योगी के 3 महीने के कार्यकाल में हो गया करोड़ों का घोटाला 5 साल में क्या होगा, देखें कहाँ हुआ ये कांड !

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शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश की सत्ता पाते ही योगी सरकार ने कहा कि 15 जून तक प्रदेश की सभी सड़कें गड्ढामुक्त हो जाएंगी। योगी सरकार ने लोगों से 15 जून तक का समय मांगा और कहा कि 40 दिन के भीतर प्रदेश भर की सारी सड़कें गड्ढा मुक्त हो जाएंगी। इसी काम में शाहजहांपुर में एक करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला हो गया।

यह है मामला

रिपोर्ट के मुताबिक मण्डी परिषद ने चार महीने पहले पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाई गई पांच नई सड़कों पर अपनी फर्जी सड़के बना डाली और एक करोड़ 25 लाख रुपए का भुगतान भी कर दिया। इस पूरे घोटाले में जिलाधिकारी की भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है। क्योंकि सड़कें बनाने की संस्तुति खुद डीएम ने की है।

12 लाख रुपए भी जारी

जो सड़क तस्वीर में बनती हुई दिख रही है ये एक घोटाले की सड़क है इस सड़क का निर्माण अखिलेश सरकार के दौरान 4 – 5 महीने पहले ही पीडब्लूडी द्वारा बनाई गई थी। अब इसी सड़क पर मण्डी परिषद का निमार्ण विभाग इस पर तारकोल डाल रहा है। इस सड़क के लिए विभाग ने बाकायदा 12 लाख रुपये भी जारी कर दिये हैं। 1200 मीटर लम्बी ये कोई अकेली सड़क नही है। बल्कि मण्डी परिषद ने पीडब्ल्यूडी की ही चार महीने पहले बनी पांच सड़कों पर टेन्डर जारी करके कागजों में अपना निर्माण दिखा दिया।

चार महीने पहले बनी सड़क पर दोबारा निर्माण

मण्डी परिषद ने अपने चहेते ठेकेदार अनिल सिंह को सवा करोड़ की लागत से बनने वाली पांच सड़कों का टेन्डर दे दिया। ये टेन्डर उन पांच सड़कों का था जिसे पीडब्ल्यूडी ने चार महीने पहले की बनाया था। मण्डी परिषद ने कागजों में उन्हे अपनी सड़कें दिखा दी। स्थानीय लोगों की माने तो जिस सड़क पर तारकोल डाला जा रहा है उस सड़क को बने हुए चार महीने ही हुए है लेकिन यहां खुला घोटाला किया जा रहा है। वहीं सड़क बना रहे ठेकेदार के कर्मचारी भी इसे घोटाले की सड़क बता रहे हैं।

ग्रामीण महेन्द्र पाल सिंह से जब बनने वाली सड़क के बारे में पूछा गया तो उनका कहना है कि इस सड़क को उनके सामने ही चार से पांच महीने पहले बनाया गया था। इतने जल्दी सड़क खराब नहीं होती है। इस सङ़क को बनाने का मतलब है कि घोटाला करके पैसा कमाया जाए और यही हो भी रहा है। जिन सड़कों पर ज्यादा गड्ढे हैं वहां कोई सड़क बनाने के लिए नहीं सोच रहा है।

सड़क हो गई थी खराब

मंडी परिषद के सहायक अभियंता पीके सक्सेना से जब इस बारे में बात की तो उनका कहना है कि बनने वाली सड़क चार महीने पहले नहीं बनी थी वह कई साल पहले बनी थी। इसलिए उसको बनवाया जा रहा है। जब उनसे स्थानीय लोगों के बारे में बताया कि वो लोग चार महीने पहले सङक को बनाया गया बता रहे है तो इस पर वह कुछ नहीं बोले और या यूँ कहें कि उनके पास कोई जवाब ही नही था। मंडी परिषद के उप निदेशक आफताब-उर-रहमान का कहना है कि सड़क कई साल पहले बनाई गई थी उसमें ज्यादा गड्ढे हो गए थे। इसलिए उसे बनवाना ज्यादा जरूरी हो गया था।

डीएम ने कहा होगी बड़ी कार्रवाई

जिलाधिकारी नरेन्द्र कुमार सिंह के अनुसार उनके पास शिकायत आई है कि मंडी परिषद में पांच सड़के बनाई जा रही हैं। उन सड़कों को पीडब्ल्यूडी चार से पांच माह पहले बनवा चुका है। पता चला है कि मंडी परिषद ने पीडब्ल्यूडी की बनाई हुई पांच सड़कों के नाम बदल कर कागजों में उसको जर्जर दिखाया था। इस मामले की जांच हमने एडीएम एफआर को सौंपी है। वह जाएं और जो भी कमी है इसकी रिपोर्ट हमे बनाकर दें। जब उनसे स्वकृति के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि वह तो सभी कामों में स्वकृति देते है। लेकिन ये तो पता नहीं होता है इसमें क्या सही है क्या गलत है।

Input Patrika