दलित युवती का अपहरण कर किया बलात्कार इससे भी मन नही भरा तो बेच दिया

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इंदौर, मध्य प्रदेश में रेप की घटना कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। हाल ही में दलित समुदाय की अगवा नाबालिग लड़की को हवस की शिकार बनाये जाने के बाद उसको 70,000 रपये में खरीदा और बेचा गया। जिसको लेकर विशेष अदालत ने आज(26 अप्रैल) यहां शिक्षक समेत दो लोगों को उम्रकैद की सजा सुनायी।

वहीं, विशेष न्यायाधीश रेणुका कंचन ने दोनों आरोपियों पर भारतीय दंड विधान की धारा 363 अपहरण, धारा 370-4 नाबालिग लड़की की मानव तस्करी, धारा 372 वेश्यावृत्ति के लिये नाबालिग लड़की को बेचना और धारा 376 बलात्कार के साथ अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए यह सजा सुनायी।

बता दें कि विशेष लोक अभियोजक विशाल आनंद श्रीवास्तव ने संवाददाताओं को बताया कि दोनों पर जुर्म साबित करने के लिये अभियोजन पक्ष ने अदालत में 15 गवाह पेश किये। उन्होंने बताया कि शहर के एक निजी स्कूल के शिक्षक अरण गिरि ने शादी का झांसा देकर सहकर्मी नाबालिग लड़की को बाणगंगा क्षेत्र से 15 सितंबर 2012 को अगवा किया। इसके बाद उसे एक घर में रखकर उसके साथ बलात्कार किया।

वहीं, श्रीवास्तव ने बताया कि गिरि ने अगले ही दिन दलित समुदाय की लड़की को अपने तीन साथियों.. शंभू, भेरूसिंह और दुलेसिंह के हवाले कर दिया जिन्होंने राजस्थान ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया। बाद में तीनों ने लड़की को मंदसौर जिले में रहने वाले मनोज शर्मा को 70,000 रपये में बेच दिया।

उन्होंने आगे बताया कि शर्मा के घर रहने के दौरान जब पीडि़त लड़की ने खाना, पीना छोड़ दिया, तो शर्मा की मां ने पुलिस को मानव तस्करी के बारे में सूचना दी। इस पर पुलिस ने लड़की को शर्मा के घर से छुड़ाया। वहीं, मामले से जुड़े तीन आरोपी शंभू, भेरूसिंह और दुलेसिंह पुलिस की गिरफ्त से अब तक बाहर हैं।

Source Nationaldastak

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