पूर्व मुख्यमंत्रियों से नहीं ‌छिनेगा बंगला, देना होगा ज्यादा किराया, बढ़ा सीएम व मंत्रियों का वेतन

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लखनऊ, अब पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी बंगला नहीं छिनेगा। वे निर्धारित किराये का भुगतान करके इन बंगलों में रह सकेंगे।

सरकारी आवास खाली कराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यूपी सरकार ने बाकायदा कानून बनाकर पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले आवंटित करने का प्रावधान कर दिया है। यही नहीं, सरकार ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों व उपमंत्रियों का वेतन भी तीन गुना से अधिक बढ़ा दिया है।

पूर्व मुख्यमंत्रियों को राजधानी में आजीवन सरकारी आवास की सुविधा देने, सीएम से लेकर उपमंत्री तक का वेतन बढ़ाने के संबंध में सोमवार को विधानसभा में उत्तर प्रदेश मंत्री (वेतन, भत्ता और प्रकीर्ण उपबंध) (संशोधन) विधेयक 2016 पेश किया गया।

विधेयक के पास होते ही पूर्व सीएम को ताउम्र सरकारी आवास का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके पारित होने पर पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवासों को कानूनी दर्जा हासिल हो जाएगा।

इसमें प्रावधान है कि यूपी के किसी पूर्व मुख्यमंत्री को उनके अनुरोध पर जीवनपर्यंत राज्य संपत्ति विभाग द्वारा निर्धारित मासिक किराये पर सरकारी आवास आवंटित किया जाएगा।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त को प्रदेश के छह पूर्व मुख्यमंत्रियों को दो माह में सरकारी बंगले खाली करने का आदेश दिया था। अदालत ने उस नियमावली को ही अवैध ठहराया था जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास आवंटित किए गए थे।

इसके बाद अखिलेश सरकार ने बंगले बचाने के लिए मौजूदा कानून में संशोधन का फैसला किया। संसदीय कार्य मंत्री मो. आजम खां ने सोमवार को इससे संबंधित विधेयक विधानसभा में पेश किया। 1981 के मूल अधिनियम में संशोधन करके नए विधेयक को तैयार किया गया है।

यूपी सरकार ने मुख्यमंत्री से लेकर उपमंत्रियों तक का वेतन बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों व राज्यमंत्रियों का वेतन अब 12 हजार से बढ़कर 40 हजार रुपये प्रतिमाह हो जाएगा।

वहीं, उपमंत्रियों का वेतन 10 हजार से बढ़कर 35 हजार रुपये प्रतिमाह हो जाएगा। फिलहाल प्रदेश में कोई उपमंत्री नहीं है। मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री व राज्यमंत्रियों को विधायक के रूप में मिलने वाले भत्ते अलग हैं।

भत्ते जोड़कर सीएम को 1.29 लाख रुपये मिलेगा वेतन

वर्तमान में विधायक के रूप में मिलने वाले भत्तों को जोड़कर मुख्यमंत्री, कैबिनेट व राज्यमंत्रियों का वेतन करीब 1,01,008 रुपये बनता है। सदन चलने के दौरान भत्तों में थोड़ा-बहुत इजाफा होने पर वेतन बढ़ जाता है।

सामान्य दिनों में विधायकों को 800 रुपये जबकि विधानमंडल सत्र चलने के दौरान 1000 रुपये प्रतिदिन भत्ता मिलता है।

सब जोड़कर सीएम, कै बिनेट व राज्यमंत्रियों मंत्रियों का वेतन करीब 1.29 लाख रुपये तथा उपमंत्रियों का वेतन 1.26 लाख रुपये हो जाएगा।

ये सुविधाएं भी मिलेंगी

– पद ग्रहण करने के बाद 15 दिन तक लखनऊ में नि: शुल्क आवास की सुविधा।

– सरकारी आवास सुविधा न लेने वाले मुख्यमंत्री, मंत्री व राज्यमंत्री को 10 हजार रुपये प्रतिमाह तथा उप मंत्री को आठ हजार रुपये प्रतिमाह प्रतिकर भत्ता।

– मुख्यमंत्री व प्रत्येक मंत्री को एक वाहन और एक ड्राइवर मिलेगा जिसकी खरीद और अनुरक्षण सरकारी खर्चे पर होगा।

– मुख्यमंत्री व प्रत्येक मंत्री को अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए सड़क, समुद्र या वायु मार्ग से सरकारी खर्च पर यात्रा करने की सुविधा व फुटकर खर्च की प्रतिपूर्ति।

– पद ग्रहण करने और पद छोड़ने पर मूल निवास से लखनऊ तक परिवार के सदस्यों और सामान के साथ आने-जाने के लिए यात्रा भत्ता।

– पद पर रहते हुए दायित्वों के निर्वहन के लिए किसी किराए या बिजली के बिल का भुगतान किए बगैर सरकार के सर्किट हाउस, निरीक्षण गृहों व विश्राम गृहों के प्रयोग की सुविधा।

– परिवार के सदस्यों सहित सरकारी अस्पतालों में नि: शुल्क भर्ती व इलाज की सुविधा।

– पूर्व की भांति पेंशन की सुविधा।

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