जहां चुनाव से पहले पकड़ी गयी थी कमल उगलने वाली मशीन, EVM बदलने पर नहीं जीत पाई बीजेपी

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EVM घोटाला – अटेर विधानसभा सीट पर चुनाव से पहले पकड़ी गयी थी कमल उगलने वाली मशीन, EVM बदलने पर नहीं जीत पाई बीजेपी

 

लखनऊ, मध्य प्रदेश की अटेर विधानसभा सीट बीजेपी हार गई है। ये भिंड की वही विधानसभा सीट है जहां पर EVM मशीन के डेमो पर कोई भी बटन दबाने पर मशीन कमल की ही पर्ची निकाल रही थी। EVM मशीन में गड़बड़ी का मुद्दा दैनिक आज ने उठाया था। जो वायरल हो गया था। यही नहीं इस पर अरविन्द केजरीवाल, अखिलेश यादव और मायावती ने भी आवाज उठाई थी। ये मामला चुनाव आयोग तक पहुँच गया था। जिसकी वजह से उप चुनाव के दौरान वो मशीन बदल दी गई जिसका नतीजा ये हुआ कि बीजेपी अटेर विधानसभा का चुनाव हर गई।

आपको ये बता दें कि ये मशीनें हालिया उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में इस्तेमाल हुईं थी। अटेर विधानसभा उप चुनाव में जीत से उत्साहित कांग्रेस को अब खुलकर यह आरोप लगाने का मौका मिल गया है कि अगर वह सजग नहीं रहती तो भाजपा यहां भी हेर फेर करती और जीत जाती।

कांग्रेस प्रत्याशी हेमंत कटारे वोटों की गिनती होने तक ECM मशीनों के इर्द गिर्द मंडराते रहे थे। उन्हे शक था कि भाजपा मौका पाते ही प्रशासन की मदद से मशीनों में कमल का फूल खिला लेती। मशीनों में हेराफेरी का मुद्दा अब उम्मीद से ज्यादा तूल पकड़ रहा है और सभी गैर भाजपाई दल बड़े पैमाने पर इनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं।

अटेर की जीत से कांग्रेस को 2018 में वापसी की आस बंधी है और कहा यह भी जाने लगा है कि कांग्रेसी वाकई एकजुट हो जाएं और सिंधिया को सीएम प्रोजेक्ट कर दिया जाये, तो बात बन भी सकती है, क्योंकि भाजपा और शिवराज सिंह का तिलस्म अब आंशिक रूप से टूटने लगा है पर मतदाता के सामने कोई सशक्त विकल्प न होने से वे बैठे बिठाये इसका फायदा उठा रहे थे।

अटेर से कांग्रेस के हेमंत कटारे ने महज 857 वोटों से जीत दर्ज कर भाजपा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को करारा झटका दे दिया है। अटेर का मुकाबला दरअसल में शिवराज सिंह बनाम ज्योतिरादित्य सिंधिया हो गया था, क्योंकि इन दोनों ही दिग्गजों ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था।

चुनाव प्रचार के दौरान शिवराज सिंह ने एक तरह से सिंधिया राजघराने को गद्दार करार दे दिया था, जिससे सिंधिया बेहद तिलमिलाए हुये थे। इस प्रतिष्ठित सीट को बनाए रखने ज्योतिरादित्य ने दिन रात एक कर दिया था और दलितों के घर जाकर अपने हाथ से रोटियां सेंककर न केवल खुद खाईं थी, बल्कि दलितों को भी खिलाई थी।

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