भगवान श्री कृष्ण से डरी भाजपा, आनन फानन में भगवान राम की मूर्ति बनवाने की करनी पड़ी घोषणा !

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लखनऊ, उत्तर प्रदेश में बन रही भगवान श्रीकृष्ण की विशालकाय मूर्ति ने प्रदेश और देश भर में हलचल तेज कर दी है। लगभग 60 टन वजन की 50 फुट ऊंची भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति उत्तर प्रदेश के सैफई में लगने जा रही है। भगवान श्री कृष्ण की इस विशालकाय प्रतिमा का निर्माण उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने करवाया है।

भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा को लेकर राजनीति तेज हो गयी है। धार्मिक आधार पर राजनीति करने वाली भाजपा की बेचैनी बढ़ी हुई है। देश में सबसे ज्यादा प्रसिद्द भगवान श्री कृष्ण मूर्ति बनवा कर अखिलेश यादव ने भाजपा से उसका मुद्दा छीन लिया है।

हिन्दुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति स्थापना की खबर मात्र से भाजपा नेता बेचैन है और इसे भगवान श्री राम की अयोध्या में बनने वाली मूर्ति के बदले में श्री कृष्ण की मूर्ति के रूप में प्रचारित कर रहे हैं। यही नहीं मीडिया भी इसे योगी द्वारा बनवाई जा रही श्री राम की मूर्ति के बदले में अखिलेश की श्री कृष्ण की मूर्ति प्रचारित कर रहे हैं। जबकि श्री राम भगवान की मूर्ति की अभी घोषणा मात्र हुई है और भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति लगभग बनकर तैयार है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जैसे ही इस बात की भनक लगी कि सैफई में अखिलेश यादव द्वारा भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति बनवाई जा रही है वैसे ही उन्होंने आनन फानन में भगवान श्री राम की 100 मीटर ऊँची प्रतिमा बनवाने की घोषणा कर दी। क्योंकि भाजपा का मुख्य वादा राम मंदिर का निर्माण करवाना है जो कि अभी तक पूरा होता दिख नहीं रहा है। तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव द्वारा श्री कृष्ण की मूर्ति बनवाने की खबर ने योगी सरकार को रातों रात श्री राम की मूर्ति बनवाने की घोषणा करनी पड़ी।

भगवान् श्री कृष्ण की यह प्रतिमा खुद अखिलेश यादव के निर्माणाधीन स्कूल में तैयार की गई है। बताया जा रहा है कि प्रतिमा को तांबे से बनाया गया है। अखिलेश के स्कूल में निर्माण कार्य करने वाले इंजीनियर और सैफई के लोगों का कहना है कि यह विशाल मूर्ति नोएडा में तैयार कराई गई थी। बताया जा रहा है कि स्कूल बनकर तैयार हो जाने के साथ ही प्रतिमा का भी अनावरण किया जाएगा। फिलहाल यह पूरी तरह से ढकी हुई है। मूर्ति में भगवान कृष्ण को रथ का पहिया लिए खड़ा दर्शाया गया है।

जानकारी के मुताबिक प्रतिमा 50 फुट की है और इसका वजन करीब 60 टन है। इसके निर्माण के लिए जापानी स्टेनलेस स्टील और पीतल का प्रयोग किया गया। यह प्रतिमा उस दृश्य की है जब भगवान कृष्ण को महाभारत के दौरान शस्त्र के तौर पर पहली बार उठाया था रथ का पहिया इसे रथांग पाणी के नाम से जाना गया था।

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