कर्नाटक चुनाव खत्म होते ही पीएम मोदी ने देश को दिया महंगाई का तोहफा, पेट्रोल हुआ 82 रूपये के पार !

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दिल्ली : देश की मोदी सरकार में हर चुनाव की वोटिंग पूरी होने के बाद ही, तेल कम्पनियाँ दाम बढाकर जनता
को महंगाई का रिटर्न गिफ्ट लगातार देती आ रही हैं। ऐसा ही कुछ कर्नाटक चुनाव की वोटिंग पूरी होने के बाद भी हुआ, जब तेल कमापनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में फिर से बढ़ोतरी करते हुए जनता को महंगाई की मार से मारा है । बता दें कि 24 अप्रैल के बाद सोमवार को 19 दिनों से पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी नहीं हुई थी, लेकिन कर्नाटक में चुनाव खत्म होते ही तेल कंपनियों ने यह कदम उठाया है।

देश के इतिहास में रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचे डीजल-पेट्रोल के दाम, पेट्रोल हुआ 82 के पार !

तेल कंपनियों ने पेट्रोल के दामों में 17 पैसे की बढ़ोतरी कर दी है। आखिरी बार तेल कंपनियों ने 24 अप्रैल को पेट्रोल के दाम में बढ़ोतरी की थी। चार महानगरों की बात करें तो मुंबई में सबसे ज्यादा पेट्रोल के दाम हो गए हैं। यहां पेट्रोल 82.56 रुपये हो गया है। वहीं दिल्ली में 74.80 रुपये, कोलकाता में 77.50 रुपये और चेन्नई में 77.61 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

वहीं अगर एनसीआर रीजन की बात करें तो नोएडा में सबसे महंगा पेट्रोल है। यहां पर यह 76.02 रुपये हो गया है। फरीदाबाद में 75.58 रुपये, गुड़गांव में 75.34 रुपये और गाजियाबाद में 75.90 रुपये प्रति लीटर है।

मुंबई में ही सबसे महंगा डीजल –

इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार देश के चार महानगरों में सबसे महंगा डीजल भी मुंबई में है। यह यहां पर 70.43 रुपये है। वहीं दिल्ली में 66.14 रुपये, कोलकाता में 68.68 रुपये और चेन्नई में यह 69.79 रुपये प्रति लीटर है।एनसीआर रीजन में डीजल सबसे महंगा डीजल फरीदाबाद में और सबसे सस्ता गाजियाबाद में है। फरीदाबाद में डीजल 67.26 रुपये, गुड़गांव में 67.03 रुपये, नोएडा में 66.32 रुपये और गाजियाबाद में यह 66.19 रुपये है।

मनमोहन सरकार के मुकाबले मोदी सरकार में कच्चे तेल की कीमतें आधी हैं !

इराक और साऊदी अरब के बाद ईरान कच्चे तेल का भारत में सबसे बड़ा सप्लायर है। प्रतिबंध लगने के बाद पूरी दुनिया में कच्चे तेल का दाम काफी बढ़ सकते हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिरता जा रहा है, जिसके चलते भारत सरकार पर बोझ बढ़ेगा।

गौरतलब है कि कांग्रेस की मनमोहन सरकार में कच्चे तेल की कीमतें 125 डॉलर प्रति बैरल होने के बावजूब भी डीजल और पेट्रोल के दाम केंद्र सरकार की सब्सिडी के कारण बहुत कम थे, जिससे देश की जनता पर महंगाई की मार कम थी। वहीँ मोदी सरकार में कच्चे तेल की कीमतें 50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचने के बाद भी, डीजल-पेट्रोल के दाम आधे होने की बजाय और बढ़ा दिए गए। इस वक्त 70 डॉलर प्रति बैरल के बीच चल रही हैं। फरवरी में भारत यात्रा पर आए ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी के बाद भारत ने कच्चे तेल के आयात को बढ़ा दिया था।
अगर कच्चा तेल और महंगा होता तो फिर देश में पेट्रोल-डीजल का दाम भी बढ़ जाएगा, जिससे आम लोगों के दैनिक जीवन पर काफी असर पड़ेगा। डीजल बढ़ने से जहां शहरों में दूध, फल, सब्जियां महंगी हो जाएंगी, वहीं दूसरी तरफ आना-जाना भी बढ़ जाएगा।

मोदी सरकार में गिरते रुपये ने भी बनाया रिकॉर्ड !

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रुपया भी मोदी सरकार की साख की तरह लुढ़कता ही जा रहा है, आज रुपया 66.87 के स्तर पर कारोबार करते हुए देखा गया। ब्रेंट क्रूड करीब 4 परसेंट चढ़कर 71 डॉलर के करीब निकलने में कामयाब रहा। डॉलर के मुकाबले रुपया 40 पैसे टूटकर 67.05 के स्तर पर आ गया। रुपये का यह स्तर बीते 15 महीने का निचला स्तर है। आखिरी बार रुपये का यह स्तर फरवरी 2017 को देखा गया था। बीते शुक्रवार को रुपया 22 पैसे टूटकर 66.86 के स्तर पर कारोबार कर बंद हुआ था। इसका मतलब 1 डॉलर हमारे 66.87 रूपये के बराबर पहुँच गया है, जो कि अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

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