गुजरात में बदलाव की आहट, सचिवालय में जलाई जाने लगी काले कारनामों की फाइलें !

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अहमदाबाद, कहते हैं सत्ता परिवर्तन की आहट सबसे पहले सिस्टम में बैठे अधिकारियों को हो जाती इसीलिए वो सरकार बदलने से पहले अपने काले कारनामों को ठिकाने लगाने लग जाते हैं। ऐसा ही कुछ गुजरात में हो रहा है जहां पहले चरण का मतदान हो चुका है और दूसरे चरण का मतदान 14 दिसंबर गुरुवार को जारी है।

इसी बीच मतदान से ठीक पहले गुजरात के पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने भाजपा को निशाने पर लेते हुए बड़ी बात कह दी है उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि, “गुजरात सरकार के कर्मचारियों ने पहले से ही फ़ाइलों को हटाने और नष्ट करने का काम शुरू कर दिया है। यह सत्ता परिवर्तन के साफ संकेत है।”

अब फाइलों को नष्ट करने और जलाने का मतलब साफ है कि गुजरात में पिछले 22 सालों में व्यापक तौर पर भ्रष्टाचार हुआ है जिनके काले कारनामों को छुपाने के लिए गुजरात चुनाव के नतीजों से पहले ही नष्ट किया जा रहा है। ताकि सत्ता परिवर्तन के बाद इन सब घोटालों और काले कारनामों का काला चिट्ठा न खुल सके और पहले की सरकारों पर कोई आंच न आ सके।

बता दें कि संजीव भट्ट वही अधुकारी हैं, जिन्होंने 2002 में गुजरात दंगों में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे। बीबीसी में प्रकाशित खबर के मुताबिक, संजीव भट्ट ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा था कि गोधरा कांड के बाद 27 फ़रवरी, 2002 की शाम में मुख्यमंत्री की आवास पर हुई बैठक में वे मौजूद थे, जिसमें मोदी ने कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों से कहा था कि हिंदुओं को अपना ग़ुस्सा उतारने का मौक़ा दिया जाना चाहिए।

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