बिहार की राजनीती में जल्द होने वाला है बड़ा उलटफेर, उपचुनाव के बाद गिर सकती है नीतीश सरकार !

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पटना, बिहार की राजनीति पल – पल करवट बदल रही है, पहले 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने बीजेपी का साथ छोड़कर लालू प्रसाद यादव के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और फिर से मुख्यमंत्री बनने में कामयाबी हासिल की। पहले की ही तरह नीतीश कुमार ने एकबार फिर से पलटी मारते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया और एकबार फिर बिहार के मुख्यमंत्री बन गए। लेकिन इस बार नीतीश कुमार का पलटी मारना जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं को रास नहीं आया। जेडीयू के संस्थापक और पूर्व राज्यसभा सांसद शरद यादव ने नीतीश कुमार के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया।

शरद यादव के पार्टी से अलग होने के बाद पार्टी का एक धड़ा शरद यादव के साथ खड़ा है जिसमें पार्टी के कई विधायक भी शामिल हैं। लेकिन अभी विधायकों ने खुलकर पार्टी में नीतीश कुमार के खिलाफ विद्रोह नहीं किया है। लेकिन खबर है की जेडीयू के करीब 21 विधायक आरजेडी के संपर्क में है। जिसका एक नजारा अभी देखने को मिला जब जेडीयू के एक मुस्लिम विधायक ने पार्टी छोड़कर राजद में शामिल होने की घोषणा कर दी।

विधायक सरफराज आलम समेत 21 विधायक राजद के संपर्क में हैं इसका दावा राजद के विधायक भाई वीरेंद्र कर चुके हैं। राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता और मनेर से विधायक भाई वीरेंद्र ने दावा किया है कि एनडीए के 21 से ज्यादा विधायक राजद के संपर्क में हैं और ये सभी विधायक बकायदा तेजस्वी यादव से मुलाकात कर चुके हैं। हालांकि उन्होंने ये खुलासा नहीं किया कि ये विधायक कौन हैं और इन लोगों की कहां मुलाकात हुई है।

भाई वीरेंद्र ने बताया कि जदयू विधायक सरफराज अहमद का राजद में शामिल होना एक मात्र झांकी है, अभी पूरा खेल बाकी है। उन्होंने कहा कि ये सभी विधायक समय आने पर मीडिया के समाने आकर अपनी बात रखेंगें। राजनीति में समय का बहुत महत्व होता है। उन्होंने कहा कि एनडीए में नीतीश कुमार बेचारे बन गए हैं। वो संघमुक्त की बात करते थे और अब हाफ पैंट पहनने को तैयार हो गए हैं। उन्होंने कहा कि राजद के संपर्क में ऐसे विधायक हैं, जो राजद के वोट वैंक पर चुनाव जीत कर आए हैं। भाई वीरेंद्र ने कहा कि आने वाले समय में जदयू का नामोनिशान मिट जाएगा। पार्टी में भगदड़ मचनी तय हैं।

खबर है की 11 मार्च को होने वाले उपचुनाव के नतीजे आने के बाद बिहार की राजनीति किस करवट बैठेगी इस अंदाजा हो जाएगा। हो सकता है कि जेडीयू के 20 – 21 विधायक अपनी सदस्य्ता से इस्तीफा देकर राजद में शामिल हो जाए। ऐसी हालत में राजद बिहार की सिंगल लार्जेस्ट पार्टी होगी और नीतीश कुमार और बीजेपी सरकार अपना बहुमत खो चुकी होगी। इस लिहाज से यह उपचुनाव कई मायनों में अहम है जहां यह चुनाव बीजेपी और जेडीयू का बिहार में भविष्य तय करेगा तो वहीं तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता भी साफ करेगा।

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