CM योगी की खुली पोल: यूपी शिक्षा चयन बोर्ड की संभावित सूची में, सामने आया जातिवाद और परिवारवाद !

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लखनऊ : भारत में जातिवाद अब और अधिक विकराल रूप लेता जा रहा है, जहाँ आज भी देश की न्याय पालिका और शिक्षण संस्थानों में SC,ST और OBC के लोग नहीं हैं। केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा नेता यूँ तो पूर्व की अखिलेश सरकार पर जातिवाद का आरोप लगाते थे, जबकि असल मायने में जातिवाद आज प्रदेश और देश की सरकारों में बड़े पैमाने पर देखने को मिल रहा है। हालाँकि मोदी सरकार की तर्ज पर योगी सरकार सबका साथ सबका विकास करने का जुबानी दावा करती है, लेकिन सरकारी आंकड़ों पर हकीकत कुछ और ही है।

ताजा मामला उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का है। सूत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार बोर्ड में पांच सदस्यों का नाम योगी सरकार में फाइनल हो गया है। गौरतलब है कि अति दलित और अति पिछड़ों की बात करने वाले मुख्यमंत्री योगी की देख-रेख में बने इस बोर्ड में एक भी दलित और पिछड़े वर्ग का सदस्य नहीं है।

जातिवाद और परिवारवाद के रंग में रंगी योगी सरकार !
3 भूमिहार, 1 ब्राह्मण और 1 ठाकुर की मांगी गई रिपोर्ट –

योगी सरकार अब तक प्रशासन और थानों पर ही जातिवाद कर रही थी, पर अब तो भर्ती बोर्ड के सदस्यों में जातिवाद का तड़का लगाते हुए भूमिहार-ब्राह्मण-ठाकुर पर आकर ठहर गई है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में जिन पांच लोगों का चयन किया गया है, उसमें 3 भूमिहार 1 ब्राह्मण और 1 ठाकुर हैं। योगी सरकार में दलित और महादलित समीकरण को लेकर भले ही चर्चा होती रहती है, लेकिन माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में यह समीकरण कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा है।

ये है बोर्ड में शामिल संभावित चयनित सदस्यों का परिवारवादी और जातिवादी प्रोफाइल !

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. धीरेन्द्र द्विवेदी का चयन किया गया है। सनातन धर्म इंटर कॉलेज वाराणसी के प्रधानाचार्य डॉ. हरेन्द्र कुमार राय, एसएसबी कॉलेज हापुड़ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अजीत सिंह, आगरा कॉलेज आगरा के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश राय, एलपी इंटर कॉलेज सरदारनगर गोरखपुर के प्रधानाचार्य डॉ. दिनेश मणी त्रिपाठी की रिपोर्ट शासन ने मांगी है।

एक अध्यक्ष और पांच अन्य सदस्यों की चयन प्रक्रिया भी चल रही है। माना जा रहा है कि एक-दो दिन में अध्यक्ष व सदस्यों के नामों की घोषणा हो जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के दौरान 8 मार्च को अल्लापुर की रैली में एक सप्ताह में चयन बोर्ड के गठन की घोषणा की थी। हालाँकि 8 मार्च को बीते लगभग 1 महीना होने वाला है।

सूत्रों के अनुसार बोर्ड की इस संभावित सूची में शामिल नाम और उनका परिचय कुछ इस प्रकार है –

डॉ० हरेन्द्र कुमार राय(संघ के प्रान्त प्रचारक)
डॉ० धीरेन्द्र द्विवेदी (डॉक्टर महेन्द्र नाथ पाण्डेय के साढ़ू)
डॉ० अजीत सिंह(राजनाथ सिह के रिश्तेदार)
डॉ० ओम प्रकाश राय (नितिन गड़करी के रिश्तेदार, भूमिहार)
डॉ० दिनेश मणि त्रिपाठी(दिनेश शर्मा के जीजा)

संघ के करीबियों को खोज कर, बोर्ड में शामिल करने को लेकर हो रही देरी !

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब घोषणा की थी तबसे 20 दिन का समय बीत चुका है, लेकिन अध्यक्ष व सदस्यों के नाम फाइनल नहीं हो सके हैं। अध्यक्ष बनने के लिए सेवानिवृत्त आईएएस से लेकर संघ के करीबी भी लाइन में हैं। सूत्रों की माने तो ऐसा आईएएस अफसर खोजा जा रहा है कि जो संघ से भी करीबी संबंध रखता हो।

वहीँ योग्यतम उम्मीदवारों में एसोसिएट प्रोफेसर डाक्टर कौलेश्वर प्रियदर्शी का नाम सबसे आगे माना जा रहा था, जबकि संघ के दबाव में उनका चयन नहीं किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के रहने वाले डॉ. कौलेश्वर प्रियदर्शी जूनियर आम्बेडकर के नाम से चर्चित हैं। अनुसूचित जाति, जनजाति के सबसे योग्यतम व्यक्ति होने के बाद भी उनका चयन न होना सवाल खड़ा करता है।

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