गौमाता के खेत में घुसने से नाराज हुए पंडित जी ने गौमाता को मौत के घाट उतारा, ब्राह्मणों ने कहा- गंगा नहाओ, भोज खिलाओ, छुट्टी पाओ !

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लखनऊ, मध्य प्रदेश के एक पंडित जी मोहन तिवारी ने गुस्से में आकर गौ माता को मौत के घाट उतार दिया। गौ माता की गलती सिर्फ इतनी थी की वो पिछड़ी जाती के व्यक्ति की थी और उन्होंने पंडित जी के खेत की घास खा ली थी। पिछड़े वर्ग की गौ माता के घास खाने और खेत में घुसने से पंडित जी इतना क्रोधित हो गए कि उन्होंने ताव में आकर धारदार हथियार से गौ माता पर हमला बोल दिया जिससे गौ माता की मृत्यु हो गई।

जानकारी के मुताबिक ब्राह्मण समाज के एक व्यक्ति द्वारा गाय मारने के बाद पंचायत ने उसे गंगा नहाकर पाप धोने और गांव के लोगों के लिए भोज आयोजित कराने की सजा सुनाई। मामला टीकमगढ़ जिले के दुम्बर गांव का हैं। यहां पर एक ब्राह्मण शख्स मोहन तिवारी ने पिछड़ी जाति के एक शख्स शंकर अहीरवार की गाय को गुस्से में आकर धारदार हथियार से मार दिया जिससे गाय की मौत हो गई।

मोहन तिवारी ने शंकर अहीरवार की गाय को गुस्से में आकर सिर्फ इसलिए मार दिया क्योंकि वह उसके खेत में कई बार घुसकर उसे खराब कर चुकी थी। तिवारी ने गाय पर किसी धारदार हथियार से हमला किया था। घटना की खबर मिलने पर तुरंत ही ब्राह्मण समाज ने पंचायत की और तिवारी के लिए गंगा नहाने, भोज खिलाने की सजा का फरमान जारी किया गया।

इस मामले में वहां के इंस्पेक्टर कैलाश बाबू आर्य ने बताया कि शंकर अहीरवार ने इस मामले की शिकायत पुलिस में बजरंग दल कार्यकर्ताओं के दबाव डालने के बाद दर्ज कराई। फैसला हो जाने के बाद शंकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का इच्छुक नहीं था। आर्य ने आगे बताया कि गाय का पोस्टमॉर्टम कराने के बाद यह पता चला कि उसकी मौत घायल होने से हुई थी। इसके बाद ही तिवारी के खिलाफ मध्य प्रदेश गौ-वध प्रतिबंध कानून (Madhya Pradesh Prohibition of Cow Slaughter Act) के तहत मामला दर्ज किया गया।

इंस्पेक्टर ने जानकारी देते हुए बताया कि घटना शुक्रवार (21 जुलाई) की है। वहीं बताया जा रहा है कि गाय की मौत शनिवार सुबह (22 जुलाई) को हुई थी। वहीं आर्य ने यह भी बताया कि न ही शिकायतकर्ता और न ही गांववाले साफ-साफ बता रहें हैं की शंकर को हुए नुकसान के लिए तिवारी ने उसे कितने पैसे देने का करार किया है। पुलिस ने यह भी बताया कि शंकर के मुताबिक वह गांव की पंचायत के फैसले के बाद शिकायत दर्ज नहीं कराना चाहता था लेकिन उसने दक्षिणपंथी संगठन के दबाव में यह शिकायत दर्ज कराई।

आज के परिप्रेक्ष्य के हिसाब से अगर किसी मुस्लिम ने पंडित जी की जगह गाय पर हमला कर दिया होता तो उस व्यक्ति को परिवार समेत गौरक्षक दल ज़िंदा जला डालते जैसा कि हाल के दिनों में देखने को मिल रहा है। मगर मामला एक ब्राह्मण समाज के व्यक्ति से जुड़ा होने की वजह से कोई भी गौरक्षक दल गौ माता के क़त्ल का बदला लेने आगे नहीं आया है।

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