बड़ा खुलासा – नोटबंदी की शुरुआती 34 दिन में खत्म हुई 35 फीसदी नौकरियां, राजस्व पर भी पड़ा असर

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नोएडा, 8 नवम्बर 2016 को पीएम मोदी द्वारा अचानक लिया गया नोटबंदी का फैसला देश की अर्थव्यवस्था के लिए बुरी तरह घातक साबित हुआ है। नोटबंदी के फैसले से एक तरफ जहां जनता को कैश की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा वहीं इसका असर नौकरियों पर भी पड़ा है।

मोदी सरकार के इस फैसले से नौकरियों में गिरावट दर्ज की गई है। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक नोटबंदी का फैसला लागू होने के 34 दिन के अंदर ही सूक्ष्म-लघु स्तर के उद्योगों में 35 फीसदी नौकरियां चली गईं वहीं राजस्व में भी 50 फीसदी की गिरावट हुई।  अखबार के मुताबिक ये आंकड़े भारत में निर्माताओं की सबसे बड़ी संस्था ने पेश किए हैं।

ऑल इंडिया मैन्युफैक्चरर्स ऑर्गेनाइजेशन द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक मार्च 2017 से पहले नौकरियों में 60 फीसदी की गिरावट और राजस्व 55 फीसदी घटने के संकेत हैं। नोटबंदी के प्रभाव को लेकर एआईएमओ की यह चार में से तीसरा अध्ययन है। इसमें कहा गया कि इस मार्च तक नौकरी और राजस्व में 40 फीसदी गिरावट होने की आशंका है।

अध्ययन के मुताबिक लगभग सभी उद्योग में एक ठहराव देखने को मिला है, लेकिन छोटे और मध्यम स्तर के उद्यम सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। अध्ययन के मुताबिक उद्योगों को प्रभावित करने वाले कारकों में कैश की किल्लत, पैसे निकालने की लिमिट, स्टाफ की अनुपस्थिति, कमजोर रुपया, रियल स्टेट सेक्टर का रुक जाना, विदेशियों में भय, कमजोर तैयारी, जीएसटी को लेकर अनिश्चितता भी शामिल थे।

यह अध्ययन केई रघुनाथन की अध्यक्षता में बनाई गई एक्सपर्ट कमेटी ने किया था। केई रघुनाथन ने बताया कि अध्ययन की रिपोर्टों को केंद्रीय वित्त मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय को भेज दिया गया है लेकिन, अभी तक कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है।