फोर्ब्स पत्रिका ने लालू प्रसाद यादव के बयान को दोहराया कहा “नोटबंदी का हाल कांग्रेस की 1970 “नसबंदी” से बुरा होगा”

फोर्ब्स पत्रिका ने लालू प्रसाद यादव के बयान को दोहराया कहा "नोटबंदी का हाल कांग्रेस की 1970 "नसबंदी" से बुरा होगा"
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प्रतिष्ठित अमेरिकी बिज़नेस पत्रिका फोर्ब्स ने पूर्व रेल मंत्री वा राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के कुछ दिन पहले दिए हुए बयान पर लगाई अपनी मोहर,फोर्ब्स ने नोटबंदी की तुलना 1970 सत्तर के दशक में लागू की गई नसबंदी से की है। फोर्ब्स ने लिखा है कि 1970 के दशक में लागू की गई नसबंदी के बाद सरकार ने ऐसा अनैतिक फैसला नहीं लिया था।

फोर्ब्स ने नोटबंदी के फैसले को जनता की संपत्ति की लूट बताया है। फोर्ब्स ने लिखा है, “भारत सरकार ने उचित प्रक्रिया के पालन का दिखावा भी नहीं किया- किसी लोकतांत्रिक सरकार का ऐसा कदम स्तब्ध कर देने वाला है।” फोर्ब्स के अनुसार भारत सरकार इस तथ्य को दबा रही है कि नोटबंदी के फैसले से भारत को दसियों अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।

फोर्ब्स के अनुसार नरेंद्र मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले से देश को भारी नुकसान हो सकता है। फोर्ब्स पत्रिका के 24 जनवरी 2017 के संस्करण में छपे लेख में कहा गया है कि मोदी सरकार के इस फैसले से भारत के पहले से ही गरीब लाखों लोगों की हालत और खराब हो सकती है। फोर्ब्स पत्रिका के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ स्टीव फोर्ब्स ने लिखा है, “देश की ज्यादातर नकदी को बंद कर दिया गया। स्तब्ध नागरिकों को नोट बदलने के लिए कुछ ही हफ्तों का समय दिया गया।”

फोर्ब्स के अनुसार, “आर्थिक उथलपुथल को इस बात से भी बढ़ावा मिला कि सरकार पर्याप्त मात्रा में नए नोट नहीं छाप पाई…नए नोटों का आकार भी पुराने नोटों से अलग है जिसकी वजह से एटीएमों के लिए बड़ी दिक्कत खड़ी हो गई।” लेख में कहा गया है, “भारत हाई-टेक पावरहाउस है लेकिन देश के लाखों लोग अभी भी भीषण गरीबी में जी रहे हैं। ” लेख में कहा गया है कि नोटबंदी के फैसले के कारण भारतीय शहरों में काम करने वाले कामगार अपने गांवों को लौट गए हैं क्योंकि बहुत से कारोबार बंद हो रहे हैं।

फोर्ब्स ने भारतीय अर्थव्यवस्था के नकद पर अत्यधिक निर्भर होने का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि यहां ज्यादातर लोग नियमों और टैक्स के अतिरेक की वजह से अनौपचारिक तरीके अपनाते हैं।

पूरे देश में जहाँ नोटबंदी से किसान और आम जनता बेहाल है,वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के पास से फर्जी तरह से एकत्रित किये गए 2000 रूपये के नए नोटों के अम्बार मिल रहे है।

लालू प्रसाद यादव जी का भी गुस्सा फूटा नोटबंदी परआरजेडी प्रमुख शनिवार को नोटबंदी के मुद्दे पर पार्टी नेताओं से पहली बार बात कर रहे थे। इस दौरान लालू जी ने कहा कि केंद्र की नोटबंदी योजना का वही हाल होगा जो 1970 में कांग्रेस के शासन में नसबंदी का हुआ था। लालू ने कहा कि नोटबंदी के पचास दिन पूरे होने वाले हैं। इसके बाद उनकी पार्टी नीतीश की जदयू के साथ मिलकर मोदी सरकार के इस फैसले के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा करेगी।
हालांकि बिहार के सीएम नीतीश कुमार मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले से सहमति जता चुके हैं। सभी विपक्षी दलों में नीतीश ही एक मात्र ऐसे नेता हैं जिन्होंने कालेधन के खिलाफ लड़ाई में पीएम मोदी के नोटबंदी के कदम की सराहना की और उसे अहम करार दिया। ऐसे में वह लालू के साथ नोटबंदी के खिलाफ आंदोलन में मंच साझा करेंगे, यह देखना वाकई दिलचस्प होने वाला है।

लालू प्रसाद यादव ने पार्टी के नेताओं से यह भी कहा कि पीएम मोदी ने जनता से वादा किया था कि विदेशों में जमा कालाधन वापस लाया जाएगा और 15 लाख रुपये लोगों के खातों में डाले जाएंगे, उसका क्या हुआ?

लालू ने कहा कि उन्होंने एक अर्थशास्त्री को बुलाया है, जो नोटबंदी की समीक्षा करेगा, इसके बाद आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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