बैंक ने भेजा कुर्की का नोटिस, किसान ने सल्फास खा करली आत्महत्या, शिवराज बैठे है उपवास पर !

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MP में किसानों के हक के लिए किसानों द्वारा आंदोलन किया जा रहा है तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का उपवास का नाटक चल रहा है तो दूसरी तरफ सिर से पैर तक कर्ज में डूबे एक किसान ने बैंक के कुर्की के नोटिस से घबराकर अपनी जान दे दी। उसने HDFC बैंक से 10 लाख रुपए का कर्ज लिया था। जिसे चुकाने के लिए 10 दिन पहले ही बैंक ने कुर्की का नोटिस भेजा था।

रायसेन से करीब 15 किमी दूर सांची ब्लॉक के गांव सगोनिया के रहने वाले किशन सिंह मीणा(45) ने गुरुवार शाम करीब 7.30 बजे सल्फास खा लिया। उसके परिजन उसे फौरन रायसेन के जिला अस्पताल लेकर आए। उनकी हालत नाजुक देखते हुए भोपाल रेफर किया गया था, लेकिन रास्ते में ही किशन सिंह ने दम तोड़ दिया। शुक्रवार सुबह उसका पोस्टमार्टम किया गया।

किशन अपने तीन भाइयों में सबसे छोटा था। चचेरे भाई नारायण सिंह ने बताया कि, किशन ने एचडीएफसी बैंक से खेती-किसानी के लिए 10 लाख रुपए का लोन लिया था। उसने बिजली के नए ट्रांसफार्मर के लिए अप्लाई किया था। बिजली विभाग ने नया ट्रांसफार्मर तो नहीं लगाया, बल्कि पुराना उतार ले गए।

किशन के हिस्से में करीब 15 एकड़ जमीन आई थी, लेकिन अच्छी फसल न होने से वो लगातार परेशान था। 10 दिन पहले ही बैंक के कर्मचारी गांव आकर उसे कुर्की का नोटिस थमाकर चले गए थे। बैंक का नोटिस मिलने के बाद से किशन तनाव में था। उसी के चलते किशन ने अपनी जान दे दी।

किशन की पत्नी लीला के मुताबिक, उसकी तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी प्रीति(22) की शादी हो चुकी है। जबकि प्रियंका(18) और दीक्षा(16) की शादी को लेकर सबलोग परेशान रहते थे। इनके एक 12 साल का बेटा सचिन भी है।

मृतक किसान किशन मीणा की बेटी प्रीति, प्रियंका, दीक्षा और बेटा सचिन का रो-रो कर बुरा हाल है। किसान की पत्नी लीला बाई पति के गम में बार-बार बेहोश हो रही है। मृतक की बेटी प्रियंका और दीक्षा रोते हुए कह रही थीं कि अब हमारा क्या होगा।

मृतक के बेटे सचिन ने बताया कि छह दिन पहले बैंक के कर्मचारी गांव आए थे। उन्होंने लोन की राशि जमा नहीं करने पर जमीन को कुर्क करने की बात कही थी, उसी दिन से पिताजी परेशान हो गए थे। मृतक किसान की बेटी प्रियंका 11 वीं, दीक्षा 8 वीं और सचिन 6 वीं कक्षा की पढ़ाई कर रहे हैं।

मृतक किसान के बड़े भाई नवल सिंह मीणा ने बताया कि उसके भाई के खेत में ट्यूबवेल तो लगा है, लेकिन उसे चलाने के लिए बिजली नहीं है। तीन साल पहले बिजली कंपनी ने गांव से डीपी उतरवा ली थी। इसके बाद से उसके भाई को सूखी जमीन से फसल लेना पड़ रही थी। इस साल भी मात्र 40 बोरा की उपज निकली थी।