योगी,साध्वी व कंप्यूटर बाबा जैसे साधू-संत बने मंत्री, अब भारत इनके मंत्रों से बनेगा ‘डिजिटल इंडिया’ !

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भोपाल : भाजपा सरकार में अब वो दिन दूर नहीं जब आईआईटी इंजीनियर और डॉक्टर पकोड़े बेचेंगे, और साधू-संत,महात्मा,योगी,साध्वी जैसे लोग देश की सत्ता चलाएंगे। बता दें कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 5 बाबाओं को मध्य प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा दिया है। हालाँकि सरकार के इस फैसले के खिलाफ अब हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में याचिका दाखिल कर दी गई है। वहीं कांग्रेस ने भी इस फैसले पर सवाल उठाते कहा है कि बाबाओं को मंत्री का दर्जा देना शिवराज सरकार की कमजोरी को दिखाता है।

बता दें कि कंप्यूटर बाबा के साथ इंदौर के भय्यू महाराज, अमरकंटक (नर्मदा उद्गम) के हरिहरानंदजी, डिंडोरी के नर्मदानंदजी और पंडित योगेंद्र महंत को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य मंत्री का दर्जा दिया है। इसका आदेश राज्य सरकार की ओर से मंगलवार को जारी किया गया। इस फैसले के बाद से सरकार और मुख्यमंत्री के फैसले पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। रामबहादुर शर्मा नाम के एक व्यक्ति की ओर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उन्होंने राज्य मंत्री की संवैधानिकता को लेकर याचिका लगाई है। सरकार को इस फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।

मंत्री बने ये बाबा क्या प्रधानमंत्री मोदी के डिजिटल इंडिया मुहीम का हिस्सा हैं !

प्रधानमंत्री मोदी ने जहाँ एक तरफ ये बयान दिया कि पकौड़ा बेचना भी रोजगार है वहीँ दूसरी ओर इन बाबाओं को मंत्री बनवाकर ये साबित कर दिया कि भाजपा बाबाओं के मंत्रो के भरोसे ही भारत को डिजिटल इंडिया बनाने की सोच रही है। जबकि एक सरकारी आंकड़े के अनुसार मोदी सरकार के पिछले 4 साल के कार्यकाल के दौरान 26500 युवाओं ने और 18000 किसानों ने आत्महत्या की है।

गौरतलब है कि भाजपा ने कई साधू-संतों को मंत्री और मुख्यमंत्री तक बना रखा है, जिसमे प्रमुख रूप से यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, साध्वी उमा भारती, साध्वी निरंजन ज्योति, सतपाल महाराज आदि लोग प्रमुख रूप से पहले ही थे। जबकि अब 5 और बाबाओं के नाम मंत्री पद से जुड़ गए हैं।

मंत्री बने इन पांच संतों ने मुख्यमंत्री शिवराज की नर्मदा सेवा यात्रा कार्यक्रम को बताया था महाघोटाला !

बीते 28 मार्च को इंदौर के गोम्मटगिरि स्थित कालिका आश्रम में संतों की एक बैठक में एक अप्रैल से 15 मई तक ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ निकालने का निर्णय लिया गया था। यह भी तय हुआ था कि इस यात्रा के दौरान उन छह करोड़ 67 लाख पौधों की गिनती का काम होगा जो मुख्यमंत्री चौहान की नर्मदा सेवा यात्रा कार्यक्रम के तहत गत वर्ष दो जुलाई को लगाए गए थे। इन बाबाओं ने इस सरकारी मेगा शो को महाघोटाला करार दिया था।

इतना ही नहीं फैसले के कारण बाबाओं के रुख में भी अचानक बदलाव आया है। कल तक जिन पांचों संतों ने शिवराज सिंह चौहान द्वारा पिछले साल नर्मदा किनारे लगाए गए पौधों और अन्य विकास कार्यों की ‘पोल’ खोलने के लिए ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ शुरू करने का ऐलान किया था अब मंत्री पद की हैसियत मिलने के बाद इन्होंने अपनी पूर्व की घोषणा से कदम पीछे खींच लिए हैं। अब ये सभी बाबा जनजागरण करने की बात कर रहे हैं।

यह भी चर्चा है कि संत समाज द्वारा ‘नर्मदा घोटाला रथयात्रा’ के ऐलान के बाद सरकार के स्तर पर हलचल हुई और उसके प्रबंधकों ने 31 मार्च को मुख्यमंत्री शिवराज के साथ कंप्यूटर बाबा सहित तमाम संतों की बैठक करा दी। इसके बाद ही सरकार ने विभिन्न चिह्नित क्षेत्रों, खासकर नर्मदा किनारे के इलाकों में पौधरोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता सहित अन्य विषयों पर जनजागरण के लिए एक कमेटी गठित कर दी और इन बाबाओं को उसका सदस्य बनाकर राज्य मंत्री का दर्जा दे डाला।

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