कल तक ‘संघ मुक्त भारत’ का नारा देने वाले नीतीश कुमार, अब संघ की ही गोद में बैठकर दीक्षा ले रहे हैं !

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पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम एक समय विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में लिया जाता था,लेकिन राजनीति ने इस कदर करवट बदली कि आज वह फिर से अपने पुराने दोस्त नरेंद्र मोदी के साथी हो गए। महज़ 16 महीने पहले की ही बात है जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा से लड़ने के लिए ‘संघ मुक्त भारत‘ का नारा दिया था। तब नीतीश कुमार बिहार में लालू प्रसाद यादव के साथ गठबंधन सरकार चला रहे थे, लेकिन अब सत्ता का समीकरण ऐसा बदला कि आज नीतीश कुमार संघ (RSS) की राजनीतिक पार्टी “भाजपा” के साथ सत्ता में साझीदार हैं, इसलिए अब उनकी बोली भी बदल गई है और वह 16 महीने पहले दिए हुए अपने नारे “संघ मुक्त भारत” की जगह अपने कार्यकर्ताओं से मोदी-भागवत जिंदाबाद के नारे लगवा रहे हैं

बीते दिनों तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव का नाम घोटालों में सामने आने के बाद ही नीतीश कुमार ने महागठबंधन से नाता तोड़ लिया था और इसके बाद उन्होंने “आत्मा की आवाज सुनते हुए” भाजपा के साथ मिलकर जबरन सरकार बनाई,जिसमे केंद्र सरकार का पूरा सहयोग मिला। संघ मुक्त भारत का नारा देने के बाद से ये पहला मौका होगा जब नीतीश संघ प्रमुख से मुलाकात करेंगे। गौरतलब है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह के ऊपर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं तो क्या अबकी बार नीतीश कुमार जी की बोलने वाली “आत्मा आवाज नहीं” दे रही है ?

बीजेपी के साथ सरकार बनाने से भी बढ़कर संघ प्रमुख के साथ मंच शेयर करना कहीं न कहीं नीतीश के विपक्षियों के उस दावे की पुष्टि करता दिखता है जिसके अनुसार नीतीश बजाय विचारधारा के, विजेताओं की तरफ रहना पसंद करते दिखते हैं और किसी भी कीमत पर सत्ता में बने रहना चाहते हैं । राष्ट्रीय जनता दल के शिवानंद तिवारी इस पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं, “ये नीतीश की आखिरी राजनीतिक यात्रा होगी और इसके बाद उन्हें उनकी “आत्मा राजनीतिक मुद्दों पर कभी आवाज नहीं देगी।”

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