भारत की पहली दिव्यांग बच्चों टीम की जो करते हैं एक्रो योगा !

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एक्रोबेटिक योगा में दो लोगों का आपसी तालमेल और समझ बहुत ज़रूरी होती है। एक दूसरे पर आंख बंद करके भरोसा करना होता है, तभी योगा के वह स्टैप किये जाते हैं जो दांतो तले उंगलियां दबाने को मजबूर कर दें। भारत में बहुत सी एक्रोबेटिक योगा की टीमें आपने देखी होंगी जो एक दुसरे की मदद से अलग अलग तरह की मीनारें आपके सामने चुटकियों में प्रस्तुत कर देते हैं। मगर यही एक्रोबेटिक योगा जब कोइ बिना देखे करे तो आसान सी दिखने वाली मीनारें बहुत मुश्किल हो जाती हैं।

अखिल भारतीय नेत्रहीन संघ, रघुबीर नगर एवं ऐस डी पब्लिक स्कूल, पीतम पूरा के इन बच्चों ने ना सिर्फ एक्रोबेटिक योगा में अपनी दिव्यांगता के बावजूद महारत हासिल कर ली बल्कि विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान हासिल करके दुनिया को बता दिया कि दिव्यांगों की छठी इंद्री (छठा सेंस) उनकी सारी कमी पूरी कर देती है।

इन बच्चों को एक्रोबेटिक सिखाने वाले हेमन्त शर्मा बताते हैं कि पहले उन्हें लगा ही नहीं कि यह बच्चे भी एक्रोबेटिक कर सकते हैं। चार साल पहले जब वह यहां आये थे तब इन्हें बस ध्यान और आसन सिखाया करते थे, इन बच्चों की अन्य सामान्य बच्चों की तुलना में जल्द सीखने की आदत को देखते हुए उन्होंने यूं ही इन्हें एक्रोबेटिक सिखाया और रिजल्ट आज सबके सामने है।

ये बच्चे फर्स्ट नेशनल एक्सीलेंस अवॉर्ड, अनमोल अवॉर्ड के साथ साथ फर्स्ट योगा ओपन नेशनल चैम्पियनशिप, मेरी आवाज सुनो, दिल्ली स्टेट योगा चैम्पियनशिप जैसी बहुत सी प्रतियोगिताओं में सामान्य वर्ग के छात्रों को भी कड़ी टक्कर दे चुके हैं।

इन बच्चों को अब तक बहुत से लोग सराह चुके हैं। किरण बेदी, सत्येंद्र जैन, संदीप कुमार, एक्टर प्रवीण कुमार, डॉ. केके अग्रवाल, महाबली सतपाल सरीखे बहुत से लोगों ने इन बच्चों की कला की प्रशंसा की है।

बच्चे दूरदर्शन के शो मेरी आवाज़ सुनो का भी हिस्सा रह चुके हैं।

(वीडियो लिंक मेरी आवाज़ सुनो)

कलर्स टी वी के शो इंडिया बनेगा मंच में भी बच्चे अपना हुनर दिखा चुके हैं।

(वीडियो लिंक इंडिया बनेगा मंच)

ज़ी तेलुगू के शो बिग सेलिब्रिटी चैलेंज इंटरनेशनल ने भी हुनर को मौका दिया।

(ज़ी तेलुगू के शो का वीडियो लिंक)

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