बिहार का सुशासन या जंगलराज – 18 साल की लड़की से गैंगरेप के बाद तेजाब में डुबाकर मारा !

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पटना, बिहार की नीतीश सरकार सुशासन देने का दावा करती है और सुशासन के नाम पर समझौता न करने का हवाला देते हुए महागठबंधन से अलग होकर सुशील मोदी और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। बिहार में एनडीए सरकार के आने से प्रदेश के दबंगों की दाबंगई बढ़ गयी है। जहां एकतरफ सोशल पोलिसिंग की नाम पर लड़कियों को सरेआम मारा जा रहा है तो वहीं लड़की की इज्जत के साथ भी खेला जा रहा है।

औरंगाबाद जिले में दरिंदगी की ऐसी खबर आई कि जिसे सुन रोंगटे खड़े हो जाएंगे। यहां दरिंदों ने एक 18 साल की लड़की के साथ पहले गैंगरेप किया गया, फिर पहचान और सबूत मिटाने के लिए लड़की को तेजाब से नहलाकर उसकी हत्या कर दी गई। हसपुरा थाना पुलिस ने रघुनाथपुर गांव के पास से लड़की का शव बरामद किया है। शव मिलने के बाद इलाके के लोग दहशत में हैं. लोगों का कहना है कि इस घटना से साबित हो गया है कि बिहार में अपराधियों के मन में कानून का डर खत्म हो गया है और जंगलराज आ गया है।

दरिंदों की दरिंदगी की शिकार हुई 18 वर्षीय लड़की पुलिस में शामिल होना चाहती थी। इसी की तैयारी के लिए वह हर रोज तड़के दौड़ लगाने के लिए घर से निकलती थी। शनिवार को भी युवती दौड़ लगाने के लिए सुबह तीन बजे घर से निकली थी।

परिवार के लोगों का कहना है कि युवती हर रोज सुबह छह बजे तक दौड़कर घर लौट आती थी, लेकिन शनिवार को वह 10 बजे तक नहीं लौटी। घर नहीं पहुंचने पर परिवार के लोगों ने उसके सहेलियों से पूछताछ की, लेकिन उसका कुछ भी पता नहीं चला। इसके बाद उन्होंने शहरतेलपा ओपी थाने में लापता होने की शिकायत की थी। पुलिस ने युवती के शाम तक लौटने की उम्मीद जताकर लौटा दिया।

हसपुरा थाना पुलिस ने रघुनाथपुर गांव के पास से युवती का शव बरामद किया। मेडिकल के बाद सिविल सर्जन डॉ. रामप्रताप सिंह ने युवती के साथ रेप की पुष्टि की है। पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि शव की हालत देखकर कहा जा सकता है कि रेप से पहले युवती के साथ मारपीट की गई है। शायद उसने रेप का विरोध किया होगा. शव पर कई जगह चोट के निशान हैं। रेप के बाद सबूत मिटाने के इरादे से उसके ऊपर तेजाब डालकर उसकी हत्या कर दी गई है।

हत्या से नाराज लोगों ने सोमवार को पुलिस के विरोध में नाराजगी जाहिर की। परिजनों और लोगों का कहना है कि पुलिस की लापरवाही से युवती की हत्या हुई है। अगर पुलिस परिजनों की शिकायत पर पहले ही छानबीन में जुटती तो शायद उसकी जान बच सकती थी।

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