मोदी सरकार ने किसानों की कर्जमाफी रद्द की, योगी आदित्यनाथ का प्रस्ताव किया खारिज !

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लखनऊ, उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी रैलियों में चीख चीख कर किसानों से वोटों के लिए भीख मांगी थी। उन्होंने किसानों से वादा किया था तुम मुझे वोट दो मैं तुम्हारा कर्ज माफ़ करूंगा। उत्तर प्रदेश का किसान वर्ग 15 लाख की तरह कर्ज मुक्ति के जुमले में फंस गया और बीजेपी को बम्पर वोट दे दिया। उत्तर प्रदेश में सरकार बनने के बाद अब केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने से अपना हाथ पीछे खींच लिया है।

केंद्र सरकार के झांसे से किसानों की कर्जमाफी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मोदी सरकार ने किसानों के कर्जमाफी के लिए रकम के इंतजाम में हाथ बंटाने से इंकार कर दिया है। ऐसे में योगी सरकार के सामने कर्जमाफी के लिए 36 हजार करोड़ का इंतजाम करना मुश्किल है। जिसके चलते यूपी की योगी सरकार ने दावा किया है कि वो अपने संसाधन से चरणबद्ध तरीके से किसानों का कर्ज माफ करेंगे, लेकिन खस्ताहाल आर्थिक हालात में धन का जुगाड़ कैसे होगा, इस सवाल का जवाब योगी सरकार के पास नहीं है। सरकार ने कहा है कि खर्च घटाकर रकम जुटाई जाएगी, लेकिन किस मद में खर्च घटेंगे- यह अभी तय नहीं है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्र की मोदी सरकार को किसानों की कर्जमाफी के लिए रकम जुटाने के तीन सुझाव भेजे थे, जिसे केंद्र की मोदी सरकार ने खारिज करते हुए हस्तक्षेप करने अथवा गारंटी लेने से मना कर दिया।

यूपी में सरकार बनने के बाद भाजपा की योगी सरकार ने आनन फानन में मीडिया की वाहवाही बटोरने के लिए पहली कैबिनेट बैठक में किसानों की कर्जमाफी का ऐलान कर दिया था। इसी दौरान केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को सख्त संदेश भेजा कि किसी भी किस्म की कर्जमाफी के लिए केंद्र आर्थिक मदद नहीं देगा, बल्कि राज्यों को खुद संसाधन जुटाने होंगे। ऐसे में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 36 हजार करोड़ रुपए का इंतजाम करने के लिए केंद्र सरकार के पास पहल करते हुए अप्रैल महीने में प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव की भनक भी नहीं लगी।

जिस प्रस्ताव में प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2017-2018 की केंद्रीय मदद में 36,529 करोड़ रुपए बतौर एडवांस देने को कहा था। योगी ने प्रस्ताव में लिखा था कि ऐसा मुमकिन नहीं होने पर यथासंभव एडवांस केंद्रीय ग्रांड मुहैया कराई जाए, शेष धन का इंतजाम बांड के जरिए कर लिया जाएगा। तीसरे और अंतिम सुझाव के तौर पर मुख्यमंत्री ने लिखा था कि अग्रिम वित्तीय वर्ष की केंद्रीय ग्रांड से एडवांस संभव नहीं है तो किसान राहत बांड के जरिए धन की व्यवस्था संभव है। तीसरे सुझाव के साथ योगी आदित्यनाथ ने आग्रह किया था कि किसान राहत बांड जारी करने की स्थिति में वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए सालाना कर्ज लेने की सीमा में किसान राहत बांड से जुटाई गई राशि को शामिल नहीं किया जाए।

उत्तर प्रदेश में किसानों की कर्जमाफी के लिए धन के इंतजाम के विषय में केंद्र सरकार ने यूपी सरकार से कोई सवाल-जवाब नहीं किया था। केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने गुरुवार को एक सवाल के जवाब में प्रस्ताव का खुलासा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को स्पष्ट बता दिया है कि किसान कर्जमाफी अथवा किसी अन्य किस्म की कर्जमाफी के लिए राज्य को संसाधन अपने बूते ही जुटाने होंगे। उन्होंने कहाकि केंद्र सरकार ने ऐसा कोई प्रस्ताव बनाकर भेजने के लिए उत्तर प्रदेश से नहीं कहा था, संभवत: योगी आदित्यनाथ ने अपने विवेक से यह प्रस्ताव भेजा है। रुपाला ने कहाकि कर्जमाफी के लिए रकम का इंतजाम खुद करने के लिए उत्तर प्रदेश से कहा गया है।

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