NIA ने बंद की योगी सरकार के कथित PETN पाउडर की जांच, अखिलेश यादव का आरोप निकला सही !

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लखनऊ : देश की सुरक्षा व्यवस्था की सरेआम हँसी उड़वाने वाले योगी सरकार की जांच के फैसले को आखिरकार NIA को बंद ही करना पड़ा। बता दें कि यूपी विधानसभा में कथित पीईटीएन (पेंटा एरीथ्रिटाल टेट्रा नाइट्रेट) पाउडर मिलने की गलत खबर के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी है। एनआईए की ओर से कहा गया है कि शुरुआती जांच में जिसे खतरनाक प्लास्टिक विस्फोटक पीईटीएन बताया गया था, वह हैदराबाद फोरेंसिक लैब की जांच में क्वार्ट्ज पाउडर निकला।

जांच एजेंसी ने यह पता करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई कि उक्त पाउडर विधानसभा में कहां से पहुंचा। एनआईए के एसपी अतुल गोयल पिछले शुक्रवार को लखनऊ में थे और कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने के बाद दिल्ली लौट गए।

अखिलेश यादव ने योगी सरकार के इस षड़यंत्र पर पहले ही साधा था निशाना –

अखिलेश ने पाउडर वाले इस पूरे घटनाक्रम को योगी सरकार का षड़यंत्र बताते हुए कहा कि यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया कृत्य है क्योंकि योगी सरकार को विधानसभा के अंदर पूर्व विधयकों की एंट्री रोकनी थी, इसीलिए योगी सरकार ने मीडिया से लेकर सभी विधायकों और पूर्व विधायकों के पास निरस्त कर दिए थे और अब नए बना भी नहीं रही है जबकि वो पाउडर PETN विस्फोटक की जगह तो कुछ और ही निकला। गौरतलब है कि इस पाउडर के मिलने के बाद योगी सरकार की पुलिस ने योगी जी की जान को खतरा भी बता दिया था और जैश -ऐ-मोहम्मद का एक लेटर भी जारी करवा दिया था।

विधानसभा सत्र के दौरान 12 जुलाई को सीट नंबर 80 पर कुशन के नीचे संदिग्ध सफेद पाउडर मिला था। लखनऊ स्थित राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक श्याम बिहारी उपाध्याय ने शुरुआती जांच में इस पाउडर के खतरनाक विस्फोटक होने का दावा किया था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया था।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में संबोधन के दौरान इसे खतरनाक आतंकी साजिश बताते हुए पूरे मामले की जांच एनआईए से कराने की घोषणा की थी। इस बीच आगरा लैब से ही इस संदिग्ध पाउडर के पीईटीएन न होने की पुष्टि हो गई थी लेकिन सरकार की ओर से इस रिपोर्ट का खंडन किया गया।

केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला से जांच कराने के लिए सैंपल हैदराबाद भेजा गया। वहां से रिपोर्ट आती, इससे पहले एनआईए ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी। 25 जुलाई को दिल्ली से आई एनआईए टीम ने लखनऊ पहुंच कर जांच शुरू कर दी थी। इससे पहले एटीएस इस मामले की जांच कर रहा था।

निलंबित कर दिए गए थे लखनऊ लैब के उक्त निदेशक !

इस पूरे मामले में राज्य सरकार की फजीहत कराने में फोरेंसिक लैब लखनऊ के डायरेक्टर एसबी उपाध्याय का अहम रोल था। हैदराबाद स्थित केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला की जांच में उक्त पदार्थ को क्वार्ट्ज पाउडर बताए जाने के बाद गृह विभाग ने एसबी उपाध्याय को निलंबित कर दिया था।

उपाध्याय पर आरोप था कि उन्होंने एक्सपायरी किट से संदिग्ध पाउडर की जांच की और जल्दबाजी में उसे पीईटीएन बता दिया। साथ ही आगरा लैब की रिपोर्ट को दबाने और पुलिस व गृह विभाग के उच्चाधिकारियों को लगातार गुमराह करने का आरोप भी उन पर लगा था। इन आरोपों की जांच विजिलेंस के डीजी एचसी अवस्थी कर रहे हैं।

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