गिरगिट भी शर्मा जाए इन नेताओं को रंग बदलता देखकर

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उत्तर प्रदेश में जैसे जैसे विधान सभा चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे वैसे नेता अपना रंग बदल रहे है नेताओं को इतनी जल्दी जल्दी रंग बदलता देख कर यूपी के गिरगिट भी शर्मा गए हैं।

ताजे उदहारण के तौर पर बसपा के पूर्व नेता रहे स्वामी प्रसाद मोर्या को देखा जा सकता है। बसपा में रहते हुए वो नेता प्रतिपक्ष रहे। अपने बसपा के राजनीतीज्ञ कैरियर में उन्होंने मायावती की खूब चरण वंदना की है।

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बसपा में रहते हुए वह भाजपा और उनके नेताओं के खिलाफ तीखी और सख्त टिप्पणी के लिए मशहूर थे, भाजपा की बुराई करके ही उनके राजनीति चलती थी। स्वामी प्रसाद की टिप्पणियों का ये आलम था की प्रधानमंत्री से लेकर भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह जैसे नेता तक आहत हुए थे।

बहन मायावती को खुश करने की कोशिश में उन्होंने किसी को भी नहीं बख्शा था. लेकिन पिछले सप्ताह सब कुछ बदल गया। एक मजबूत कुर्मी नेता ने नीला चोला छोड़कर केसरिया चोला धारण कर लिया और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनवाने की कसम खाई।

भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में बुधवार को पहली बार पहुंचे मौर्या ने मोदी और शाह की तारीफ के पुल बांधे। इससे पहले कई अवसरों पर मौर्या ने मोदी-शाह की जोड़ी को ‘शैतान युगल’, ‘भूखे भेड़िये’, ‘नौटंकीबाज’ और ‘देशी आतंकवादी’ जैसी उपमा दी थी। लेकिन अब मौर्या का हृदय परिवर्तन हो गया है।

हालांकि स्वामी यह स्पष्ट करने में नाकाम रहे कि ‘घृणा के सौदागरों’ और ‘दंगों के नायकों’ में उन्होंने अचानक दैवीय गुण कैसे देख लिया। मौर्या के एक सहयोगी ने कहा, “कुल मिलाकर यह राजनीति है.” उन्होंने सलाह दी, “किसी को अतीत में नहीं जीना चाहिए।”

भाजपा के रणनीतिकार भी मौर्या को अपनाने के बारे में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर रहे हैं, जबकि उन्होंने न केवल भजपा नेताओं के लिए अपशब्द कहा था, बल्कि 21 सितंबर, 2014 को लक्ष्मी और गणेश जैसे हिंदू देवी-देवताओं का भी अनादर किया था। इस मामले पर मौर्या के खिलाफ एक मुकदमा भी दर्ज किया गया था और भाजपा इस मुद्दे को सड़क पर हंगामा भी काटा था।

स्वामी प्रसाद की तरह ही कांग्रेस के तीन मुस्लिम विधायक ‘हृदय परिवर्तन’ का दावा करते हुए बसपा में शामिल हो गए।

विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक रहे अमेठी के तिलोई से विधायक मोहम्मद मुस्लिम बसपा में शामिल हो गए। उन्होंने सोनिया गांधी के बारे में कहा, “वह न तो अपने कानों से सुन सकती हैं और न ही अपनी आंखों से देख सकती हैं।”

बसपा में शामिल होने वाले कांग्रेस के दूसरे विधायक कासिम अली हैं। वह रामपुर के राजपरिवार के वंशज हैं और पिछले पांच साल (2007 से 2012 के बीच) में दो बार पार्टी बदल चुके हैं। पहले वह बसपा में थे, पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल हो गए और विधायक बन गए।

उन्होंने कहा, “अब आंखें खुल गई हैं और गलतफहमियां दूर हो गई हैं.” हालांकि ऐसा होने में पांच साल लग गए।

समाजवादी पार्टी के बुढ़ाना से विधायक नवाजिश आलम खान पर नई विचारधारा हावी हो गई और उन्होंने मुलायम सिंह यादव को धोखा देकर उनके चिर प्रतिद्वंद्वी मायावती का दामन थाम लिया।

खान अब कह रहे हैं कि वह सपा में घुटन महसूस कर रहे थे। यह अलग बात है कि बसपा छोड़ने वाले अधिकांश नेताओं ने भी पार्टी छोड़ने के लिए इसी तरह घुटन महसूस होने का आरोप लगाया है।

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