कारगिल में शहीद हुये मुकेश राठौड़ एकमात्र गुजराती हैं, वहीं ये भी सत्य है कि गुजरात के युवा फौज में कम जाते हैं !

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गुजरात : अहमदाबाद के मेघाणीनगर में रहने वाले मुकेश राठौड़ कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले एकमात्र गुजराती थे,जिनके शहीद होने पर तत्कालिन उपमुख्यमंत्री लाल कृष्ण आड़वानी शहीद की अस्थियाँ लेकर स्वयं शहीद मुकेश राठौड़ के घर अहमदाबाद पहुँचे थे । शहीद मुकेश राठौड़ का दाम्पत्य जीवन केवल डेढ़ साल रहा । मुकेश जब शहीद हुए थे, तब उनकी पत्नी राजश्री गर्भवती थीं। आज उनका बेटा मृगेश 18 साल का है। मृगेश को अपने पिता के बारे में 8 साल बाद पता चला कि वे शहीद हुए हैं।

उनके शहीद होने के बाद मृगेश का जन्म हुआ था। मृगेश जब कुछ बड़ा हुआ, तो वह अपने पिता के बारे में जब भी मां से पूछता, तो मां रोने लग जाती। उसे समझ में नहीं आता कि पिता के बारे में पूछने पर आखिर मां रोने क्यों लगती है? जब मृगेश सेकेंड क्लास में पढ़ रहा था, तो उसने ध्यान दिया कि उसकी डायरी में पिता के नाम के आगे (Martyr) मार्टियर लिखा हुआ है। उसे इस शब्द का मतलब नहीं मालूम था। मैंने डिक्शनरी में उसका मतलब ढूंढा, जहां लिखा था शहीद, तब मैंने जाना कि मेरे पिता शहीद हुए हैं। फिर मैंने घर आकर चुपके से एलबम में पापा की तस्वीरें देखीं। मुझे बहुत अच्छा लगा, पापा नहीं हैं तो क्या हुआ। पर मैं तो एक शहीद का बेटा हूं। इस पर मुझे गर्व हुआ। हाल ही में मैं मां के साथ कारगिल गया था, वहां जाकर देखा कि पापा ने किस तरह से पाकिस्तानी सैनिकों से मुकाबला किया था। वहीं शहीद की पत्नी राजश्री बेन ने कहा कि मुझे गर्व है मैं शहीद की विधवा हूं,मैंने उनके साथ केवल डेढ़ साल ही गुजारा, पर उतने समय में ही मैंने पूरी जिंदगी जी ली। उन्होंने देश के लिए जान दी है। मुझे उन पर गर्व है।

परिवार ने मुकेश को आखिरी बार 4 मई 1999 को देखा था !

मुकेश को सबने आखिरी बार 4 मई 1999 को देखा था। 24 मई को एक संदेश आया, जिससे पता चला कि मुकेश शहीद हो गए हैं। 14 जून 2001 को हाईकोर्ट के पास पेट्रोल पंप का उद्घाटन हुआ,अहमदाबाद शहर में एक ऐसा पेट्रोल पंप है, जिसे लोग कारगिल पेट्रोल पंप के नाम से जानते हैं। यह पेट्रोल पंप अहमदाबाद के शहीद मुकेश राठौड़ के नाम से है। इस समय शहीद के भाई पेट्रोल पंप चलाते हैं।

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