अखिलेश यादव का कथन सही साबित हुआ- GST की आड़ में शुरू हुआ इंसपेक्टर राज, कमिश्नर अरेस्ट !

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कानपुर : मोदी सरकार का GST लाया भ्रष्ट अधिकारियों के लिए घूसखोरी का नया हथियार, भ्रष्टाचार खत्म करने की बात करने वाली मोदी सरकार असल में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली सरकार बन गयी है। गौरतलब है कि GST लागू होने के वक़्त ही सपा अध्यक्ष वा यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस बात की पहले ही आशंका जाहिर कर दी थी कि GST से देश में इंसेप्क्टर राज की नयी शुरुआत हो जायेगी, तथा देश में भ्रष्टाचार के नए पैमाने शुरू हो जाएंगे। वहीँ अखिलेश यादव की कही वो बात आज सही साबित हो रही है, जब जीएसटी कमिश्नर संसार चंद को सीबीआई ने घूस लेने के आरोप में अरेस्ट किया।

बता दें कि जांच एजेंसी ने जीएसटी कमिश्नर संसार चंद के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर कई अफसरों और नामचीन उ़द्योपतियों को सलाखों के पीछे भेजा। पर एजेंसी की रडार में आने से पहले कमिश्नर जीएसटी भवन में गैंग-ऑफ-सिंडीकेड चलाता था। यहां सप्ताह में एक दिन पाठशाला सजती थी और कारोबारियों को किस तरह से जाल में फंसाना हैं और किस तरह से उनसे पैसे वसूलने है इसका पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया जाता था। संसार के साथ इसका पीए संतोष पांडेय, तीनों सुपरिटेंडेंट अजय श्रीवास्तव, अमन शाह और आरएस चंदेल देते थे। संसार चंद ने पद का बेजा इस्तमाल कर रिश्वतखोरी से अपना घर-संसार जगमग किया। संसार चंद और उनके खास अधीक्षकों का सिंडीकेड समानान्तर विभाग चला रहा था। टैक्स चोरी के एवज में कारोबारियों से बंदी रिश्वत ली जाती थी। जो कारोबारी इन्हें पैसे देते वह पाक-साफ बचे रहते और जिसने आना-कानी की उसे जीएसटी के नाम पर जेल भेजने की धमकी देते।

सप्ताह में एक दिन लगती थी घूसखोरी की पाठशाला और बांटा जाता था घूसखोरी का पैसा !

जीएसटी कमिश्नर कैलाश भवन को पूरी तरह अपने तरीके से संचालित कर रहा था। एक कारोबारी ने बताया कि इन्हीं के कहने पर पोर्टल को खराब कर दिया जाता और जीसएटी के नाम पर हमलोगों को परेशान कर रिश्वत मांगी जाती थी। संसार चंद अपने पीए के साथ तीनों अधिक्षकों के साथ ऑफिस में बकाएदा शुक्रवार को पाठशाला लगाता था। पांचों लोग बैठकर पहले पूरे सप्ताह की आमदनी का लेखा-जोखा रखते और अगले हफ्ते किन-किन कारोबारियों को जाल में फंसा कर उनसे रिश्वत ऐंठनी है, उसकी व्यूह रचना तैयार करते। टैक्स में चोरी करने का काम करने वाले कारोबारियों की पूरी सूची इन्होंने बनाई हुई थी। इनकी रेकी करने का प्लॉन भी इसी पाठशाला में बनता था। किससे ज्यादा वसूली करनी है और किसे आगे फंसाना है पूरी विधिवत रणनीति बनाई जाती थी।

दो वकीलों के झगडे के चलते फंसा GST कमिश्नर, उजागर हुआ बड़ा घूसकांड !

