कर्जमाफी के नाम पर किसानों के साथ हुआ धोखा, बकाया रकम पर देना पड़ेगा 12.5% ब्याज पहले था 3% !

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लखनऊ, बेचारा किसान फिर एकबार ठगा गया। कर्जमाफी के नाम पर यूपी का किसान अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहा है। एक तरफ तो 1 लाख का कर्जमाफ करने के नाम पर कर्जमाफी का जो प्रमाणपत्र मिला वो किसी को 9 पैसे का तो किसी को 34 पैसे का कर्जमाफी का प्रमाणपत्र मिला। पर अब जो किसानों के साथ हो रहा है वो उसके साथ अबतक का सबसे बड़ा धोखा है।

मेरठ जिले में ऐसे मामले सामने आए हैं जिससे खुलासा हुआ कि किसानों को अब जो रकम कर्जमाफी के बाद बची है उसमें उन्हें 12.5 प्रतिशत ब्याज देना पड़ेगा जो पहले 3 प्रतिशत होता था। मेरठ के किसान राजबीर जिन्होंने 2015 में फसल के लिए 50 हजार रुपये का लोन लिया था। फसल नष्ट हो जाने की वजह से वह लोन की अदायगी नहीं कर पाए। अब जब योगी सरकार ने किसानों के एक लाख रुपये तक का ऋण माफ करने का ऐलान किया, तो उनका ऋण माफ हो गया।

कर्ज तो माफ़ हो गया पर जो इसमें सबसे बड़ा खेल हुआ वो ये है कि बैंक वाले उन पर ब्याज का आठ हजार रुपये देने का दबाव डाल रहे हैं। ऐसे में किसान राजबीर का कहना है कि जब बैंक के पास उनका लोन है ही नहीं, तो वो ब्याज का पैसा क्यों दें।

दूसरा मामला पांचली खुर्द गांव का है यहां मंजू शर्मा ने सिंडिकेट बैंक से 10 अक्टूबर 2013 को एक लाख 30 हजार रुपये का लोन लिया था। 2014, 2015 आैर 2016 में इसका रिन्युवल करा दिया। अब जब प्रदेश सरकार ने एक लाख रुपये का ऋण माफ करने का निर्णय लिया तो 30 हजार रुपये ही चुकाने हैं और पर ब्याज करीब 15 हजार का बनता है। कुल मिलाकर 40 से 45 हजार रुपये उन्हें देना चाहिए, लेकिन बैंक ने जो ब्याज समेत जो हिसाब बनाकर दिया है, वह करीब 83 हजार रुपये है।

इस पर बैंक का कहना है कि 12.5 फीसदी के हिसाब से ब्याज लिया जा रहा है। यह ऊपर से निर्देश है। अब वह इस नए हिसाब से परेशान हैं। मंजू शर्मा का कहना है कि बैंक वाले इस संबंध में कोर्इ आर्डर भी नहीं दिखा रहे।

एक तरफ तो योगी सरकार ने किसानों की कर्जमाफी की घोषणा की और दूसरी तरफ बैंको को आदेश भी दिया कि बकाया रकम पर अब 3 प्रतिशत की जगह 12.5 प्रतिशत ब्याज लें। एक तरफ तो किसानों का आधा अधूरा कर्ज माफ हुआ, दूसरी तरफ बाकी की रकम पर ब्याज इतना अधिक बढ़ा दिया गया है कि उसे कर्जमाफी से राहत मिलने की बजाय और अधिक मार पड़ रही है।

बता दें कि पहले किसानों को अपने कर्ज की रकम पर 7 फीसदी का ब्याज देना पड़ता था। इसमें से सरकार चार फीसदी की छूट देती थी। तब किसानों को तीन प्रतिशत के हिसाब से ही अपना ऋण चुकाना होता था। लेकिन जिन किसानों को कर्जमाफी दी जा रही है अब उनके लिए नियम बदल गए हैं।

मार्च 2016 से पहले तक फसल ऋण को प्रदेश सरकार द्वारा माफ किए जाने के बाद बची ऋण की धनराशि पर बैंकों को तीन प्रतिशत के हिसाब से ब्याज लेना चाहिए, लेकिन एेसा नहीं हो रहा। बैंक एक लाख रुपये का ऋण माफ होने के बाद इस एक लाख रुपये आैर बाकी धनराशि पर ब्याज साढ़े बारह प्रतिशत के हिसाब से ब्याज ले रहे हैं। इसके कारण कई किसानों को लेने के देने पड़ गए हैं। जाहिर है कि किसान परेशान हैं आैर अब वे एक बार फिर बैंकों के चक्कर काट रहे हैं।

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