CM योगी के निशाने पर हैं पूर्व DGP जगमोहन यादव और हरी शंकर तिवारी जैसे सभी पुराने निजी दुशमन

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लखनऊ, उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने के बाद से जहाँ पूरे प्रदेश में अचानक से अपराधों में इजाफा हो गया है तो वहीँ CM योगी पर बदले की भावना से काम करने के आरोप अभी से ही लगने लगे हैं। कुछ बड़े राजनेताओं ने पूर्व DGP जगमोहन यादव पर योगी सरकार के दबाव में जमीन कब्जाने की FIR लिखवाने की बात भी कही है।

हालाँकि जगमोहन यादव से योगी जी का पुराना हिसाब है, जब गोरखपुर दंगों के बाद में राज्य सरकार ने जगमोहन यादव जी को DIG रेंज गोरखपुर नियुक्त करके भेजा था तथा वहां पहुंचकर जगमोहन यादव ने सबसे पहले हिन्दू युवा वाहिनी पर पुलिस का शिकंजा कसा था, जिसके तहत पुलिस की कई टीमों को गाँवों में हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं को पकड़ने के लिए भेज गया था। इसके बाद जांच के आधार पर योगी जी को अरेस्ट करके जेल भेज दिया गया था और यह सब पूर्व DGP जगमोहन यादव के नेतृत्व में हुआ था, तब से लेकर शायद आज तक वह खटास गयी नही और योगी जी के सरकार में आने के बाद जगमोहन यादव पर हुई FIR इन बातों को हवा देती हैं।

इसके अलावा गोरखपुर में कल एक घटना में हरी शंकर तिवारी और उनके बेटे विजय शंकर तिवारी का नाम आया है जिसमे एक लड़की की लाश उनके फार्म हाउस में मिली है। अब वहां के स्थानीय लोगों का कहना है की ये पूरी घटना सुनियोजित है और पुरानी रंजिश और विद्वेष के कारण ऐसा किया जा रहा है,जैसा की स्थानीय लोग बताते हैं की हरी शंकर तिवारी(ब्राह्मण) और वीरेन्द्र प्रताप शाही(ठाकुर) के बीच काफी सालों तक वर्चस्व को लेकर लड़ाई हुयी तथा 1997 में गैंस्टर श्री प्रकाश शुक्ल ने वीरेन्द्र प्रताप शाही की हत्या कर दी थी।

1990 के दशक में जब योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर की धरती में अपने पैर पसारे और वर्चस्व की जंग की जगह हिन्दू धर्म का साथ लेकर पूरे गोरखपुर में अपनी जगह बना ली तथा हरी शंकर तिवारी के ब्राह्मण वर्चस्व को ख़तम करने का काम भी योगी ने ही किया। हालाँकि पिछले लोक सभा के चुनाव में हरी शंकर तिवारी के बेटे बिजय शंकर तिवारी ने बसपा से योगी के खिलाफ चुनाव लड़ा था पर उन्हें दो लाख से ज्यादा वोटों से हार का सामना करना पड़ा,किन्तु कहीं न कहीं आज भी योगी के विरोधियों में हरी शंकर तिवारी का नाम प्रथम पंक्ति में दर्ज है।

जाने क्या है जगमोहन यादव का मामला ?

यूपी की राजधानी लखनऊ में गोसाईगंज थाने में आईपीएस अधिकारी रहे पूर्व डीजीपी जगमोहन यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने का मामला सामने आया है। उनपर आवास विकास की जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगा है। वहीं, एसएसपी मंजिल सैनी का कहना है, आवास विकास के अवर अभियंता सुनील विश्वकर्मा की तहरीर पर अनीता रावत समेत दर्जन भर महिलाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। तहरीर में आरोप है कि महिलाएं पूर्व डीजीपी जगमोहन यादव नाम की धौस दे रही थी।

जमीन कब्जाने का है लगा आरोप…

जानकारी के मुताबिक, पिछले रविवार को आवास विकास परिषद की टीम अवध विहार योजना पॉकेट -दो में 30 करोड़ की जमीन पर अवैध कब्जे के रोकने गई थी। इस दौरान यहां कब्जा जमाए बैठे लोगों ने और भूमाफियाओं ने टीम पर हमला कर पथराव और मारपीट की थी। इस दौरान टीम के कई इंजीनियर भी गंभीर रूप से घायल हुए थे।
टीम पर हुए हमले की सूचना पाकर गोसाईगंज पुलिस भी मौके पर पहुंची थी तो हमलावरों ने पुलिस टीम को भी खदेड़ दिया था। पीड़ित इंजीनियर की मानें तो जब वह शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचा तो वहां पहले से ही दबंग और भू-माफिया मौजूद थे। इस मामले में पूर्व डीजीपी जगमोहन यादव पर भी आवास विकास की जमीन पर कब्जा करने का आरोप है। लेकिन मामला एक वर्दीधारी से जुड़ा होने की वजह से थानेदार सहित अन्य आला अफसर भी कुछ बोलने से इंकार कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार आवास विकास के अवर अभियंता सुनील विश्वकर्मा की तहरीर पर गोसाईगंज थाने अनीता रावत तथा पूर्व डीजीपी जगमोहन यादव सहित कई अन्य के खिलाफ 120 बी व कई अन्य धाराओ में मुकदमा दर्ज किया गया है।
क्या कहना है SSP का ?
एसएसपी मंजिल सैनी का कहना है, गोसाईगंज थाने पर आवास विकास के अवर अभियंता सुनील विश्वकर्मा की तहरीर पर अनीता रावत समेत दर्जन भर महिलाओं के खिलाफ 120 बी व कई अन्य धाराओ पर मुकदमा दर्ज हुआ है। अवर अभियंता ने तहरीर में आरोप लगाया है कि महिलाओं ने पूर्व डीजीपी जगमोहन यादव नाम की धौस दी थी।