देश में सरेआम पिटता दोगला हिंदुत्व : गुजरात में मूंछ रखने को लेकर दलितों की जमकर पिटाई !

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अहमदाबाद : देश के लोकतन्त्र का सबसे बड़ा पद राष्ट्रपति तथा भारत का सर्वप्रथम नागरिक आज भले ही दलित समुदाय से है,पर हमारे आज़ाद भारत में आज भी दलितों को पूर्ण आज़ादी नहीं मिली है। आज भी हमारे देश में दलितों को धेय दृष्टि से देखा जाता है इसीलिए कभी उन्हें सवर्णों के नलों से पानी लेने के लिए रोक दिया जाता है तो कभी उन्हें गाँवों के मंदिरों में पूजा करने और मंदिरों में प्रवेश करने से भी रोक दिया जाता है। बता दें कि ताज़ा मामले में गुजरात की राजधानी गांधीनगर के एक गांव में दो अलग-अलग घटनाओं में मूंछ रखने को लेकर राजपूत समुदाय के लोगों ने दो दलित व्यक्तियों की कथित तौर पर पिटाई कर दी, ये घटनाएं गांधीनगर ज़िले के कलोल तालुका के लिंबोदरा गांव में 25 और 29 सितंबर को हुईं।

पिछले महीने की 29 तारीख को भरत सिंह वाघेला नाम के व्यक्ति ने विधि छात्र क्रुणाल महेरिया (30) की कथित तौर पर पिटाई की, क्रुणाल कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। कलोल तालुका पुलिस में अपनी शिकायत में महेरिया ने दावा किया कि वाघेला ने मूंछ रखने को लेकर उससे मारपीट की।

महेरिया ने रविवार को बताया, ‘मैं शुक्रवार को जब अपने एक दोस्त के घर जा रहा था तो वाघेला और कुछ अन्य लोगों ने मुझे रोका और मेरे लिए अपशब्दों का प्रयोग किया, वाघेला ने मुझसे कहा कि केवल मूंछ लगा लेने से कोई राजपूत नहीं हो सकता। जब मैंने उसकी बात को तवज्जो नहीं दी तो उसने डंडे से मेरी पिटाई की’।

क्या दलित और पिछड़ों के लिए हिंदुत्व सिर्फ चुनावी कार्ड है !

गौरतलब है कि हमारे देश में चुनाव का मौसम होता है तो दलित और पिछड़ों को उनके हिन्दू होने का विशेष बोध कराया जाता है,और दलित और पिछड़ों भी इनके ज्ञान सागर में डूब कर स्वयं को हिंदुत्व का सबसे बड़ा रक्षक समझ कर उनके कहे अनुसार कुछ छदम राष्ट्रवादियों को अपना तथा अपने परिवार का वोट दाल देते हैं। चुनाव के बाद फिर वही पुराना ढर्रा चालू हो जाता है और दलित-पिछड़ों को उनकी जाती का ज्ञान कराया जाता है। बता दें कि गुजरात के ऊना में दलितों की निर्मम पिटाई की घटना भी लोग चुनावी हिंदुत्व के नशे में भूल गए।

गांधीनगर सिविल अस्पताल में इलाज के बाद महेरिया रविवार को अपने घर लौट गए हैं –

कलोल तालुका के एक पुलिस अधिकारी ने रविवार को बताया कि उसकी शिकायत के आधार पर भरत सिंह वाघेला के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 323 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया, उन्होंने बताया कि वाघेला को गिरफ्तार कर लिया गया।

लिंबोदरा गांव में ही 25 सितंबर को इसी तरह का एक और मामला दर्ज किया गया था, उस दिन राजपूत समुदाय के कुछ सदस्यों ने पीयूष परमार (24) की कथित तौर पर पिटाई की।

अधिकारी ने बताया, परमार ने आरोप लगाया कि एक गरबा कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लौटते वक्त गांव के राजपूत समुदाय के लोगों ने उसकी पिटाई की, उसने आरोप लगाया की ऊंची जाति के लोगों ने मूंछ को लेकर उसकी पिटाई की, पीयूष गांधीनगर में स्थित एक निजी कंपनी में काम करते हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक पीयूष के साथ मारपीट करने वालों की पहचान मयूर सिंह वाघेला, राहुल विक्रम सिंह सेराठिया और अजीत सिंह वाघेला के रूप में हुई है, अभी तक दोनों ही मामलों में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

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