मोदी सरकार के चेहरे से नकाब हटाने वाले ऑनलाइन न्यूज पोर्टल्स पर नजर रखेगी सरकार,बनाई कमेटी !

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सोशल मीडिया,ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल्स और न्यूज़ चैनल्स के सहारे सत्ता में आयी मोदी सरकार, अब अपने इन्ही हथियारों से दर गयी है। आज सोशल मीडिया और ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल्स के माध्यम से लोग मोदी सरकार की गलत नीतियों को जोर-शोर से जनता तक पहुँचा रहे हैं, जिसके कारण देश में मोदी सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ी है।

दिल्ली : देश की सत्ता में काबिज भाजपा सरकार को अब डर सताने लगा है और इसका मुख्य कारण है ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल्स वा सोशल मीडिया। बता दें कि मोदी सरकार इसी सोशल मीडिया,ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल्स और न्यूज़ चैनल के पेड इस्तेमाल के जरिये देश में अपने पक्ष में एक माहौल बनाया और सत्ता तक पहुँचने में सफल हुई थी। वहीँ आज इन्ही ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल्स वा सोशल मीडिया में लोग सच लिख रहे हैं जिससे सरकार घबरा गयी है। ये स्वंतंत्र ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल्स वाले देशप्रेमी लोग आज किसानों की समस्या पर, युवाओं के रोजगार पर, महिलाओं की सुरक्षा पर, भुखमरी से मरते गरीबों पर, सीमा पर शहीद होते जवानों पर, नक्सलियों के हाथों शहीद होते जवानों पर, हिन्दू-मुस्लिम के बीच करवाए जाने वाले झगड़ों पर, घोटालेबाज नेताओं पर और देश से भागते अरबपतियों के ज्वलंत और असला मुद्दों पर निष्पक्ष तौर पर सच लिखने लगे हैं, जिसके कारण भाजपा की साख लगातार घट रही है।

इसी के चलते मोदी सरकार की ख़ास मंत्री स्मृति ईरानी ने ऐसे ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल्स वा सोशल मीडिया में लगाम लगाने के लिए सूचना प्रसारण मंत्रालय के माध्यम से एक कमेटी बनाने का फैसला किया है जोकि समाचार पोर्टलों और मीडिया वेबसाइटों पर लगाम लगाने के लिए नियम बनाएगी। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस ऑर्डर से जुड़ा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया है लेकिन 4 अप्रैल को लीक हुए ऑर्डर की कॉपी इंटरनेट पर उपलब्ध है जिस पर ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री के डायरेक्टर अमित कटोच के हस्ताक्षर हैं।

मोदी सरकार इन कुछ ख़ास ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल्स की सच्चाई से घबरा गयी है, जैसे – दि वायर, दैनिक आज, बोलता यूपी, जनपोस्ट, कैरावन मैगज़ीन, बीबीसी, दि क्विंट, दि हिन्द, हिंदी पोस्ट, डेली टुडे, KHABAR.NDTV, National Dastak आदि।

इस कॉपी में लिखा है कि अब तक ऑनलाइन मीडिया वेबसाइट्स और न्यूज पोर्टल्स के लिए कोई गाइडलाइन्स नहीं हैं। इसलिए सरकार ने एक कमेटी बनाई है जोकि डिजिटल मीडिया के लिए नियम बनाएगी। मंत्रालय द्वारा बनाई इस कमेटी में 10 सदस्य होंगे। इन सदस्यों में चीफ एग्जीक्यूटिव और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, न्यूज ब्रॉडकास्टर एसोसिएशन, इंडियन ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन के प्रतिनिधि भी होंगे।

आपको बता दें कि स्मृति ईरानी ने कहा था कि सरकार के सामने यह चुनौती है कि हम ऐसी सुरक्षित पॉलिसी बनाएं जोकि बोलने की आजादी के अधिकार को स्पष्ट कर सके लेकिन हम लोगों को दंगा भड़काने का भी अधिकार नहीं दे सकते हैं।

गौरतलब है कि फेक न्यूज पर सोमवार देर रात जारी दिशानिर्देशों को पीएम नरेंद्र मोदी ने महज 16 घंटे बाद ही पलट दिया था। उन्होंने न सिर्फ इन्हें वापस लेने के निर्देश दिए थे बल्कि यह भी कहा था कि ऐसे मामलों पर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) और न्यूज ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन (बीसीए) जैसी संस्थाओं को ही फैसला लेना चाहिए। इसके बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दिए गए दिशानिर्देशों को वापस ले लिया था।

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