मोदी सरकार का बड़ा फैसला, अब किसानों को भी देना होगा टैक्स, आ गए अच्छे दिन !

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1 जुलाई से लागू होने वाले गुड्स एंड सर्विस टैक्स से किसानों पर भी मार पड़ने वाली है। अभी तक किसानों को होने वाली किसी भी तरह की आय पर टैक्स नहीं लगता है, लेकिन जीएसटी में इसके लिए प्रावधान किए गए हैं। केंद्र सरकार ने केवल उन किसानों को राहत दी है जो खुद ही खेती करते हैं और उससे होने वाली उपज को बाजार में बेचते हैं।
18 फीसदी लगेगा टैक्स

केंद्र सरकार ने ऐसे किसानों को नहीं बख्शा है, जो खुद तो खेती करते नहीं हैं, बल्कि अपनी खेती को साल के हिसाब से बटाई या फिर कांट्रैक्ट फॉर्मिंग पर तीसरे व्यक्ति को देते हैं। ऐसे किसानों को 18 फीसदी के हिसाब से टैक्स देना होगा। इसके साथ ही ऐसे किसान को जीएसटी के तहत अपना रजिस्ट्रेशन भी कराना होगा। इतना ही नहीं, उन्हें भी व्यापारियों की तरह हर साल 37 रिटर्न फाइल करने होंगे।
बड़े किसान कराते हैं कांट्रैक्ट फॉर्मिंग

पूरे देश में ऐसे लाखों किसान हैं, जिनके पास 2-3 एकड़ से ज्यादा की खेती है। ऐसे किसान अक्सर अपनी खेती को बटाई या फिर किसी कंपनी को काट्रैक्ट पर दे देते हैं। इससे किसानों को साल की समाप्ति पर एक मुश्त पैसा मिल जाता है और किसी तरह की कोई लागत भी नहीं लगती है।

​सरकार ने यह भी तय किया है कि जो किसान अपनी सब्जियों या फिर अन्य उपज को खुले मार्केट में बेचते हैं, उनसे किसी तरह का कोई टैक्स नहीं लगेगा। लेकिन अगर इस उपज को किसी ब्रांड के तहत बेचा तो उस पर 5 फीसदी टैक्स देना होगा।

डेयरी, पॉल्ट्री आएंगे जीएसटी के दायरे में

सरकार ने साफ किया है कि डेयरी बिजनेस, मुर्गी पालन, भेड़-बकरी का पालन करने वालों को जीएसटी के दायरे में लाया गया है। जीएसटी में ताजा दूध बेचने पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन दूध पाउडर और टेट्रा पैक में बिकने वाले दूध पर 5 फीसदी टैक्स देना होगा।

 

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