ये कश्मीर नहीं चंड़ीगढ़ के “पत्थरबाज” हैं और ये लड़के तथाकथित “मुस्लिम” आतंकी नहीं “हिन्दू” उन्मादी हैं !

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   ना तो यहाँ कोई आतंकी पकड़ा गया है, ना ही ये ‘पत्थरबाज’ मुस्लिम हैं और ना ही कश्मीरी    हैं,क्या ये ‘पत्थरबाज’ राष्ट्रवादी है ?

चंडीगढ़ : चौकिये मत पर घबराइए जरूर,यह सोचकर की अब हमारा देश किस दिशा में जा रहा है क्योंकि ऐसी घटना का चलन अब हमारे देश में आम सा हो चला है,या ये कहें कि अब हमारे देश के विद्यालयों में गणित और विज्ञान विषयों की जगह “पत्थरबाजी” पढ़ाई जाने लगी है क्योंकि ऐसी ही कुछ घटना हमने कुछ ही दिन पहले कश्मीर में देखी थी,जहाँ इसी तरह वहां भी युवा “पत्थरबाजी” कर रहे थे। हाँ फ़र्क़ बस इतना है कि कश्मीर की घटना को अंजाम देने वाले तथाकथित दहशतगर्द,देशद्रोही और आतंकी “मुस्लिम धर्म” के लड़के थे और वहीँ चडीगढ़ में ताबड़तोड़ “पत्थरबाजी” करने वाले तथाकथित राष्ट्रवादी लोग थे, जिनमे कुछ “सिख धर्म” से और कुछ “हिन्दू धर्म” से थे पर धर्म के ठेकेदारों ने उनको आतंकी नहीं उन्मादी लड़के बताया है। क्या यही राष्ट्रवाद है ??????

शिक्षा के मंदिर में कल वो हुआ जो होना नहीं चाहिए था। पुलिस और छात्र आपस में भिड़ गए। जिसमें लाठी-डंडे, वाटर कैनर, पत्थर, हवाई फायरिंग, सभी का प्रयोग किया गया।चंडीगढ़ के पंजाब यूनिवर्सिटी में फीस वृद्धि को लेकर चल रहा आंदोलन नौवें दिन उग्र हो गया। मंगलवार को जहां छात्रों ने वीसी कार्यालय का घेराव कर आफिस में जबरन घुसने की कोशिश की, वहीं छात्रों को रोकने के लिए पुलिस को छात्रों पर सख्ती करनी पड़ी। जिसके चलते छात्रों और पुलिस के बीच जमकर हिंसा छिड़ गई।
इस हिंसा में करीबन चालीस छात्र व पुलिस कर्मी जख्मी हो गए। कुछ छात्र बचने के लिए पीयू कैंपस स्थित एक गुरुद्वारा साहिब में भी घुस गए। वहां पौने तीन घंटे बाद जिला बार एसोसिएशन ने मध्यस्थता कर गुरुद्वारे में शरण लेने वाले 38 छात्रों का पुलिस को सरेंडर करवाया। देर शाम तक पीयू में तनाव की स्थिति बनी रही।

बता दें कि 26 मार्च को पीयू सीनेट की बैठक में विभिन्न कोर्सों की फीस में भारी वृद्धि के प्रस्ताव के बाद पीयू में सक्रिय 11 छात्र संगठनों ने आंदोलन को आह्वान किया था और 3 अप्रैल से इस आंदोलन को शुरू कर दिया गया। इसी आंदोलन की कड़ी में मंगलवार को संगठनों की ज्वाइंट स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी की ओर से पीयू में बंद का आह्वान किया गया था। जिसके चलते पीयू बंद की शुरूआत छात्रों के रोष मार्च से की गई।


छात्रों का ये मार्च पीयू कैंपस में घूमता हुआ वीसी कार्यालय पहुंच गया। लेकिन पुलिस ने वीसी कार्यालय के मुख्य एंट्रेस पर बैरिगेट्स लगाकर जबरदस्त किलेबंदी की हुई थी। दरअसल, छात्र यहां वीसी को अपना मांग पत्र देना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने छात्रों को इसकी अनुमति नहीं दी। लिहाजा प्रदर्शनकारी छात्र मुख्य गेट से वापस लौट गए।

