महाभारतकाल के बाद महिला के अपमान की जिम्मेदार बनी मोदी सरकार, शहीद की पत्नी ने कटाये केश !

0
8

 

करनाल : देश में अच्छे दिन का वादा लेकर सत्ता में आयी मोदी सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है फिर चाहे देश की आतंरिक सुरक्षा का मामला हो या गरीबी और बेरोजगारी का मामला हो। आज जहाँ देश की सीमा पर रोजाना सैनिक शहीद हो रहे हैं, वहीँ मोदी सरकार भाषणबाजी की जगह कुछ नहीं कर रही है, यहाँ तक कि शहीद सैनिकों के परिवारों के लिए भी कोई उचित प्रबंध नहीं है जिसके कारण शहीदों के परिवार बड़ी कठिनाईओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे ही एक शहीद परिवार की पीड़ा सामने आयी है, जो देश की रक्षा में प्राणों की आहूति देने वाले शहीद बलवंत सिंह का 8 वर्षीय बेटा और उसकी माँ है।

8 वर्षीय बेटे के रुंधन को देखकर प्रत्यक्षदर्शी लोगों की आँखें नम हो गयी !

मां प्लीज! आप नहीं। देखो, मैंने अपने बाल कटवा लिए हैं। आप रहने दो। उन्हें समझना होगा तो इससे ही समझ जाएंगे। नहीं मां। मेरी प्यारी मां। तेरे बाल बहुत अच्छे हैं। इन्हें कत्ल मत करा। मैं आपसे कुछ नहीं मांगूंगा। केश कत्ल कराने की कीमत पर हमें नहीं चाहिए आपकी पक्की नौकरी। हम गरीबी में ही जीवन काट लेंगे। मां आप रहने दो…। अंकल आप नहीं..। मेरी मां को यहां से उठा दो। कोई है, जो मेरी बात मान ले।

कलयुग का मोदीकाल और द्वापर के महाभारतकाल में हुआ किसी महिला का ऐसा अपमान !

बेबसी, लाचारी, गुस्सा, दर्द और तकलीफ से भरे बाकी शब्द उस मासूम के रुंधे गले में फंस कर रह गए। वह इस कदर बिलख पड़ा कि एक बार तो उसकी माता मैना के केश कत्ल करने वाले के हाथ भी कांप गए, लेकिन …। बाकी के शब्द इस बालक की आंखों रास्ते बह निकले। कुछ न करने की बेबसी को मुट्ठी बांधे बिलखते नन्हे मासूम को देख वहां हर आंखों में अश्रुधारा बह निकली। साथ में गुस्से से लाल भी थी। चेहरे पर सरकार के खिलाफ नाराजगी साफ झलक रही थी।

आठ साल का चिराग देश की रक्षा में प्राणों की आहूति देने वाले शहीद बलवंत सिंह का बेटा है। उसकी माता महेंद्रगढ़ के गांव कमानियां निवासी मैना यादव सिरसा जिले के रतिया हलके के गांव बनी के सरकारी स्कूल में गेस्ट टीचर है। मैना गेस्ट टीचर को नियमित करने व समान काम-समान वेतन के लिए करनाल में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए बेटे को साथ लेकर पहुंची थीं।

शहादत के बाद सारे वादे भूले प्रधानमंत्री मोदी और उनके नेता, विकलांग पत्नी मदद की जगह मिली ठोकरें !

शहीद बलवंत यादव की पत्नी मैना यादव ने बताया कि उसका पति देश की सीमा पर शहीद हो गया। शहादत के वक्त तो कई नेता घर पहुंचे थे। कई घोषणाएं की गई थीं, लेकिन बाद में सब भूल गए। नौकरी के लिए उन्होंने उम्मीद की हर दहलीज पर दस्तक दी, लेकिन कहीं कोई न्याय नहीं मिला। इस वजह से उन्हें रयह कदम उठाना पड़ा। मैना ने बताया कि एक महिला की ओर से केश कत्ल करना बहुत दुखद है, लेकिन मजबूरीवश उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है, क्योंकि इसके सिवाय कोई चारा भी नहीं है।

शहीद का बेटा बोला अगर मैं बड़ा होता तो माँ के बाल कटने से बचा लेता !

मासूम चिराग ने बताया कि यदि वह बड़ा होता तो अपनी मां अपने केश कत्ल न कराने पड़ते। वह चाहे कुछ भी कर लेता, लेकिन यह नौबत न आने देता। इस वाकये ने बालक की सारी मासूमियत छीनकर उसे उम्र से काफी बड़ा बना दिया। वह ज्यादा बात तो नहीं कर पा रहा था, लेकिन हर किसी को ऐसे देख रहा था, मानो यह बोल रहा हो- आखिर मेरी मां का कसूर क्या है?

2016 में शहीद हुए थे बलवंत यादव, तब से लगातार शहीद का परिवार हो रहा परेशान !

महेंद्रगढ़ के गांव कमानियां निवासी बलवंत यादव वर्ष 2016 में कश्मीर में शहीद हुए थे। अपने पीछे वह पत्नी मैना यादव और इकलौता बेटा चिराग यादव छोड़ गए थे। मैना उनके शहीद होने से पहले से सिरसा के स्कूल में गेस्ट टीचर कार्यरत थीं।

PM आवास के बाहर घास खाते किसान तो आपने देखे होंगे, आज ये सिर मुंड़वाये शिक्षिकाओं को भी देखिये !

Loading...