स्कूल जाते समय छात्राओं से होती थी छेड़खानी, डॉ. यादव ने कर दिया वो काम जो सरकार नहीं करवा पाई !

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राजस्थान : देश में यूँ तो सरकारें बेटी पढ़ाओं की रोजाना नयी-नयी स्कीम लाते हैं,जिससे काफी हद तक देश में बेटियों की शिक्षा को लेकर तस्वीर भी बदली है। वैसे हमारे देश में सीमा से अधिक पैसा तो बहुत लोगों के पास है, पर समाज की भलाई और अच्छे कामों के लिए खर्च करने वाले बहुत ही कम लोग हैं। इन्ही लोगों में से एक डॉ. आर.पी यादव दम्पत्ति ने समाज हित में अनूठी मिसाल पेश की है। जो काम बड़े-बड़े धन्नासेठ नहीं कर पाते हैं, वह काम इन यादव डाक्टरों ने अपने पीएफ के पैसे से कर दिखाया है। बता दें कि डॉ. आरपी यादव ने गाँव की स्कूल जाने वाली बेटियों की रोजमर्रा की परेशानी को देखते हुए डॉ. यादव ने 19 लाख में 52 सीटर नई बस खरीदकर गांव से कोटपूतली पढ़ाई के लिए जाने वाली बेटियों के लिए दी। बताते हैं कि उन्होंने कॉलेज में नया सत्र शुरू होने से पहले ही नई बस बुक करवा दी थी। कंपनी से बस मिलने में 17 दिनों की देरी हुई। इस दौरान छात्राएं कॉलेज जाने को तैयार हो गई।

तब डॉ. दंपती ने खुद के पैसों से किराए पर बस का प्रबंध किया। फिलहाल चूरी, पावला, रामनगर, कायमपुराबास भोपालपुरा की 54 लड़कियों का इस बस से आने-जाने के लिए रजिस्ट्रेशन हुआ है। अभी बस से 40 लड़कियां कॉलेज जा रही हैं। नि:शुल्क बेटी वाहिनी से कॉलेज जाने वाली लड़कियों से कोई खर्चा नहीं लेंगे।

बेटी की याद में करते हैं हर बेटी को अपनों सा प्यार !

ये बेटियों को पढ़ाने की जिद है और संकल्प की कहानी है। 20 साल पहले छह माह की बेटी को खोने पर डॉक्टर दंपती ने जीपीएफ के पैसों को बेटी की याद में खर्च करने का प्रण किया था। दंपती ने कहा- उनकी बेटी होती तो शादी में पैसा खर्च होता। दोनों की इच्छा थी कि जीपीएफ का पूरा पैसा बेटियों की पढ़ाई पर खर्च कर देंगे। डॉ. यादव ने 19 लाख में 52 सीटर नई बस खरीदकर गांव से कोटपूतली पढ़ाई के लिए जाने वाली बेटियों के लिए दी।

बारिश में भीगते हुए चार लड़कियों को स्कूल जाते देखकर मिली प्रेरणा !

डॉ.आरपी यादव ने बताया कि नीमराना से चूरी गांव जाते वक्त पिछले साल चार लड़कियां बारिश में भीगती मिली थी। बारिश के मौसम में कीचड़ भरे रास्ते से पांच लड़कियां कॉलेज से लौटकर गांव जा रही थी। डॉ. दंपती ने अपनी गाड़ी में लिफ्ट दी। रास्ते में बातचीत में लड़कियां ने कहा- परिवहन सुविधा नहीं होने से हर रोज पैदल आती हैं। कई बार रास्ते में छेड़छाड़ की घटना होती हैं। उन्होंने कॉलेज तक पहुंचने वाली हर परेशानियों के बारे में डॉ. दंपती को बताया। अपनी बेटी की याद में डॉ. दंपती ने जीपीएफ के पैसों से बस खरीदकर देने का प्रण वहीँ कर लिया। डॉ. आरपी यादव ने बताया कि परिवहन सुविधा का अभाव निजी वाहनों में छेड़छाड़ की घटनाओं से परेशान ग्रामीण बेटियों को पढ़ाने के लिए कॉलेज नहीं भेज पाते थे। बारिश के मौसम में पांच गांवों की लड़कियां कई किलोमीटर पैदल चलकर आती थी।

बस संचालन का खर्च भी डॉ. यादव स्वयं ही उठाएंगे !

चूरी सहित आसपास के पांच गांवों की बेटियों को पढ़ाने के लिए डॉ. दंपती की पहल पर शुरू हुई नि:शुल्क बेटी वाहिनी को 98 वर्षीय हरनारायण यादव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर मौजूद डीटीओ ने रोड टैक्स में छूट के लिए प्रक्रिया शुरू कराने का भरोसा दिलाया। कोटपूतली टोल संचालकों ने भी बेटी वाहिनी को छूट दिलाने का भरोसा दिया।

डॉ. आरपी यादव कपिल अस्पताल नीमराना में शिशु रोग विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं। बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत जीपीएफ में जमा 19 लाख की राशि से बेटियों के स्कूल जाने के लिए “बेटी वाहिनी” खरीदकर देने को लोगों ने खूब सराहा। अस्पताल के चिकित्सकों ने भी डॉ. यादव की सेवाओं पर खुशी जताई और डॉ. यादव के इस कार्य का दिल से स्वागत किया ।

 

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