EVM घोटाला – सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, चुनाव आयोग और मोदी सरकार से मांगा जवाब

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लखनऊ, देश की सर्वोच्च न्याय पालिका सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में वोटर वेरिएबल पेपर ट्रेल (वीवीपीएटी) के साथ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की ओर से दायर याचिका पर गुरुवार को केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया।

बसपा ने अपनी याचिका में कहा है कि चुनावों में सर्वोच्च न्यायालय के 2013 के दिशा-निर्देश के अनुरूप मतदान के लिए ईवीएम के साथ वीवीपीएटी का इस्तेमाल होना चाहिए। न्यायमूर्ति जे. चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने नोटिस जारी करते हुए कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को भी अपने ‘इंटरवेंशन’ आवेदन दायर करने की अनुमति दी। सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई तक जवाब देने का निर्देश दिया है।

बता दें कि बसपा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका का वो हिस्सा वापस लिया जिसमें यूपी चुनाव को रद्द करने की मांग की गई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि हमें ये ध्यान रखना चाहिए कि बूथ कैप्चरिंग और बैलेट बदलने जैसे मामलों के उपचार के तौर पर EVM मशीनों को लाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में EVM को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस के बड़े नेता और बड़े वकील पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, आनंद शर्मा आदि विरोध में पैरवी कर रहे हैं। चिदंबरम ने कोर्ट में कहा कि 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि EVM मशीनों में VVPAT (वोटर वैरिफिकेशन पेपर आडिट ट्रे- पेपर स्लिप ) के इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

EVM मशीनों में गड़बडिय़ों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बसपा और समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक की अर्जी पर सुनवाई की बसपा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर ईवीएम में गड़बडियों का मुद्दा उठाते हुए उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चुनाव को रद कर नये सिरे से बैलेट पेपर के जरिये चुनाव कराने की मांग की है।

बसपा ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में हुए चुनावों में ईवीएम से छेड़छाड़ और हैकिंग की जांच और कार्रवाई किये जाने की भी मांग की है। बसपा और याचिकाकर्ता पूर्व MLA अतर उर रहमान ने कहा है कि चुनावों के दौरान EVM मशीनों में VVPAT (वोटर वैरिफिकेशन पेपर आडिट ट्रे- पेपर स्लिप ) के बिना इस्तेमाल ना किया जाए। बसपा ने अपनी याचिका में केन्द्र सरकार और चुनाव आयोग के अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भी पक्षकार बनाया है।

याचिका में चुनाव में ईवीएम का प्रयोग करने के जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 61(1)(ए) के तहत दिये गये प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। कहा गया है कि ईवीएम से चुनाव में मतदाताओं के अभिव्यक्ति की आजादी के मौलिक अधिकार का हनन होता है।

मतदाता को यह नहीं पता चलता कि वह किसको मत दे रहा है। इससे अनुच्छेद 324 में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का भी उल्लंघन होता है। याचिका में चुनाव आयोग द्वारा ईवीएम मे गड़बड़ी की शिकायत वाला बसपा का ज्ञापन खारिज करने का आदेश भी रद करने की मांग की गई है. बसपा ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि चुनाव आयोग को आदेश दिया जाए कि वह भविष्य में सारे चुनाव विधानसभा और लोकसभा के वीवीपीएटी (पेपर ट्रेल) वाली ईवीएम मशीनों से कराए जिनमें से वोट डालने पर पर्ची निकलती है।

बसपा की मांग है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चुनाव में ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ और हैकिंग की जांच सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी वाली उच्च स्तरीय कमेटी से कराई जाए। इसके अलावा केन्द्र और राज्य के उन अधिकारियों और अथारिटी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए जो लोग ईवीएम को छेड़छाड़ और हैकिंग से रोकने की अपनी जिम्मेदारी में नाकाम रहे।

बसपा ने याचिका में कहा है कि चुनाव आयोग को आदेश दिया जाए कि वह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पारंपरिक बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव कराए और इसके साथ ही परिणाम स्वरूप 11 मार्च को घोषित किये गये चुनाव नतीजे रद किये जाएं।

याचिका में लोकतंत्र के महत्व और चुनाव की पारदर्शिता की बात करते हुए कहा गया है कि मत देना वैसे तो सिर्फ विधायी अधिकार है लेकिन मत के जरिये अपनी अभिव्यक्ति प्रकट करना व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए लेकिन अभी पिछले दिनों पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं उसमें लोगों को ईवीएम में छेड़छाड़ का शक है।

बसपा ने कहा है कि सुप्रीमकोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी के मामले में दिये फैसले में कहा है कि पेपर ट्रेल वाली वीवीपीएटी ईवीएम मशीने चुनाव में प्रयोग की जाएं ताकि विश्वसनीयता बनी रहे। कोर्ट के आदेश के बावजदू यूपी में 403 विधानसभा क्षेत्रों में से सिर्फ 20 जगह ही वीवीपीएटी की ईवीएम मशीने प्रयोग हुईं। बसपा का आरोप है कि ऐसा जानबूझकर किया गया ताकि शरारत की गुंजाइश बनी रहे।