योगी सरकार की नाकामी से हुई 2 छात्राओं की मौत, उनके शोक में ‘भोले की काशी’ नहीं मनायेगी होली !

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वाराणसी : उत्तर प्रदेश में अन्ना सांड़ और राह चलते इंसानी मनचलों के चलते लड़कियों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। यूँ तो यह क्षेत्र हमारे देश के प्रधानमंत्री का है पर उनका यहाँ से सांसद होना या ना होना एक सामान है, कहने को तो वह काशी को जापान का क्योटो बनाने जा रहे थे। खैर अब काशी भी समझ चूका है कि वो भी एक जुमला ही था।

हाल ही में बाबा भोलेनाथ की धार्मिक नगरी काशी में हुई 2 दर्दनाक घटनाओं ने लोगों को इतना झकझोर के रख दिया कि, लोगों ने अपना सबसे पसंदीदा त्यौहार होली ना मनाने का फैसला ले लिया। वैसे ये तो इस नगर की विशेषता है कि अगर काशीवासी किसी की खुशी में झूम के शामिल होते हैं तो उन्हें दूसरे के गम में खुद गमज़दा होना भी आता है। यह वो काशी है जहां शव को कांधा लगाना पुण्य माना जाता है। यहाँ लोगों में इक होड़ सी लगती है कि आज तक कौन कितने शवों को कांधा देकर श्मशान तक गया। काशी कितनी भी बदल जाए, पर वह परंपरा अब भी जीवित है। उस परंपरा के वाहकों की कमी नहीं है।

पूर्वांचल किसान यूनियन के नेतृत्व में काशी में होली नहीं मनाई जाएगी !

पूर्वांचल किसान यूनियन की कमेटी ने तय किया है कि इस बार वे होली नहीं मनाएंगे। कारण इसी काशी की प्रशासनिक दुर्व्यवस्था की शिकार हो कर एक नहीं दो छात्राओं की जान चली गई। एक नाबालिग छात्रा श्रेया ने स्कूल के ही शोहदे की छेड़खानी से परेशान होकर खुदकुशी कर ली, तो दूसरे की जान भी योगी सरकार की नाकामियों की वजह से ही चली गई। वहीँ एक और घटना ने लोगों का गुस्सा और बढ़ा दिया जब एक चौथी कक्षा की छात्रा के साथ छेड़खानी का प्रयास किया गया। ऐसी दुःख की घड़ी और आपराधिक माहौल में पूर्वांचल किसान यूनियन ने सरकार के खिलाफ अपना विरोध जताते हुए और इंसानियत के नाते संजीदगी दिखाते हुए काशी में होली ना मानाने का निर्णय लेकर काशी की परंपरा को जीवंत किया है।

सरकार की नाकामी के चलते BHU छात्रा निधि यादव की दर्दनाक मौत और सातवीं कक्षा की छात्रा की खुदखुशी ने काशीवासियों के दिलों को हिला दिया !

प्रधानमंत्री मोदी को अपने क्षेत्र की नहीं है कोई परवाह !

मालूम हो कि हाल के दिन काशी के लिए काफी दुःखद रहे। एक सातवीं की छात्रा श्रेया ने इसलिए खुदकुशी कर ली कि उससे बड़ी कक्षा का एक छात्र रोजाना उसे छेड़ता रहा। विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की। यह उसे इतना नागवार गुजरा कि उसने जान ही दे दी। इस छात्रा की चिता की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि एक चौथी की छात्रा के साथ उसी स्कूल के बड़ी क्लास के एक छात्र ने छेडछाड़ का प्रयास किया।
तीसरी घटना है BHU छात्रा निधि यादव की दर्दनाक और हृदय विदारक मौत की । इसी भाजपा सरकार ने घोषणा की थी वो शहर के बाहर नंद गांव बसाएंगे। शहर के छुट्टा पशुओं को वहां रखा जाएगा। वैसे भी यह काम नगर निगम का है। नगर निगम के पास इन छुट्टा पशुओं को रखने के लिए कांजी हाउस हैं। लेकिन नगर निगम इन छुट्टा पशुओं को पकड़ने की जहमत या तो उठाता नहीं, उठाता भी है तो केवल गरीबों और आम नागरिकों के ऐसे दुधारु जानवरों को पकड़ता है जिससे मोटी वसूली हो सके। ऐसे में एक दिन एक सांढ़ ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की मेधावी छात्रा निधि यादव की जान ले ली।

इन्ही घटनाओं के कारण ही पूर्वांचल किसान यूनियन ने फैसला किया कि श्रेया जायसवाल और निधि यादव समेत कई बालिकाओं की असामयिक मौत से वे खुद को आहत महसूस करते हैं। लिहाजा रंगों का पर्व होली नहीं मनाएंगे और काशी के समस्त लोगों से भी अपील करते हैं कि वह हमारा साथ दें।

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