गोरखपुर नरसंहार : मासूमों की जान बचाने के लिए डॉ.कफील ने पेश की मानवता की मिसाल !

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चुनाव हो या त्यौहार – हर जगह हिन्दू – मुस्लिम करने वालों को डॉ. कफील ने             दिखाई मानवता की मिसाल !

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गोरखपुर : प्रदेश में हुई दिल दहला देने वाली घटना ने सभी को झकझोर के रख दिया है, जिन बच्चों को योगी सरकार और उसके अस्पताल प्रसाशन ने मरने को छोड़ दिया था, उसी बीच डॉ. कफील बच्चों को बचाने के लिए जूझ रहे थे। डॉक्टर कफील अब समझ चुके थे कि ऑक्सीजन सिलेंडर के बिना मेरा कोई प्रयास सफल नही होगा। उन्होने शहर के आधा दर्जन ऑक्सीजन सप्लायरों को फिर फोन लगाया तब एक सप्लायर ने नकद भुगतान मिलने पर सिलेंडर रिफिल करने को तैयार हो गया।

एक सप्लायर राजी हुआ तो उन्होंने अपना एटीएम कर्मचारी को देकर पैसे निकालने भेजा। फैजाबाद से आए सिलेंडरों के ट्रक चालक को भी डीजल और अन्य खर्चे उन्होंने अपनी जेब से चुकाए। एक तरफ मरने को छोड़ देने वाली योगी सरकार, दूसरी तरफ बचाने वाले डॉ. कफील इस मामले में संवेदनशीलता बरतने को लेकर सुर्खियों में छाए हुए हैं।

डॉ. कफील ने अपने नाम के अर्थ को किया सार्थक – कफील का मतलब होता है मददगार !

सरकार से मदद की उम्मीद के भरोसे को छोड़कर डॉ कफील ने किया हर संभव प्रयास, पर नियति को कुछ और ही मंजूर था !

रात के दो बज रहे थे। इंसेफेलाइटिस वार्ड के कर्मचारियों ने प्रभारी व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. कफील अहमद को सूचना दी कि अगले एक घंटे बाद ऑक्सीजन खत्म हो जाएगी। इस सूचना के बाद से ही डॉ. कफील की नींद उड़ गई। वह अपनी कार से मित्र डॉक्टर के अस्पताल गए और वहां से ऑक्सीजन का तीन जंबो सिलेंडर लेकर तीन बजे सीधे अस्पताल पहुंचे। हालंकि इन तीन सिलेंडरों से बालरोग विभाग में करीब 15 मिनट ही ऑक्सीजन सप्लाई हो सकी।

सुबह साढ़े सात बजे ऑक्सीजन खत्म होने पर एक बार फिर वार्ड में हालात बेकाबू होने लगे, मरीज तड़प रहे थे वार्ड में तैनात डॉक्टर और कर्मचारी परेशान होने लगे। उधर ऑक्सीजन सिलेंडर की खेप आने में कॉपी देर थी, किसी बड़े अधिकारी व गैस सप्लायर ने फोन नही उठाया तो ऐसे में डॉ. कफील हर मुद्दे पर जूझते रहे। वह खुद अपनी कार लेकर फिर निकल पड़े प्राइवेट अस्पतालों में अपने डॉक्टर दोस्तों से मदद मांगने तब अपनी गाड़ी से ऑक्सीजन करीब एक दर्जन सिलेंडरों को ढुलवाया।

एक दैनिक अखबार की ये फोटो खूब वायरल हुई सोशल मीडिया में –

 

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