लेकिन थोड़ी ही देर बाद अचानक छात्र संगठनों के सदस्य वीसी कार्यालय के पीछे स्थित यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ कैमिकल इंजीनियरिंग एंड टेकभनोलॉजी (यूआईसीईटी) विभाग से निकलकर वीसी कार्यालय के पिछले गेट से आफिस परिसर में एंट्री कर गए। छात्रों की वीसी कार्यालय में पिछले गेट से अचानक एंट्री देखकर पुलिस भी दंग रह गई। खैर, छात्रों ने वहां धरना देते हुए पीयू प्रशासन के खिलाफ तीखी नारेबाजी की और वीसी से मुलाकात करने की जिद पर अड़ गए।

लेकिन सवा घंटे तक जब वीसी की ओर से बातचीत का कोई न्यौता नहीं आया, तो खफा छात्रों ने वीसी कार्यालय में ही जबरन घुसने की कोशिश की, बस इसी दौरान वहां जमकर हंगामा हो गया। पहले तो पुलिस बल प्रयोग कर छात्रों को वीसी कार्यालय से दूर करती रही, लेकिन जब छात्र नहीं माने तो पुलिस ने छात्रों पर वॉटर कैनर वैन से पानी की तेज बौछारें बरसा दी।

इससे छात्र और नाराज हो गए और छात्रों ने वहीं वीसी परिसर के बगीचे में लगे पत्थर, ईंटे और गमले उठाकर पुलिस पर ही बरसाने शुरू कर दिए। भड़के प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस की वॉटर कैनर वैन भी पथराव से तोड़ दी। छात्रों की इस उग्र आंदोलन को देखते हुए जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने छात्रों पर डंडे बरसा दिए। इस दौरान पुलिस ने भी छात्रों पर पथराव शुरू कर दिया। लेकिन स्थिति बेकाबू होती देख पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े, जबकि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग भी की। इसके बाद तो पुलिस छात्रों पर एकदम से हावी हो गई। पुलिस ने छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटना शुरू कर दिया।
इसी दौरान पुलिस पीयू के यूआईसीईटी विभाग में पहुंच गई और यहां भी एक लैब में मौजूद छात्रों को पुलिस ने बाहर निकालकर बेरहमी से पीटा। इस दौरान वहां मौजूद टीचिंग स्टाफ और प्रेक्टिकल में व्यस्त छात्रों ने आरोप लगाते हुए कहा कि ये पुलिस की ज्यादत्ती है, क्योंकि पुलिस ने यहां उन छात्रों को भी पीटा, जो आंदोलन का हिस्सा नहीं थे। यूआईसीईटी विभाग में ही पुलिस ने मीडिया कर्मियों पर भी डंडे बरसाए, जिस दौरान तीन मीडिया कर्मी भी घायल हुए।
दूसरी ओर, पुलिस से बचते हुए कुछ छात्र पीयू स्थित श्री मुक्तसर साहिब गुरुद्वारा परिसर में जो घुसे। पुलिस ने भी इस गुरुद्वारे को पूरी तरह से घेर लिया और पौने तीन घंटे बाद गुरुद्वारे से 38 छात्रों का जिला बार एसोसिएशन के प्रधान व अन्य वकीलों की मौजूदगी में सरेंडर करवाया गया। पुलिस ने इस मामले में आंदोलनकरी छात्रों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर कुछ छात्रों को हिरासत में ले लिया है।

वीसी बोले, गुमराह हुआ आंदोलन !

पंजाब यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर अरूण ग्रोवर ने इस आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फीस वृद्धि के खिलाफ छात्रों का आंदोलन अब गुमराह हो चुका है। वीसी ने कहा कि फीस वृद्धि आंदोलन की आड़ में छात्र नेता अब अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं। उनके अनुसार जब छात्रों को आश्वस्त किया जा चुका है कि फीस वृद्धि पर दोबारा मंथन के लिए कमेटी का गठन हो चुका है और पीयू भी इस पर गंभीर है, तो मेरे ख्याल से ऐसे आंदोलनों की जरूरत ही नहीं है। उनके अनुसार यूनिवर्सिटी छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर ही अपना फैसला लेगी।

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