RBI और CBI के बाद चुनाव आयोग भी बना मोदी आयोग, देखें क्या है वजह !

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नई दिल्ली, भारत एक ऐसा देश है जहां की संस्थाएं आजाद होकर काम नहीं कर सकती और हम दुनिया के दूसरे देशों जैसे अमेरिका, रूस, फ्रांस, जर्मनी, इजरायल जैसा बनने की सोचते हैं और हमारे देश की जनता को न्यू इंडिया के अकल्पनीय सपने दिखाए जाते हैं। हम CBI की FBI से तुलना करते हैं और चाहते हैं कि CBI भी FBI की तर्ज पर त्वरित कार्यवाही करे जैसे FBI करती है।

हमारे यहां एक और संस्था है जिसे हम चुनाव आयोग के नाम से जानते हैं मगर अब यह संस्था मोदी आयोग के नाम से जानी जाने लगी है। चुनाव आयोग को मोदी आयोग किस वजह से कहा जा रहा है। उसके लिए बृहस्पतिवार को चुनाव आयोग द्वारा किए गए एक फैसले को देखिए। चुनाव आयोग ने हिमांचल प्रदेश में चुनाव की तारीखों का ऐलान किया पर गुजरात के चुनाव की तारीख कब घोषित होंगी उसकी कोई जानकारी नहीं दी। जबकि गुजरात और हिमांचल प्रदेश दोनों राज्यों में एकसाथ होने थे।

बता दें कि, 2012 में गुजरात और हिमांचल प्रदेश दोनों राज्यों में एक ही दिन चुनाव की तारीखों का ऐलान किया गया था। 3 अक्टूबर 2012 को चुनाव आयोग ने गुजरात और हिमांचल प्रदेश में चुनाव की तारीखों का ऐलान एक साथ किया था और दोनों राज्यों में एकसाथ आचार संहिता लागू हो गयी थी। हिमांचल में 4 नवंबर और गुजरात में 13 और 17 नवंबर को मतदान हुआ।

प्रसिद्ध पत्रकार रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर एक लेख लिखा जिसपर उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। रवीश कुमार कहते हैं कि जब दोनों राज्यों में चुनाव एक साथ हुए और एक साथ होने थे तो दोनों राज्यों के चुनाव की तारीखों की घोषणा क्यों नही की गयी।

रवीश कुमार द्वारा उठाया गया प्रश्न बिकुल जायज है जब 2012 में दोनों राज्यों में चुनाव की तारीखें एक ही दिन घोषित की गयीं और एक ही दिन आचार संहिता लागू की गयी तो फिर 2017 में ऐसी कौन सी वजह है जो हिमाचल प्रदेश के चुनाव की तारीख घोषित कर दी गयी और गुजरात के चुनाव की तारीख नहीं घोषित की गयी। जब दोनों राज्यों में चुनाव एक ही महीने में होने हैं तो चुनाव आयोग किसके आदेश का इंतजार कर रहा है। क्या मोदी सरकार द्वारा कोई नया इवेंट प्लांट किया जाना जिसका इंतजार चुनाव आयोग कर रहा है।

जब देश की संस्थाएं आज़ाद होकर काम नहीं कर पाएगी तो देश किस ओर जाएगा इसका तो अनुमान लगाना भी आसान नहीं है। RBI और CBI तो पहले से ही केंद्र सरकार के तोते की तरह काम कर रही थीं अब चुनाव आयोग भी मोदी आयोग की तरह काम कर रहा है ऐसे में विधानसभा चुनाव निष्पक्ष तरीके से करवाएं जाएंगे इस पर भी सवालिया निशान लग जाता है। जब चुनाव आयोग चुनाव की तारीख भी सत्तारूढ़ दल से मंत्रणा करने के बाद करता है तो फिर चुनाव किस तरह करवाया जाएगा ?

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