100 की स्पीड पर पर भी नहीं छलकेगा गिलास का पानी, देश का सबसे बेहतरीन एक्सप्रेस वे, लागत केंद्र सरकार की रोड से भी कम, जाने क्या है खास

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लखनऊ, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट एक्सप्रेस वे आपके सफ़र के लिए तैयार हो गया है। जिस पर 100 की स्पीड में चलती हुई आपकी कार में पानी का भरा ग्लास भी नहीं छलकेगा।

देश के दूसरे एक्सप्रेस वे से खास लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे की गुणवत्ता जांचने के लिए निकले परियोजना के प्रभारी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नवनीत सहगल ने शुक्रवार को खुद ही यह प्रयोग करके देख लिया।

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अति महत्वाकांक्षी परियोजना है। अखिलेश यादव का मानना है कि विकास का पहला चरण वहां की सड़क होती है। आगरा और लखनऊ को इस एक्सप्रेस वे से जोड़कर अखिलेश वास्तव में लखनऊ को सीधे दिल्ली से जोड़ रहे हैं। यूपी की राजधानी का देश की राजधानी से जुड़ाव इस तरह से कराया गया है कि आरामदायक सफ़र संभव हो सके।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खुद एक्सप्रेस-वे के लाइव रियलिटी टेस्ट का विडियो अपने ट्विटर अकाउंट और फेसबुक अकाउंट से साझा किया है।

यहाँ देखें विडियो

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस देश का पहला ऐसा एक्सप्रेस वे है जिसके लिए किसानों ने बगैर किसी लड़ाई झगडे के अपनी ज़मीनें दे दीं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस शानदार सड़क को बनाते वक़्त किसानों के हित को ही सर्वोपरि रखा। इस एक्सप्रेस वे पर किसानों के लिए मंडियां बनाई जा रही हैं. इन मंडियों के ज़रिये किसान अपनी मेहनत की वाजिब कीमत हासिल कर सकेंगे।

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे देश का पहला एक्प्रेस वे है जो न सिर्फ बतौर सड़क शानदार अनुभव देगा बल्कि इस सड़क को फाईटर प्लेन ज़रुरत पड़ने पर रनवे के तौर पर भी इस्तेमाल करेंगे। इस सड़क पर फाईटर प्लेन की टेस्टिंग कराई जा चुकी है।

एक्सप्रेस वे की लागत और स्ट्रक्चर

इस एक्सप्रेस वे की लागत की तुलना करें तो सबसे बड़ी बात यह है कि केन्द्रीय भूतल सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी लखनऊ की जो आउटर रिंग रोड बनवाने जा रहे हैं उसकी लगत 55 करोड़ रूपये प्रति किलोमीटर आयेगी जबकि आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे की लागत इससे काफी कम है।

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे में सड़क निर्माण की लगत 30 करोड़ रूपये प्रति किलोमीटर आई है। बावजूद इसके गुणवत्ता के मामले में कोई कम्प्रोमाइज़ नहीं किया गया है। एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए जिन किसानों की ज़मीनों का अधिग्रहण हुआ उस भू-अधिग्रहण पर 2548 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस लागत को जोड़ने पर 302 किलोमीटर लम्बे एक्सप्रेस-वे की प्रति किलोमीटर लागत 38 करोड़ रुपए हो जायेगी। वह भी एनएचएआई के प्रति किलोमीटर 55 करोड़ की लागत से काफी कम है।

302 किलोमीटर की लम्बाई वाली यह सड़क देश की सबसे लम्बी 6 लेन एक्सेस कंट्रोल ग्रीन-फील्ड एक्सप्रेस-वे है। खराब मौसम और बाढ़ जैसी कठिनाइयों के बावजूद देश की यह सबसे बड़ी ग्रीन-फील्ड परियोजना 22 महीनों के रिकॉर्ड समय में तैयार होने जा रही है।

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अति महत्वाकांक्षी परियोजना होने की वजह से अधिकारियों के लिए इसका निर्माण बहुत बड़ी चुनौती थी। एक्सप्रेस वे के रास्ते में 5 नदियों के अलावा इस सड़क पर कुल 900 स्ट्रक्चर्स हैं जिनमें 13 बड़े पुल, 52 छोटे पुल, 4 रेल पुल, 132 फुट-ओवर पुल और 59 अंडर-पास शामिल हैं।

4 राष्ट्रीय राजमार्गों और 2 राजमार्गों को जोड़ने वाले इस विशाल प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदारी यूपीडा के सीईओ नवनीत सहगल के हवाले थी जिनकी लगातार मानिटरिंग के वजह से यह परियोजना रिकार्ड समय में पूरी हुई। इस परियोजना में एक तरफ अखिलेश का पर्यावरण प्रेम नज़र आता है तो दूसरी तरफ रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी यहाँ नज़र आता है।

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