहाँ सीएम योगी ज़ीरो टॉलरेंस की बात करते हुए बड़े-बड़े दावे करते हैं तथा सार्वजनिक मंचों से अपने हर भाषण में वा अफसरों की मीटिंग में वे भ्रष्टाचार पर भाषण देना नहीं भूलते हैं । वहीँ अब उनकी सरकार की पोल पूरी तरह खुल गयी है, अब मुख्यमंत्री योगी का दफ्तर ही सवालों के घेरे में आ गया है। हालाँकि योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आ रहे थे, पर मुख्यमंत्री के कारण उन सभी मामलों पर पर्दा डाल दिया जाता रहा है।

मुख्यमंत्री दफ्तर में ही जब भ्रष्टाचार होगा तो प्रदेश का क्या भविष्य होगा ?

बता दें कि रामराज्य की बात करने वाले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनथ के राज में आरोप राज्य के सबसे ताक़तवर आईएएस अफसर पर लगे हैं, वो भी खुलेआम। एसपी गोयल सीएम योगी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी हैं, उन पर 25 लाख रूपये घूस मांगने के आरोप एक 22 साल के नौजवान अभिषेक गुप्ता ने मीडिया के सामने आकर खुलेआम लगाया हैं। अभिषेक गुप्ता की शिकायत पर राज्यपाल राम नाइक ने इस मामले की जांच के लिए योगी आदित्यनाथ से कहा, इसके लिए उन्होंने 30 अप्रैल को सीएम को चिट्ठी भी भेज दी, लेकिन 40 दिनों बाद भी इस मामले में न तो जांच हुई, न कोई कार्रवाई हुई। अब बात है कि जब मुख्यमंत्री दफ्तर में ही भ्रष्टाचार होगा तो प्रदेश का क्या भविष्य होगा ?

गौरतलब है कि गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से हुई मासूम बच्चों की मौत जैसे बड़े हादसे में भी योगी सरकार में हो रहा भृष्टाचार ही असल वजह था, जिसके कारण स्वास्थ विभाग के अधिकारियों ने अपने कमिशन के लिए अस्पताल की अति आवयश्यक वित्तीय फाइलों को रोक रखा था। वहीं शिक्षा विभाग की मंत्री अनुपमा जायसवाल पर तो उनके सांसद ने ही भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लगाते हुए कहा था कि मंत्री जी स्कूलों में मिलने वाले जूते-मोजों के टेंडर में भृष्टाचार कर रही हैं। अभी हाल में नॉएडा में भृष्टाचार को लेकर जिले के आईएएस-आईपीएस में आपसी तनातनी तक हो गयी थी, वहीँ कुछ माह पहले बाराबंकी में पुलिस विभाग का एक भृष्टाचार सामने आया था जिसमे थानों और चौकी में पोस्टिंग को लेकर पैसों का लेन-देन खुलेआम चल रहा था।

भाजपा नेताओं ने उलटा शिकायतकर्ता अभिषेक गुप्ता पर ही दर्ज करा दिया मुकदमा !

बीजेपी भी इस खेल में शामिल हो गई, लखनऊ में पार्टी के कार्यालय प्रभारी की शिकायत पर उलटा अभिषेक गुप्ता पर ही मुक़दमा दर्ज कर लिया गया। अभिषेक गुप्ता ने ही सीएम योगी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी एसपी गोयल गोयल पर घूस मांगने का आरोप लगाया है। गोयल के घूस मांगने का मामला रफ़ा दफ़ा हो जाता, लेकिन मीडिया को राज्यपाल की चिट्ठी मिल गई। इसके बाद शुरू हुआ सबसे ताक़तवर आईएएस अधिकारी को बचाने का खेल। योगी आदित्यनाथ के प्रमुख सचिव एसपी गोयल को बचाने की रणनीति बन गई है, उन पर 25 लाख रूपये घूस मांगने का आरोप लगाने वाले अभिषेक गुप्ता को जेल भेजने की तैयारी है।

सीएम योगी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी का नाम भ्रष्टाचार में कैसे आया, जाने ?

अभिषेक गुप्ता हरदोई में एस्सार का पेट्रोल पंप लगाना चाहते थे, इसके लिए वे मेन सड़क के पास ज़मीन का एक टुकड़ा चाहते थे। इलाक़े के लेखपालों, एसडीएम, एडीएम से लेकर डीएम तक ने उनके प्रस्ताव का समर्थन किया। राजस्व परिषद ने भी कहा कि उन्हें ज़मीन मिलनी चाहिए, लेकिन जब फ़ाईल सीएम ऑफ़िस तक पहुंची तो प्रमुख सचिव ने अभिषेक गुप्ता का प्रस्ताव ख़ारिज कर दिया।
अभिषेक गुप्ता का आरोप है कि प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने प्रस्ताव पास करने के लिए 25 लाख रूपये घूस मांगी।

अभिषेक गुप्ता के घूस न देने पर उनका काम नहीं हुआ फिर वो अपनी शिकायत लेकर राज्यपाल राम नाईक से मिले। उन्हें पूरी बात बताई, राज्यपाल ने मामला समझने के बाद सीएम को इसकी जांच के लिए कह दिया। योगी आदित्यनाथ को 30 अप्रैल को लिखी उनकी चिट्ठी धूल खाती रही, मीडिया में इस चिट्ठी के लीक हो जाने से हंगामा खड़ा हो गया है। वहीँ सरकार की शह पर गोयल को बचाने और अभिषेक गुप्ता को जेल भेजने के लिए कहानी रची गई।

बीजेपी के लखनऊ ऑफ़िस के प्रभारी भारत दीक्षित ने एसएसपी दीपक कुमार को चिट्ठी लिखी। जिसमें कहा गया कि बीजेपी नेताओं के नाम पर अभिषेक गुप्ता अफ़सरों पर दबाब बनाता रहता है, चिट्ठी की मानें तो बीजेपी के ऑफ़िस प्रभारी को ये बात सीएम के स्पेशल सेक्रेटरी ने बताई। कहानी बना कर एसएसपी को केस करने को कहा गया, देर रात हज़रतगंज थाने में अभिषेक पर एफ़आइआर भी हो गई। विपक्ष पूछ रहा है कि जिसने सीएम के प्रमुख सचिव पर घूस मांगने का आरोप लगाया, उलटे उस पर ही मुक़दमा कैसे हो गया ?

यूपी पुलिस की तैयारी अब अभिषेक गुप्ता को जेल भेजने की है। अब तक इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ़ से कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन पहली बार सीएम ऑफ़िस भ्रष्टाचार के लेकर सवालों में है।

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