स्वरूप नगर स्थित एक अपार्टमेंट में अमित अवस्थी का ऑफिस है, जो पेशे से वकील हैं। सेंट्रल एक्साइज और सर्विस टैक्स (वर्तमान में जीएसटी विभाग) में अमित अवस्थी की अच्छी पकड़ है। इस विभाग से रिटायर्ड होने वाले अधिकतर अफसर अमित की फर्म से जुड़ जाया करते थे। इन्हीं में से एक पूर्व सुपिरटेंडेंट भी अमित की फर्म के साथ जुड़ गए। पूर्व सुपिरटेंडेंट ने अपने बेटे को भी अमित के साथ रखवा दिया। पर रेखा डिटर्जनेंट बनाने वाले शिशु केमिकल्स की दोस्ती पूर्व सुपिरटेंडेंट के बेटे से हो गई और वह शिशु का काम देखना शुरू कर दिया। जिसका विरोध अमित ने किया, इसी के चलते पूर्व सुपिरटेंडेंट के बेटे ने अपना अलग से दफ्तर खोल लिया। शिशु ने पूर्व सुपिरटेंडेंट के बेटे को बताया कि अमित उससे पैसे मांग रहा है। पूर्व सुपिरटेंडेंट के बेटे ने अमित से शिशु को परेशान नहीं करने की सलाह दी, पर जब वह नहीं माना तो बात सीबीआई तक पहुंचा दी।

संसार चंद ने बनायी संसार की बेपनाह दौलत, GST के साये में सरकार को लगाया करोड़ों का चूना !

संसार चंद ने टैक्स चोरी रोकने के बजाए, उत्पादक इकाइयों, सेवा प्रदाताओं और बड़ी फर्मों को टैक्स चोरी की खुली छूट दी। उसके बदले में मोटा माल लिया जाता था। आजादी के बाद सबसे ज्यादा टैक्स चोरी इन्हीं छह माह में हुई है। सेंट्रल जीएसटी के अफसरों ने कानपुर और आसपास के इलाके में फैले अरबों रुपये के अघोषित पान मसाला, इस्पात, प्लास्टिक कारोबार को नजरअंदाज किया। उपभोक्ता वस्तुओं के आवागमन में राज्य के ई-वे बिल के मुताबिक विभागीय अफसरों ने वाहनों की छानबीन नहीं की। टैक्स चोरी रोकने के लिए वाणिज्यिक और औद्योगिक इकाइयों की जांच पड़ताल के आदेशों को नजरअंदाज किया जाता रहा। इसके बदले में छोटी बड़ी औद्योगिक इकाइयों और उत्पादकों को माल लाने ले जाने की खुली छूट दी गई। अफसरों से जब सवाल होता तो जवाब मिलता था कि उद्यमियों को यह जीएसटी के शुरुआती दौर की राहत है। पेचीदगियों को समझने का वक्त दिया जा रहा है। दरअसल, इसके पीछे रिश्वतखोरी के संगठित गिरोह की कमाई का खेल था।

सपा एमएलसी भी आये पकड़ में, संसार चंद ने बांट रखे थे अपने लोगों को ये काम !

कन्नौज का उद्योगपति और सपा एमएलसी पुष्पराज उर्फ पम्पी जैन, सुपरिटेंडेंट अमन शाह के जरिए संसार चंद को कैश घूस देता था, जबकि रिमझिम इस्पात से घूस लेने का जिम्मा सुपरिटेंडेंट अजय श्रीवास्तव को दिया गया था। सुपरिटेंडेंट आरएस चंदेल घूस के नेटवर्क में दोनों की मदद करते थे। चौतरफा आने वाली घूस की कमाई को हवाला कारोबारी अमन जैन व चंदप्रकाश के जरिए दिल्ली पहुंचा दिया जाता था। हवाला कारोबारी इस रकम को ठिकाने लगाते थे और उसका मैनेजमेंट करते थे। संसार चंद की पत्नी अविनाश कौर की मांग पर काली कमाई उसके घर भी यही दोनों पहुंचाते थे। संसार चंद सर्वोदय नगर के अलावा साउथ के गुजैनी में भी एक मकान लिए हुए थे, जहां पर रविवार को सभी अफसर मिलते और काली-कमाई का हिस्सा आपस में बांटा करते थे।

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